BJP कैसे बनी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी? स्थापना दिवस पर जानिए भाजपा के शून्य से शिखर की कहानी
भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस पर जानिए 1980 से 2026 तक BJP का राजनीतिक सफर, जनसंघ से उदय, राम मंदिर आंदोलन, वाजपेयी युग से मोदी सरकार तक की पूरी कहानी और विचारधारा का प्रभाव।

भारत की राजनीति में एक निर्णायक और प्रभावशाली ताकत के रूप में उभरी भारतीय जनता पार्टी (BJP) हर साल 6 अप्रैल को अपना स्थापना दिवस मनाती है। यह दिन केवल एक राजनीतिक दल के गठन का स्मरण नहीं, बल्कि उसकी वैचारिक यात्रा, संघर्षों और सत्ता तक पहुंचने की कहानी का प्रतीक भी है। वर्ष 1980 में नई दिल्ली के कोटला मैदान में हुए एक ऐतिहासिक सम्मेलन में पार्टी का औपचारिक गठन हुआ, जहां अटल बिहारी वाजपेयी को इसका पहला अध्यक्ष चुना गया।
भारतीय जनता पार्टी की जड़ें 1951 में स्थापित भारतीय जनसंघ से जुड़ी हैं, जिसकी स्थापना श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी। जनसंघ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ मिलकर एक वैचारिक और संगठनात्मक आधार तैयार किया। 1975-77 के आपातकाल के बाद यह संगठन अन्य दलों के साथ मिलकर जनता पार्टी का हिस्सा बना, जिसने 1977 के आम चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया। हालांकि, वैचारिक मतभेदों के चलते 1980 में जनता पार्टी का विघटन हुआ और जनसंघ के नेताओं ने भाजपा के रूप में एक नई शुरुआत की।
शुरुआती वर्षों में भाजपा को सीमित सफलता मिली। 1984 के लोकसभा चुनाव में पार्टी केवल दो सीटें ही जीत पाई। लेकिन 1990 के दशक में लाल कृष्ण आडवाणी द्वारा शुरू की गई राम रथ यात्रा और अयोध्या आंदोलन ने पार्टी को व्यापक जनसमर्थन दिलाया। इसके बाद भाजपा राष्ट्रीय राजनीति में तेजी से उभरी और 1996 में पहली बार संसद में सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई, हालांकि बहुमत न होने के कारण उसकी सरकार केवल 13 दिनों तक ही चल सकी।
1998 और 1999 के चुनावों के बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेतृत्व में वाजपेयी सरकार ने केंद्र में पूर्ण कार्यकाल पूरा किया, जो पहली गैर-कांग्रेस सरकार थी जिसने पांच साल तक शासन किया। इसके बाद 2004 में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा और अगले दस वर्षों तक वह विपक्ष में रही।
2014 में भाजपा ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ऐतिहासिक जीत दर्ज की और पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई। इसके बाद 2019 में और फिर 2024 में भी पार्टी ने चुनावी सफलता हासिल की और वर्तमान में केंद्र की सत्ता पर काबिज है। 2026 तक भाजपा देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बन चुकी है, जिसका प्रभाव संसद और कई राज्यों में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
वैचारिक रूप से भाजपा “एकात्म मानववाद” और “हिंदुत्व” की विचारधारा पर आधारित है, जिसे दीनदयाल उपाध्याय ने विकसित किया था। पार्टी की नीतियों में सामाजिक रूढ़िवाद, राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक पहचान पर जोर देखा जाता है। सत्ता में आने के बाद भाजपा ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए, जिनमें तीन तलाक पर प्रतिबंध और अनुच्छेद 370 को समाप्त करना शामिल है।
पार्टी का चुनाव चिह्न कमल का फूल है, जो भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद का प्रतीक माना जाता है। इसके साथ ही भगवा रंग का व्यापक उपयोग पार्टी की वैचारिक पहचान को दर्शाता है।
आज, भाजपा केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति की दिशा तय करने वाली एक प्रमुख शक्ति बन चुकी है। 6 अप्रैल का स्थापना दिवस न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए बल्कि देश की राजनीतिक यात्रा को समझने वालों के लिए भी एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो इस दल के उदय, विकास और प्रभाव को प्रतिबिंबित करता है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
