विवादों में घिरे पूर्व सीएम मुलायम सिंह ; जानें क्या था वो बयान जिसनें फिर बटोरी सुर्खियां
उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा बहस के बीच मुलायम सिंह यादव का 2014 का विवादित बयान फिर चर्चा में है। जानिए क्या था बयान, क्यों हो रहा है दोबारा वायरल और इसका वर्तमान राजनीति व सामाजिक विमर्श पर क्या प्रभाव पड़ रहा है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों महिला सुरक्षा को लेकर तेज होती बहस के बीच एक पुराना विवाद फिर से सुर्खियों में है। समाजवादी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का 2014 का बयान, जिसे उस समय देशभर में कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी थी, अब दोबारा राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन गया है। यह मुद्दा न केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को हवा दे रहा है, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
मुलायम सिंह यादव भारतीय राजनीति के एक प्रभावशाली समाजवादी नेता रहे, जिन्होंने छह दशकों से अधिक लंबे राजनीतिक जीवन में तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और भारत सरकार में रक्षा मंत्री के रूप में सेवा दी। संसद और विधानसभा में उनकी सक्रिय भूमिका के बावजूद, उनके कुछ बयान समय-समय पर विवादों में रहे हैं जिनमें 2014 का यह बयान सबसे अधिक चर्चित रहा।
क्या था विवादित बयान?
2014 के लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान, उन्होंने बलात्कार जैसे गंभीर अपराध पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि “लड़के हैं, गलती हो जाती है,” और इस संदर्भ में मृत्युदंड का विरोध जताया था। इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि कुछ मामलों में पुरुष और महिला के बीच विवाद के चलते बलात्कार के आरोप लगाए जाते हैं। यह बयान सामने आते ही देशभर में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और इसे महिलाओं के प्रति असंवेदनशील दृष्टिकोण के रूप में देखा गया।
Rape ke liye phaansi dena ghalat hai,ladkon se ghalti ho jaati hai,hum satta mein aaye to kanoon mein badlav karenge-Mulayam Singh Yadav
— ANI (@ANI) April 10, 2014
हाल के दिनों में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर चल रही बहस के दौरान यह बयान फिर से उछाला जा रहा है। विपक्षी दलों के नेता इस टिप्पणी का हवाला देते हुए वर्तमान सरकार के “कठोर कानून व्यवस्था” और “महिलाओं के प्रति शून्य सहिष्णुता” के दावों की तुलना कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, चुनावी माहौल या विधानमंडल में बहस के दौरान ऐसे पुराने बयान अक्सर दोबारा सामने लाए जाते हैं, ताकि किसी दल या नेता की सोच और नीति पर सवाल उठाए जा सकें।
तत्कालीन प्रतिक्रिया और आधिकारिक रुख:
इस बयान के सामने आने के बाद देशभर में व्यापक आक्रोश देखने को मिला था। महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे गैर-जिम्मेदाराना और संवेदनहीन करार दिया।
- National Commission for Women ने इस पर संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया था।
- कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने भी इसकी आलोचना की थी।
यह मामला उस समय महिला सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को लेकर चल रही बहस का एक अहम प्रतीक बन गया था। आज, जब यह बयान फिर से चर्चा में है, तो यह केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं रह गया है। यह इस बात को भी उजागर करता है कि कैसे पुराने बयान वर्तमान राजनीतिक नैरेटिव को प्रभावित करते हैं। साथ ही, यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि महिलाओं की सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सार्वजनिक पदों पर बैठे नेताओं की भाषा और दृष्टिकोण कितना महत्वपूर्ण होता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
