बंगाल की थाली पर क्यों छिड़ा सियासी संग्राम? TMC के मंत्री फिरहाद ने क्यों दी PM को दावत की चुनौती
पश्चिम बंगाल में गैर-शाकाहारी भोजन को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो गई है। मंत्री फिरहाद हकीम के बयान के बाद टीएमसी और बीजेपी के बीच सियासी तनाव और बढ़ गया है। ममता बनर्जी, मोदी-शाह, बजरंग दल और सांस्कृतिक राजनीति को लेकर राज्य में तीखी बहस जारी है, जिससे राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

पश्चिम बंगाल के मंत्री फिरहाद हकीम
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी ने माहौल को गर्मा दिया है, जहां गैर-शाकाहारी भोजन और सांस्कृतिक पहचान को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी जुबानी जंग देखने को मिल रही है। इस विवाद के केंद्र में राज्य के मंत्री फिरहाद हकीम का बयान है, जिसने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
मंत्री फिरहाद हकीम ने एक विवादित संदर्भ में कहा कि “वे अभी इसका प्रचार शुरू ही कर रहे हैं। उनसे कहिए कि वे मेरे साथ खाना खाएं। बीजेपी, अमित शाह और नरेंद्र मोदी। मैं खुद खाना बनाकर ले जाऊंगा। क्या हम दोनों एक ही मेज पर बैठकर भोजन करेंगे? ऐसा संभव नहीं है।” उन्होंने आगे कहा कि कई जगहों पर गैर-शाकाहारी भोजन पर रोक जैसी स्थिति बन रही है, जिससे सांस्कृतिक स्वतंत्रता प्रभावित होती है। इसी क्रम में उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ क्षेत्रों में बजरंग दल की गतिविधियों के कारण “परिस्थितियाँ बिगड़ रही हैं” और यह वातावरण को प्रभावित कर सकता है।
Kolkata, West Bengal: On the controversy over non-vegetarian food, Minister Firhad Hakim says, "They have just started promoting it. Ask them to eat with me. BJP, Amit Shah, Narendra Modi. I will cook (Non-Veg) and take it myself. Will we both eat at the same table. This does not… pic.twitter.com/67Ad4ZCTs8
— IANS (@ians_india) April 17, 2026
इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर खाद्य संस्कृति और वैचारिक मतभेदों को लेकर बहस तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल में पहले भी मछली, मांस और पारंपरिक भोजन को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी होती रही है, जहां सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के बीच अक्सर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी के अन्य नेताओं ने समय-समय पर यह आरोप लगाया है कि बीजेपी नेताओं को बंगाल की खाद्य संस्कृति और परंपराओं की समझ नहीं है, खासकर मछली और मांसाहारी भोजन की परंपरा को लेकर। वहीं, बीजेपी की ओर से “डबल इंजन सरकार” और कानून-व्यवस्था के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है।
वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में पश्चिम बंगाल एक अत्यधिक ध्रुवीकृत मुकाबले की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है, जहां टीएमसी और बीजेपी के बीच सीधा राजनीतिक संघर्ष प्रमुख बन गया है। एक ओर टीएमसी अपनी कल्याणकारी योजनाओं और “बंगाल मॉडल ऑफ डेवलपमेंट” को आधार बनाकर जनता के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर बीजेपी भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय नेतृत्व के मुद्दों के सहारे बदलाव का संदेश दे रही है।
इन परिस्थितियों के बीच राज्य की राजनीति में बढ़ती बयानबाज़ी और वैचारिक टकराव यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में राजनीतिक तापमान और अधिक बढ़ सकता है, जिसका सीधा असर राज्य के सामाजिक और सांस्कृतिक वातावरण पर भी देखने को मिल सकता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
