दीघा जगन्नाथ मंदिर को ‘धाम’ कहे जाने पर ओडिशा की आपत्ति के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा नामांकन में बदलाव और ‘धाम’ शब्द के उपयोग को सीमित करने से यह मामला धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक पहचान को लेकर एक अहम बहस का रूप ले चुका है।

पश्चिम बंगाल के दीघा में स्थित नव-निर्मित जगन्नाथ मंदिर को लेकर शुरू हुआ ‘धाम’ शब्द विवाद अब एक गंभीर सांस्कृतिक और प्रशासनिक मुद्दे का रूप ले चुका है। ओडिशा सरकार द्वारा उठाई गई आपत्ति और लगातार दबाव के बाद इस मामले ने दोनों राज्यों के बीच धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक पहचान को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है।

यह विवाद तब गहराया जब पश्चिम बंगाल सरकार ने इस मंदिर को “जगन्नाथ धाम, दीघा” के रूप में प्रचारित किया, जिसके बाद ओडिशा ने इसे परंपरागत धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। दीघा में स्थित यह मंदिर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को समर्पित एक आधुनिक धार्मिक संरचना है, जिसे पूरी जगन्नाथ मंदिर की स्थापत्य और भक्ति परंपरा से प्रेरित होकर बनाया गया है। अप्रैल 2025 में इसका उद्घाटन किया गया था और इसे न केवल धार्मिक केंद्र बल्कि पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित किया गया है।

विवाद की जड़ उस समय सामने आई जब राज्य सरकार ने इस मंदिर को “जगन्नाथ धाम” के रूप में प्रस्तुत करना शुरू किया। ओडिशा सरकार ने तुरंत इस शब्द के प्रयोग पर आपत्ति जताई और स्पष्ट किया कि हिंदू धार्मिक परंपरा में “धाम” शब्द अत्यंत पवित्र और विशिष्ट है, जिसका उपयोग केवल चार प्रमुख तीर्थ स्थलों पुरी, द्वारका, बद्रीनाथ और रामेश्वरम के लिए ही मान्य माना जाता है। ओडिशा का तर्क रहा कि जगन्नाथ धाम का दर्जा केवल पुरी मंदिर को ही प्राप्त है।

ओडिशा सरकार ने इस मुद्दे पर आधिकारिक स्तर पर हस्तक्षेप करते हुए पश्चिम बंगाल सरकार से “धाम” शब्द के उपयोग को हटाने का आग्रह किया। राज्य के धार्मिक और विधिक विभागों की ओर से यह भी कहा गया कि इस प्रकार का नामांकन धार्मिक भावनाओं और सांस्कृतिक पहचान पर प्रभाव डाल सकता है। इसके बाद ओडिशा ने पुनः पत्राचार करते हुए दीघा मंदिर से “धाम” शब्द हटाने और पुरी जगन्नाथ मंदिर की विशिष्ट परंपरागत स्थिति की रक्षा की मांग की।

लगातार उठते विरोध और दबाव के बीच पश्चिम बंगाल प्रशासन की ओर से भी स्थिति में बदलाव देखा गया। शुरुआती चरण में जहां इस मंदिर को “जगन्नाथ धाम” के रूप में प्रचारित किया जा रहा था, वहीं बाद में कई स्थानों पर आधिकारिक संकेतों और उपयोग में इस शब्द के प्रयोग को सीमित या समाप्त कर दिया गया। प्रशासन ने कई संदर्भों में इसे केवल “जगन्नाथ मंदिर, दीघा” के रूप में उल्लेख करना शुरू किया।

हालांकि, यह मामला केवल नामकरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे एक व्यापक सांस्कृतिक बहस भी शुरू हो गई है। ओडिशा पक्ष का मानना है कि “धाम” जैसे पवित्र शब्द का अन्य मंदिरों के लिए उपयोग पुरी जगन्नाथ मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक विशिष्टता को प्रभावित कर सकता है। वहीं पश्चिम बंगाल में समर्थक वर्ग का कहना है कि दीघा मंदिर एक नया भक्ति केंद्र है, जो जगन्नाथ संस्कृति को राज्य में और अधिक विस्तार दे रहा है।

यह मुद्दा अब दोनों राज्यों के बीच एक संवेदनशील सांस्कृतिक और राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है, जहां एक ओर धार्मिक परंपरा की ऐतिहासिक परिभाषा है, तो दूसरी ओर आधुनिक धार्मिक विस्तार की नई व्याख्या। वर्तमान स्थिति में ओडिशा सरकार लगातार इस विषय पर प्रशासनिक और कूटनीतिक दबाव बनाए हुए है, जबकि पश्चिम बंगाल प्रशासन ने आंशिक रूप से “धाम” शब्द के उपयोग से दूरी बनाई है। बावजूद इसके, यह विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और वर्ष 2026 में भी यह मुद्दा राजनीतिक और सांस्कृतिक विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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