दिल्ली की राजनीति में मनीष सिसोदिया ऐसा नाम हैं, जो शिक्षा सुधार, प्रशासनिक प्रयोग और हाल के वर्षों में कानूनी विवादों तीनों के कारण सुर्खियों में रहा है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का जन्म 5 जनवरी 1972 को उत्तर प्रदेश के हापुड़ ज़िले में हुआ था। एक साधारण परिवार से निकलकर देश की राजधानी की सत्ता तक पहुँचना और फिर जेल तक का सफ़र उनकी राजनीतिक यात्रा को असाधारण बनाता है।

मनीष सिसोदिया ने अपने करियर की शुरुआत एक शिक्षक के रूप में की। शिक्षा के क्षेत्र में काम करते हुए वे सामाजिक मुद्दों से गहराई से जुड़े। बाद में उन्होंने पत्रकारिता और सामाजिक सक्रियता की राह पकड़ी। यही अनुभव उन्हें अन्ना हज़ारे के नेतृत्व वाले भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन तक ले गया, जिसने भारतीय राजनीति की दिशा बदलने में अहम भूमिका निभाई। इसी आंदोलन से जन्मी आम आदमी पार्टी में सिसोदिया संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे।

2013 में दिल्ली विधानसभा चुनाव जीतने के बाद मनीष सिसोदिया पहली बार सरकार में शामिल हुए। 2015 में आम आदमी पार्टी की प्रचंड जीत के बाद वे दिल्ली के उपमुख्यमंत्री बने और साथ ही शिक्षा, वित्त, आबकारी सहित कई अहम विभागों की ज़िम्मेदारी संभाली। उनका सबसे बड़ा राजनीतिक योगदान दिल्ली की सरकारी स्कूल प्रणाली में किए गए सुधार माने जाते हैं। स्कूलों के बुनियादी ढांचे, शिक्षकों के प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम में बदलाव को लेकर दिल्ली मॉडल देशभर में चर्चा का विषय बना। इसी दौर में वे पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार के रूप में भी उभरे।

साल 2021–22 में दिल्ली सरकार की नई आबकारी नीति लागू हुई, जिसका उद्देश्य शराब व्यापार में पारदर्शिता और राजस्व बढ़ाना बताया गया। हालांकि, जल्द ही इस नीति पर गंभीर सवाल उठे। आरोप लगे कि नीति के निर्माण और क्रियान्वयन में नियमों का उल्लंघन हुआ और कुछ निजी कारोबारियों को अनुचित लाभ पहुँचाया गया।

आबकारी नीति मामले में केंद्रीय जांच एजेंसियों ने मनीष सिसोदिया से कई दौर की पूछताछ की। आरोपों के अनुसार, नीति में कथित अनियमितताओं से सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचा और रिश्वत के लेन-देन की आशंका जताई गई। इन्हीं आरोपों के आधार पर फरवरी 2023 में उन्हें गिरफ़्तार किया गया। गिरफ़्तारी के बाद उन्होंने उपमुख्यमंत्री और मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया। यह घटना न केवल आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका थी, बल्कि दिल्ली की राजनीति में सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव को भी और तेज़ कर गई।

मनीष सिसोदिया की गिरफ़्तारी को लेकर राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं। एक ओर इसे कानून की कार्रवाई बताया गया, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया। यह मामला भारतीय राजनीति में जांच एजेंसियों की भूमिका, सत्ता और जवाबदेही पर एक बड़े विमर्श का हिस्सा बन गया।

5 जनवरी को जन्मे मनीष सिसोदिया की कहानी केवल एक नेता की नहीं, बल्कि आधुनिक भारतीय राजनीति के उतार-चढ़ाव की कहानी है। शिक्षक से उपमुख्यमंत्री और फिर जेल तक पहुँचा उनका सफ़र सत्ता, आदर्श और संघर्ष के जटिल रिश्तों को उजागर करता है एक ऐसा अध्याय, जिसका असर दिल्ली ही नहीं, देश की राजनीति पर लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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