NSA डोभाल पर फेक वीडियो का आरोप; सोशल मीडिया पर मची सनसनी
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें दावा किया गया कि उन्होंने "हिंदुओं की आईएसआई भर्ती" का बयान दिया। फैक्ट-चेक में यह स्पष्ट हुआ कि वीडियो में छेड़छाड़ (डीपफेक) की गई थी। एनएसए ने इसे खारिज करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा पर डिजिटल खतरे की चेतावनी दी।

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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल के एक वीडियो क्लिप को सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर साझा किया गया, जिसमें दावा किया गया कि उन्होंने कहा, "आईएसआई ने मुसलमानों से ज़्यादा हिंदुओं को भर्ती किया है।" हालांकि, स्वयं डोभाल ने इस वीडियो को खारिज करते हुए कहा कि इसे किसी ने डिजिटल रूप से छेड़छाड़ कर उनके बयान को विकृत किया है।
फैक्ट-चेक के अनुसार, वायरल वीडियो का स्रोत 20 मार्च 2014 को ऑस्ट्रेलिया इंडिया इंस्टीट्यूट द्वारा पोस्ट किए गए एक यूट्यूब वीडियो से है। उस वीडियो में 1:04:00 बजे डोभाल ने आईएसआई की भारत में खुफिया गतिविधियों पर चर्चा की थी। उन्होंने कहा, "मैं आपको एक छोटी सी बात बता दूं, अब जबकि मैं एक व्यक्ति के रूप में बेनकाब हो चुका हूं... आईएसआई ने भारत में खुफिया कार्यों के लिए जितने लोगों की भर्ती की है, उनमें मुसलमानों से ज़्यादा हिंदू हैं। 1947 से अब तक के सभी मामले... 4,000 से ज़्यादा मामलों में, शायद 20 प्रतिशत भी मुसलमानों के नहीं होंगे। इसलिए यह एक बहुत ही ग़लत अवधारणा है। हम मुसलमानों को अपने साथ लेकर चलेंगे, और हम इसे एक महान देश बनाएंगे।"
डोभाल ने इस वायरल क्लिप को डीपफेक करार दिया और स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी हिंदुओं या मुसलमानों के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि डिजिटल मीडिया के औज़ारों का गलत इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुँचाने और भारत के आतंकवाद-रोधी प्रयासों पर सवाल उठाने के लिए किया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, डीपफेक तकनीक की बढ़ती पहुँच ने सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो और क्लिप के माध्यम से जनमत प्रभावित करने की संभावना बढ़ा दी है। एनएसए ने मीडिया और नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है और डिजिटल कंटेंट की प्रामाणिकता जांचने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि डिजिटल युग में सूचना का गलत इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक विश्वास दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि नागरिकों को वायरल वीडियो की सत्यता जांचे बिना साझा नहीं करना चाहिए और आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करना चाहिए।
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Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
