बंगाल में बीजेपी की जीत से तीस्ता समझौते की जगी आस, क्या अब खत्म होगा दशकों पुराना पानी का सूखा?
विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने बीजिंग दौरे से पहले कहा कि 2011 के समझौते पर पुनर्विचार का यह सही समय है।

नई दिल्ली में एक कूटनीतिक बैठक के दौरान भारत और बांग्लादेश के प्रतिनिधिमंडल के बीच तीस्ता जल विवाद पर चर्चा।
ढाका/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के ऐतिहासिक परिणामों ने न केवल भारत की आंतरिक राजनीति को प्रभावित किया है, बल्कि पड़ोसी देश बांग्लादेश के साथ दशकों से लंबित कूटनीतिक मुद्दों को भी नई दिशा दी है। पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत के तुरंत बाद बांग्लादेश ने तीस्ता नदी जल बंटवारे के पेचीदा मसले पर एक बड़ी उम्मीद जताई है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने संकेत दिया है कि राज्य में बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियों के बीच अब अटके हुए तीस्ता समझौते पर सार्थक चर्चा की संभावना बढ़ गई है।
बीजिंग की महत्वपूर्ण आधिकारिक यात्रा पर रवाना होने से ठीक पहले ढाका में पत्रकारों से बात करते हुए रहमान ने तीस्ता समझौते के भविष्य पर अपनी प्रतिक्रिया दी। लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि पश्चिम बंगाल की पूर्ववर्ती सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस समझौते की राह में एक प्रमुख अवरोध रही हैं। जब रहमान से पूछा गया कि क्या अब इस अवरोध के हटने के बाद समझौते की उम्मीद है, तो उन्होंने सधे हुए लहजे में कहा कि वह किसी के मन की बात नहीं पढ़ सकते, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि 2011 में जिस सहमति पर दोनों देशों के मंत्रियों ने मुहर लगाई थी, उस पर वर्तमान संदर्भ में फिर से विचार किया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि सितम्बर 2011 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की ढाका यात्रा के दौरान तीस्ता जल समझौते पर हस्ताक्षर होने वाले थे। दोनों देशों के जल संसाधन मंत्रियों के बीच मसौदा तैयार हो चुका था, लेकिन ऐन वक्त पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कड़े विरोध के कारण केंद्र सरकार को कदम पीछे खींचने पड़े थे। इसके बाद से ही यह मुद्दा ठंडे बस्ते में पड़ा रहा। अब, जब केंद्र और राज्य दोनों ही जगहों पर भाजपा की कमान होने की संभावना प्रबल है, बांग्लादेश को उम्मीद है कि कूटनीतिक निर्णय लेने में दिल्ली को अब क्षेत्रीय बाधाओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।
हालांकि, विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने यह भी स्पष्ट किया कि बांग्लादेश सिर्फ भारत के फैसले के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठेगा। उन्होंने तीस्ता के पानी को उस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लिए "जीवन और मरण का सवाल" बताया। रहमान की बीजिंग यात्रा रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि बांग्लादेश ने तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और बहाली परियोजना (Teesta River Comprehensive Management and Restoration Project) के लिए चीन से सहायता मांगी है। उन्होंने संकेत दिया कि बीजिंग में तीस्ता प्रोजेक्ट पर विस्तृत चर्चा होगी, जिसके लिए चीन लंबे समय से अपनी रुचि दिखा रहा है।
कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांग्लादेश की सत्ताधारी बीएनपी (BNP) और अन्य राजनीतिक दल ढाका-दिल्ली संबंधों में एक नए सकारात्मक अध्याय की उम्मीद कर रहे हैं। बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद ने पश्चिम बंगाल के चुनाव को भारत का घरेलू मामला बताया, लेकिन साथ ही संबंधों में सुधार की गुंजाइश भी व्यक्त की। यदि तीस्ता समझौता परवान चढ़ता है, तो यह दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। अन्यथा, तीस्ता प्रोजेक्ट के लिए बांग्लादेश का चीन की ओर बढ़ता झुकाव भविष्य में भारत के लिए नई कूटनीतिक चुनौतियां भी पेश कर सकता है।

Lalita Rajput
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