बेंगलुरु/चेन्नई: परिसीमन के मुद्दे पर दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंताओं के बीच कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मौजूदा लोकसभा सीटों की संख्या को बरकरार रखने की मांग दोहराई है। उन्होंने कहा कि लोकसभा की 543 सीटों को अगले 25 वर्षों तक बनाए रखा जाना चाहिए और इन्हीं सीटों के भीतर महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया जाना चाहिए। शिवकुमार ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से अलग रखा जाना चाहिए।

शिवकुमार ने चेन्नई में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में परिसीमन को लेकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण में दक्षिणी राज्यों की सफलता का असर उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर नहीं पड़ना चाहिए। उनका कहना था कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उन्हें इसकी वजह से राजनीतिक प्रतिनिधित्व के मामले में नुकसान नहीं होना चाहिए।

1971 की जनगणना को आधार बनाने की मांग

डीके शिवकुमार ने परिसीमन के लिए 1971 की जनगणना को आधार बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, दक्षिणी राज्यों को यह आश्वासन दिया गया है कि किसी भी दक्षिणी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी, लेकिन प्रतिनिधित्व केवल सीटों की संख्या तक सीमित नहीं है।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संबंध राज्यों की अहमियत और उनकी आवाज से भी है। शिवकुमार ने उम्मीद जताई कि बैठक में मौजूद अन्य मुख्यमंत्री भी इस मांग का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि 1971 के आधार का सम्मान करते हुए दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की रक्षा की जानी चाहिए।

महिला आरक्षण को परिसीमन से अलग रखने की मांग

शिवकुमार ने परिसीमन के साथ महिला आरक्षण के मुद्दे को भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व के लिए लंबे समय तक इंतजार किया है। इसलिए महिला आरक्षण लागू करने के लिए जनगणना या परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद से एक प्रस्ताव पारित करने की अपील की। इसमें अगले 25 वर्षों तक लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 पर बनाए रखने और इन्हीं सीटों के भीतर महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की मांग शामिल करने की बात कही गई।

दक्षिणी राज्यों की आर्थिक भूमिका का मुद्दा

शिवकुमार ने बैठक में दक्षिणी राज्यों के आर्थिक योगदान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत देश की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण इंजन है। उनके अनुसार, दक्षिण के पांच राज्य देश की कुल आबादी में करीब 20 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं, जबकि सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में उनका योगदान लगभग 33 प्रतिशत है।

उन्होंने कहा कि आर्थिक योगदान के अनुरूप दक्षिणी राज्यों के साथ वित्तीय आवंटन, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सम्मान के मामले में निष्पक्ष रवैया अपनाया जाना चाहिए। उनका जोर इस बात पर था कि जनसंख्या और आर्थिक योगदान के बीच संतुलन को ध्यान में रखते हुए राज्यों के हितों की रक्षा की जाए।

बैठक में कई राज्यों के प्रतिनिधि शामिल

दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में डीके शिवकुमार के अलावा तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय, केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क मल्लू भी शामिल हुए।

परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों में लंबे समय से यह चिंता व्यक्त की जा रही है कि यदि संसदीय सीटों का पुनर्निर्धारण आबादी के आधार पर होता है, तो जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। इसी संदर्भ में शिवकुमार ने मौजूदा 543 सीटों को बरकरार रखने और महिलाओं को इन्हीं सीटों में आरक्षण देने की मांग सामने रखी है।

वहीं, बैठक के दौरान तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के रुख में परिसीमन के मुद्दे पर बदलाव की चर्चा भी सामने आई। ऐसे में दक्षिणी राज्यों की ओर से परिसीमन, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और महिला आरक्षण को लेकर रखी जा रही मांगें आने वाले समय में इस बहस का अहम हिस्सा बनी रह सकती हैं।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

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