हाथ में तिरंगा और धर्मध्वज,संग पत्नी: 20 अक्टूबर से अयोध्या के लिए निकलेगी दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन यात्रा|
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और उनकी पत्नी अमृता सिंह 20 अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक 930 किमी की गैर-राजनीतिक सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा निकालेंगे।

भोपाल में संवाददाता सम्मेलन के दौरान धर्मध्वज और दस्तावेज प्रदर्शित करते पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह तथा उनकी पत्नी अमृता सिंह।
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और उनकी पत्नी अमृता सिंह 20 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन से 'सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा' निकालने जा रहे हैं। इस यात्रा के तहत दोनों उज्जैन से अयोध्या तक लगभग 930 किलोमीटर का सफर पैदल तय करेंगे। यात्रा के दौरान वे तिरंगा और पांच रंगों वाला धर्मध्वज लेकर चलेंगे। दिग्विजय सिंह के अनुसार, धर्मध्वज उन मूल्यों का प्रतीक होगा जिन्हें वे सनातन धर्म से जोड़ते हैं, जबकि तिरंगा देश की एकता का प्रतीक होगा।
पत्रकारों से बातचीत करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि यह यात्रा पूरी तरह से गैर-राजनीतिक और शांतिपूर्ण होगी। यह किसी भी धर्म, संप्रदाय या व्यक्ति के विरोध में नहीं निकाली जा रही है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति या धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि इसका मूल सत्य, न्याय, सदाचार, करुणा, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने में निहित है।
यात्रा का मार्ग और जुड़ाव- यह पदयात्रा 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होगी और अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर पर जाकर समाप्त होगी। मार्ग की बात करें तो यह यात्रा उज्जैन से शुरू होकर मध्यप्रदेश के शाजापुर, सारंगपुर, राजगढ़, चाचौड़ा, आरोन, अशोकनगर, चंदेरी और ओरछा से होकर गुजरेगी। इसके बाद यात्रा उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगी, जहाँ उरई, कालपी, कानपुर देहात, लखनऊ देहात और बाराबंकी होते हुए अयोध्या पहुंचेगी। यह यात्रा प्रमुख रूप से उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर, ओरछा के रामराजा सरकार मंदिर और अयोध्या के श्रीराम मंदिर को आपस में जोड़ने का काम करेगी।
दफ्तर में काम करने वाले अधिकारी का जिक्र बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने अपने दफ्तर का एक अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनके दफ्तर में भी एक संघी अधिकारी काम करते हैं, जो धर्म के मामले में उनसे बहुत आगे हैं। उनका यह इशारा अपने पूर्व ओएसडी (OSD) ओपी शर्मा की तरफ था, जो नर्मदा परिक्रमा के दौरान भी दिग्विजय सिंह के साथ रहे थे।
यात्रा का मुख्य उद्देश्य और उठाए जाने वाले मुद्दे दिग्विजय सिंह के अनुसार, इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म के मूल्यों के प्रति जागरूकता फैलाना है। इसके साथ ही श्रद्धालुओं की आस्था और उनके द्वारा दिए जाने वाले धार्मिक दान की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है। यात्रा के दौरान प्रमुख हिंदू धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन और खातों से जुड़े सवाल उठाए जाएंगे।
• उज्जैन में: वे महाकाल लोक परियोजना से जुड़े मुद्दों, वहां स्थापित मूर्तियों की गुणवत्ता और भूमि से संबंधित कथित अनियमितताओं का विषय उठाएंगे।
• ओरछा में: मंदिर के खातों, संपत्तियों, आभूषणों और दान में मिली राशि के उपयोग को लेकर सवाल पूछे जाएंगे।
• अयोध्या में: श्रीराम मंदिर से जुड़े दान, चढ़ावे, भूमि लेनदेन और खर्चों में पूरी पारदर्शिता की मांग की जाएगी।
पूर्व सीएम का कहना है कि राम के नाम पर मिला दान केवल राम मंदिर के कार्यों में और महाकाल के नाम पर मिली राशि केवल महाकाल के कार्यों में ही इस्तेमाल होनी चाहिए। श्रद्धालु की आस्था और उसके द्वारा दिए गए दान दोनों की सुरक्षा होनी चाहिए, और यही वास्तविक 'सनातन स्वाभिमान' है।
डिजिटल याचिका और चुनावी सुधार की मांग
इसके अलावा, दिग्विजय सिंह ने 'चंदा चोरी' और 'वोट चोरी' के मुद्दों पर एक डिजिटल याचिका तथा मिस्ड कॉल अभियान शुरू करने की घोषणा की है। उन्होंने कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच कराए जाने और देश में आवश्यक चुनावी सुधार किए जाने की मांग भी रखी है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
