सम्राट का संकल्प- सम्राट चौधरी का तेजस्वी को जवाब, बहुमत मिलते ही कहा बिहार में अब न अपराध होगा, न भ्रष्टाचार।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सदन में बहुमत साबित किया और लालू यादव के शासनकाल को अपनी राजनीति में आने की मुख्य वजह बताया।

बिहार विधानसभा में बहुमत परीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (बाएं) और तेजस्वी यादव (दाएं) सदन की कार्यवाही में भाग लेते हुए।
बिहार में नए युग का सूत्रपात: सम्राट चौधरी ने विधानसभा में हासिल किया विश्वास मत
बिहार की राजनीति में आज एक ऐतिहासिक अध्याय लिखा गया, जब भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता सम्राट चौधरी ने राज्य के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में विधानसभा में अपना बहुमत साबित किया। 15 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद आज का दिन उनके और एनडीए गठबंधन के लिए अग्निपरीक्षा के समान था, जिसे उन्होंने भारी आत्मविश्वास के साथ पार कर लिया। यह राज्य के राजनीतिक इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना है क्योंकि पहली बार भारतीय जनता पार्टी का कोई समर्पित नेता मुख्यमंत्री के रूप में सदन का नेतृत्व कर रहा है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार द्वारा बुलाए गए इस विशेष सत्र की कार्यवाही सुबह से ही गहमागहमी भरी रही और सत्ता पक्ष के खेमे में जीत का उत्साह साफ झलक रहा था।
बहुमत परीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के हमलों का अत्यंत प्रखरता और शालीनता के साथ जवाब दिया। सदन को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक अतीत के उन पन्नों को खोला जो उनके संघर्ष की कहानी बयां करते हैं। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वे शौक से राजनीति में नहीं आए, बल्कि लालू प्रसाद यादव के शासनकाल के दौरान हुए अत्याचारों और अन्याय ने उन्हें राजनेता बनने पर मजबूर किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका पूरा राजनीतिक सफर राजद के कुशासन के विरुद्ध संघर्ष की उपज है और वे राज्य की जनता को उस दौर की पुनरावृत्ति से बचाने के लिए संकल्पित हैं।
शासन के प्रति अपने दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हुए मुख्यमंत्री ने 'ट्रिपल सी' (Triple C) का मंत्र दिया। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि उनकी सरकार अपराध (Crime), भ्रष्टाचार (Corruption) और सांप्रदायिकता (Communalism) से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगी। सम्राट चौधरी ने जोर देकर कहा कि जिस प्रकार नीतीश कुमार ने इन सिद्धांतों को बिहार की पहचान बनाया था, उनकी सरकार भी उसी पारदर्शिता और सुशासन की राह पर अडिग रहेगी। उन्होंने विपक्ष को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि बिहार में अब कानून का शासन सर्वोपरि होगा और किसी भी प्रकार की अराजकता के लिए कोई स्थान नहीं होगा।
बहस के दौरान उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र यादव ने भी विपक्ष के उन दावों को खारिज किया जिसमें बिहार के खजाने को खाली बताया जा रहा था। उन्होंने तथ्यों के साथ सदन को सूचित किया कि राज्य के पास विकास कार्यों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं और फंड की कोई कमी नहीं है। वहीं, उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा करते हुए इसका श्रेय पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरगामी सोच को दिया। सदन में उस समय एक दिलचस्प मोड़ आया जब एआईएमआईएम विधायक अख्तरुल ईमान ने न केवल नीतीश कुमार के विकास कार्यों की प्रशंसा की, बल्कि नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से जनहित में बेहतर काम करने की उम्मीद जताते हुए उन्हें अपनी शुभकामनाएं भी दीं। यह सत्र न केवल बहुमत सिद्ध करने का मंच बना, बल्कि इसने बिहार की भविष्य की राजनीति की एक नई और सख्त दिशा भी तय कर दी है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
