पश्चिम बंगाल के मध्यग्राम में चंद्रनाथ रथ की हत्या ने सनसनी फैला दी है। शुरुआती जांच में ग्लॉक 47X पिस्टल, फर्जी नंबर प्लेट वाले वाहन और पेशेवर शूटरों की आशंका सामने आई है। चुनाव परिणाम के 48 घंटे बाद हुई इस वारदात ने हथियार तस्करी, फंडिंग और साजिश को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में हुई चंद्रनाथ रथ की सनसनीखेज हत्या ने राज्य की कानून-व्यवस्था और संगठित आपराधिक नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के महज 48 घंटे बाद हुए इस हमले ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। शुरुआती जांच में जिस तरह के हथियार, हमले की योजना और फरारी के तरीके सामने आए हैं, उससे पुलिस भी यह मानकर चल रही है कि इस वारदात में साधारण अपराधियों की नहीं, बल्कि प्रशिक्षित और पेशेवर शूटरों की भूमिका हो सकती है।

42 वर्षीय चंद्रनाथ रथ बुधवार रात को कोलकाता से अपने घर मध्यग्राम लौट रहे थे। उनकी एसयूवी को कथित तौर पर बाइक सवार हमलावरों ने रास्ते में घेर लिया। पुलिस के अनुसार हमलावरों ने बेहद सुनियोजित तरीके से पहले वाहन को रोका और फिर बेहद नजदीक से ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। घटना के वक्त गाड़ी चला रहे बुद्धदेब बेरा भी गोली लगने से घायल हो गए और उन्हें कोलकाता के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

जांच एजेंसियों के मुताबिक घटनास्थल से खाली कारतूस और जिंदा गोलियां बरामद की गई हैं। प्रारंभिक फॉरेंसिक जांच में इस बात की आशंका जताई गई है कि हमले में ग्लॉक 47X जैसे अत्याधुनिक पिस्टल का इस्तेमाल किया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के हथियार आम अपराधियों की पहुंच में नहीं होते और इनका इस्तेमाल अक्सर प्रशिक्षित शूटर या संगठित गैंग करते हैं।

यही कारण है कि अब इस हत्या को लेकर कई गंभीर सवाल उठने लगे हैं। यदि वास्तव में ग्लॉक पिस्टल का इस्तेमाल हुआ, तो वह पश्चिम बंगाल तक पहुंची कैसे? आखिर इतने महंगे और प्रतिबंधित श्रेणी के हथियार की फंडिंग किसने की? हमलावरों को किसने भुगतान किया और टारगेट चुनने से लेकर हमले के समय तक की पूरी रणनीति किसने तैयार की? चुनाव परिणाम आने के कुछ घंटों बाद ही इस तरह की घातक कार्रवाई ने पूरे घटनाक्रम को और अधिक संदिग्ध बना दिया है।

पुलिस की जांच में एक और अहम तथ्य सामने आया है। वारदात में इस्तेमाल किए जाने की आशंका वाले एक संदिग्ध वाहन को जब्त किया गया है। राज्य के डीजीपी सिद्धिनाथ गुप्ता के अनुसार, इस वाहन ने कथित तौर पर रथ की गाड़ी का रास्ता रोका था। हालांकि जांच में पाया गया कि वाहन पर लगी नंबर प्लेट फर्जी थी। अधिकारियों का मानना है कि यह पूरी वारदात पहले से तय योजना के तहत अंजाम दी गई, ताकि हमलावर आसानी से पहचान से बच सकें।

भारत में 9 एमएम ग्लॉक पिस्टल सामान्य नागरिकों के लिए प्रतिबंधित श्रेणी में मानी जाती है और इन्हें रखने के लिए विशेष सरकारी अनुमति की आवश्यकता होती है। ऐसे में इस हथियार की मौजूदगी ने जांच एजेंसियों का ध्यान संभावित तस्करी नेटवर्क और संगठित अपराध सिंडिकेट की ओर भी खींचा है। पुलिस अब इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या हथियार राज्य के बाहर से तस्करी कर लाए गए थे।

फिलहाल इस मामले में किसी भी आधिकारिक साजिशकर्ता या आरोपी की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह की तैयारी, हथियारों का चयन और हमले का तरीका सामने आया है, उसने इस हत्या को एक साधारण आपराधिक घटना से कहीं अधिक गंभीर बना दिया है। राजनीतिक तनाव के बीच हुई इस हत्या ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने कई ऐसे सवाल छोड़ दिए हैं, जिनके जवाब आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति और कानून-व्यवस्था दोनों पर बड़ा असर डाल सकते हैं।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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