तमिलनाडु के किसानों के हक के लिए PM मोदी से मिले CM विजय, मेट्रो-हाईवे प्रोजेक्ट्स हेतु फंड की मांग|
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मिलकर राज्य के मुद्दों पर चर्चा की।

नई दिल्ली में पीएम मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर पुष्पगुच्छ भेंट करते तमिलनाडु के सीएम सी. जोसेफ विजय।
नई दिल्ली/चेन्नई: देश की राजधानी नई दिल्ली में आज एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी राजनीतिक हलचल देखने को मिली, जब तमिलनाडु के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके आधिकारिक कार्यालय में मुलाकात की। मुख्यमंत्री विजय की इस दिल्ली यात्रा को तमिलनाडु के अधिकारों, विकास परियोजनाओं और केंद्र-राज्य संबंधों के लिहाज से बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक बेहद लंबी और गहन बैठक की, जिसमें उन्होंने कावेरी नदी पर प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना के विवाद, तमिल मछुआरों की गिरफ्तारी और राज्य के पारंपरिक आह्वान गीत से जुड़े कई ज्वलंत व संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर चर्चा की। इसके तत्काल बाद उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी मुलाकात कर राज्य के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए प्राथमिकता के आधार पर विशेष फंड जारी करने का अनुरोध किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सबसे पहले तमिलनाडु के किसानों के हितों की रक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कावेरी नदी पर कर्नाटक सरकार द्वारा प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना का कड़ा विरोध करते हुए प्रधानमंत्री से सीधे हस्तक्षेप की मांग की। मुख्यमंत्री विजय ने पीएम मोदी को अवगत कराया कि कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री द्वारा मेकेदातु बांध के लिए भूमि पूजन करने की हालिया घोषणा कावेरी जल विवाद ट्रिब्यूनल और देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) के आदेशों का सीधे तौर पर उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के इस एकतरफा कदम से तमिलनाडु के डेल्टा क्षेत्रों में रहने वाले लाखों किसानों के बीच गहरी चिंता और असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है। सीएम विजय ने प्रधानमंत्री से विशेष अनुरोध किया कि वे जल शक्ति मंत्रालय और केंद्रीय जल आयोग (CWC) को स्पष्ट निर्देश जारी करें कि तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी जैसे निचले तटवर्ती राज्यों की लिखित सहमति के बिना मेकेदातु परियोजना को किसी भी स्तर पर मंजूरी न दी जाए।
बैठक के दौरान राज्य की सांस्कृतिक पहचान और भाषाई गौरव का मुद्दा भी बेहद गरमाया रहा। मुख्यमंत्री विजय ने 'तमिल थाई वाझ्थु' (तमिलनाडु का आधिकारिक राज्य आह्वान गीत) को लेकर गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक हालिया सर्कुलर पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि तमिलनाडु की यह स्थापित परंपरा रही है कि सभी सरकारी और आधिकारिक कार्यक्रमों की शुरुआत इसी राज्य गीत के साथ होती है। हालांकि, इस साल जनवरी में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए एक नए सर्कुलर के बाद, कुछ कार्यक्रमों में इस परंपरा को बदलकर पहले राष्ट्रगान गाया जाने लगा। मुख्यमंत्री ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि गृह मंत्रालय को तुरंत स्पष्ट निर्देश दिए जाएं ताकि भविष्य के सभी सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत तमिलनाडु की पुरानी परंपरा के अनुसार पहले 'तमिल थाई वाझ्थु' गीत से ही की जा सके। इसके साथ ही, उन्होंने अपनी नीदरलैंड यात्रा के दौरान ऐतिहासिक 'आनाई मंगालम कॉपर प्लेट्स' को वापस भारत लाने के सफल प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री मोदी का विशेष रूप से धन्यवाद किया और इसे तमिल संस्कृति व इतिहास के लिए एक गौरवशाली कदम बताया।
प्रशासनिक और आर्थिक मोर्चे पर तमिलनाडु को एक वैश्विक औद्योगिक केंद्र बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री विजय ने केंद्रीय रक्षा मंत्रालय और वित्त मंत्रालय से भी बड़े सहयोग की अपेक्षा की। उन्होंने प्रधानमंत्री के सामने रक्षा क्षेत्र से जुड़े बड़े निवेशों का खाका प्रस्तुत करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों से रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के साथ 'एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट' (AMCA) डिजाइन एंड डेवलपमेंट सेंटर और 'सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स' (CABS) को तमिलनाडु में स्थापित करने को लेकर निरंतर चर्चा चल रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इन दोनों महत्वाकांक्षी रक्षा परियोजनाओं को बिना किसी देरी के तमिलनाडु में ही स्थापित करने की अंतिम मंजूरी देने का अनुरोध किया।
प्रधानमंत्री से मुलाकात के ठीक बाद, मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के कार्यालय पहुंचकर उनसे शिष्टाचार भेंट की, जिसकी आधिकारिक जानकारी वित्त मंत्रालय ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर भी साझा की। इस बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने तमिलनाडु के बुनियादी ढांचे, शिक्षा, परिवहन और उद्योग जगत से जुड़े कई बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए वित्तीय सहयोग मांगा। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु वर्तमान में देश के सबसे तेजी से विकसित होने वाले राज्यों में शुमार है, और इस विकास की रफ्तार को बनाए रखने के लिए केंद्र का आर्थिक सहयोग अनिवार्य है। उन्होंने होसुर, कोयंबटूर और मदुरै जैसे प्रमुख औद्योगिक शहरों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए मेट्रो रेल परियोजनाओं, बंदरगाहों के आधुनिकीकरण, राष्ट्रीय राजमार्गों, रेलवे विकास और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए प्राथमिकता के आधार पर फंड जारी करने की पुरजोर वकालत की। साथ ही, उन्होंने राज्य की सुदृढ़ शिक्षा व्यवस्था को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए तमिलनाडु में 'इंस्टीट्यूट ऑफ नेशनल इम्पॉर्टेंस' (राष्ट्रीय महत्व के संस्थान) स्थापित करने की मांग भी वित्त मंत्री के समक्ष रखी।
मुख्यमंत्री विजय की इस दिल्ली यात्रा और शीर्ष केंद्रीय नेतृत्व के साथ हुई इन बैठकों ने केंद्र-राज्य समन्वय के एक नए दौर की शुरुआत की है। मेकेदातु बांध परियोजना पर सुप्रीम कोर्ट के कानूनी दिशा-निर्देशों और संघीय ढांचे के सम्मान की जो मांग तमिलनाडु ने उठाई है, उस पर अब केंद्र सरकार के अगले कदम पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं। यह बैठक न केवल तमिलनाडु के आर्थिक विकास की गति को तेज करने में मील का पत्थर साबित हो सकती है, बल्कि कावेरी जल विवाद जैसे दशकों पुराने अंतर-राजकीय संवेदनशील मुद्दों पर कानूनी और कूटनीतिक समाधान का मार्ग भी प्रशस्त कर सकती है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
