नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, क्या दिल्ली से मिलेगी बिहार को नई कैबिनेट?
पूर्व सीएम नीतीश कुमार से मार्गदर्शन लेने के बाद दिल्ली पहुंचे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, नए मंत्रियों के नामों पर भाजपा शीर्ष नेतृत्व के साथ होगी अंतिम चर्चा।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर उनका अभिवादन करते हुए।
बिहार की राजनीति में एक बार फिर सरगर्मियां तेज हो गई हैं क्योंकि राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से एक महत्वपूर्ण मुलाकात के बाद दिल्ली का रुख किया है। सत्ता के गलियारों में इस दौरे को आगामी मंत्रिमंडल विस्तार की अंतिम तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। पटना से दिल्ली तक की इस दौड़ ने राज्य में नए मंत्रियों के नामों पर मुहर लगने की संभावनाओं को प्रबल कर दिया है।
शनिवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अचानक पटना के 7 सर्कुलर रोड स्थित नीतीश कुमार के आवास पर पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच करीब 15 मिनट तक बातचीत हुई। इस संक्षिप्त लेकिन सार्थक मुलाकात को लेकर कयासों का बाजार गर्म है। सूत्रों का मानना है कि सम्राट चौधरी दिल्ली जाने से पहले नीतीश कुमार का कोई विशेष 'संदेश' लेकर निकले हैं, जो गठबंधन की एकजुटता और भविष्य की रणनीतियों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। सम्राट चौधरी ने खुद इस बातचीत को सौहार्दपूर्ण बताते हुए कहा कि उन्हें नीतीश कुमार के लंबे राजनीतिक अनुभव और मार्गदर्शन से हमेशा प्रेरणा मिलती है।
नीतीश कुमार से मुलाकात के तुरंत बाद सम्राट चौधरी दिल्ली के लिए रवाना हो गए। राष्ट्रीय राजधानी में उनके कार्यक्रमों की रूपरेखा काफी व्यस्त है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे, जहां बिहार के राजनीतिक परिदृश्य और शासन व्यवस्था पर चर्चा होगी। इसके अतिरिक्त, वे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और बिहार भाजपा के प्रभारी विनोद तावड़े के साथ भी बैठकें करेंगे। इन मुलाकातों का प्राथमिक उद्देश्य मंत्रिमंडल विस्तार के लिए संभावित मंत्रियों की सूची को अंतिम रूप देना और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की स्वीकृति प्राप्त करना है।
बिहार सरकार की वर्तमान स्थिति पर गौर करें तो मंत्रिमंडल विस्तार की आवश्यकता अनिवार्य प्रतीत होती है। 14 अप्रैल को नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री के रूप में बागडोर संभाली थी। उनके साथ विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। वर्तमान में, प्रशासनिक कार्यों का भारी बोझ केवल इन्हीं तीन नेताओं के कंधों पर है। मुख्यमंत्री अकेले 29 विभागों का कार्यभार संभाल रहे हैं, जबकि उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी 10 और बिजेंद्र प्रसाद यादव 8 विभागों का प्रबंधन देख रहे हैं। मंत्रिमंडल विस्तार न केवल इस प्रशासनिक बोझ को कम करेगा बल्कि सुशासन की गति को भी तेज करेगा।
दिल्ली में होने वाली इन बैठकों के दौरान संगठनात्मक मामलों और राज्य की आगामी राजनीतिक रणनीति पर भी मंथन होने की संभावना है। भाजपा नेतृत्व और राज्य सरकार के बीच इस तालमेल से बिहार में शासन की एक नई रूपरेखा तैयार की जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस विस्तार के जरिए सरकार में नए चेहरों को शामिल कर क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को भी साधने का प्रयास किया जाएगा। दिल्ली में अपनी महत्वपूर्ण बैठकें संपन्न करने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के रविवार शाम तक पटना लौटने की उम्मीद है। उनके लौटने के बाद ही बिहार में नई कैबिनेट की तस्वीर पूरी तरह साफ हो पाएगी।

Lalita Rajput
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