दशहरा रैली रद्द कर बाढ़ पीड़ितों की मदद करें: भाजपा का उद्धव ठाकरे पर तंज
तंज कसते हुए पूछा, “जब सामना अखबार में वही बातें रोज़ छपती हैं, तो आम कार्यकर्ता को लाखों रुपये खर्च कर इस रैली में शामिल होने की क्या ज़रूरत है?”

मुंबई। महाराष्ट्र राज्य के कई जिलों में बाढ़ ने तबाही मचाई है, खासकर मराठवाड़ा जैसे क्षेत्र, जो सामान्यतः सूखे के लिए जाना जाता है, इस बार पानी में डूब गया है। इसी पृष्ठभूमि में भाजपा ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को आड़े हाथों लेते हुए उन पर तीखा तंज कसा है। भाजपा के मुख्य प्रवक्ता केशव उपाध्ये ने सोमवार को मांग की कि उद्धव ठाकरे अपनी पार्टी की परंपरागत दशहरा रैली को इस बार रद्द कर दें और उस पर होने वाला खर्च मराठवाड़ा के बाढ़ पीड़ितों की मदद में लगाएं। उपाध्ये ने कहा, “जब उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने आपदा प्रबंधन के समय अपेक्षित कदम नहीं उठाए और घर पर ही बैठे रहे। अब अपनी गलती सुधारने का सही समय आ गया है।”
शिवसेना के लिए दशहरा रैली केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि परंपरा रही है। हर साल मुंबई के शिवाजी पार्क में होने वाली यह रैली पार्टी की ताकत और विचारधारा का प्रदर्शन मानी जाती रही है। इस साल भी 2 अक्तूबर को उद्धव ठाकरे वहां रैली को संबोधित करने वाले हैं। लेकिन बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए भाजपा ने इस रैली को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
केशव उपाध्ये ने कहा कि मराठवाड़ा में लोगों ने बाढ़ के कारण अपना सबकुछ खो दिया है। खेत, घर और रोज़गार सब पानी में बह गया है। उद्धव ठाकरे ने हाल ही में पांच बाढ़ प्रभावित जिलों का दौरा किया और पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर संवेदना जताई। लेकिन भाजपा नेता का कहना है कि अब केवल संवेदना जताने का समय नहीं है, बल्कि वास्तविक कार्रवाई की ज़रूरत है। उन्होंने कहा, “यदि उद्धव ठाकरे दशहरा रैली रद्द कर उस पर होने वाला खर्च बाढ़ पीड़ितों को समर्पित करते हैं, तो यही उनकी सच्ची संवेदना और चिंता को साबित करेगा।”
भाजपा प्रवक्ता ने इस दौरान दशहरा रैली की मौजूदा थीम और स्वरूप पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शिवसेना संस्थापक बाल ठाकरे के समय में यह रैली विचारधारा और संगठन की शक्ति का केंद्र हुआ करती थी। मगर अब यह केवल दूसरों को ‘गद्दार’ कहने और अपनी पार्टी छिन जाने की कहानी दोहराने तक सीमित हो गई है। उपाध्ये ने तंज कसते हुए पूछा, “जब सामना अखबार में वही बातें रोज़ छपती हैं, तो आम कार्यकर्ता को लाखों रुपये खर्च कर इस रैली में शामिल होने की क्या ज़रूरत है?”
उन्होंने आगे आरोप लगाया कि दशहरा रैली के आयोजन में भारी धनराशि खर्च होती है, जबकि राज्य में हजारों परिवार इस समय बाढ़ के कारण बेघर और बेरोजगार हो चुके हैं। यदि वही धनराशि पीड़ितों तक पहुँचती है, तो यह उनके जीवन को संवारने की दिशा में एक ठोस कदम होगा।
राज्य में लगातार बारिश के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त है। मराठवाड़ा और विदर्भ सहित कई इलाकों में पानी से घर बह गए हैं, सड़कें टूट गई हैं और किसानों की फसलें नष्ट हो चुकी हैं। राहत और बचाव कार्य जारी हैं, लेकिन प्रभावितों की संख्या इतनी अधिक है कि सरकारी मदद पर्याप्त नहीं मानी जा रही।
ऐसे माहौल में भाजपा द्वारा उद्धव ठाकरे की दशहरा रैली पर सवाल उठाना राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी इस तंज और मांग पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
