चंडीगढ़ भाजपा कार्यालय के बाहर ग्रेनेड हमला: पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर रंधावा ने सुरक्षा चूक पर सरकार को घेरा

चंडीगढ़:

पंजाब की राजनीति में सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। हाल ही में चंडीगढ़ स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश कार्यालय के बाहर हुए ग्रेनेड हमले ने सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री और वर्तमान कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने राज्य की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और केंद्र की भाजपा सरकार, दोनों पर तीखा हमला बोला है।

सुरक्षा व्यवस्था पर रंधावा का बड़ा बयान

गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए सुखजिंदर सिंह रंधावा ने इस घटना को बेहद चिंताजनक बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी के पिछले लगभग 4 साल के शासनकाल में पंजाब की आंतरिक सुरक्षा की स्थिति काफी खराब हुई है। रंधावा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि AAP के कार्यकाल के दौरान अब तक विभिन्न पुलिस स्टेशनों पर लगभग 10 हमले हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि जब रक्षक (पुलिस स्टेशन) ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

AAP और BJP दोनों को ठहराया जिम्मेदार

रंधावा ने केवल राज्य सरकार को ही नहीं, बल्कि केंद्र की भाजपा सरकार को भी इस विफलता में साझीदार बताया। उन्होंने तर्क दिया कि चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश है और यहाँ की सुरक्षा सीधे तौर पर केंद्र के अधीन आती है, जबकि पंजाब के साथ सीमा साझा होने के कारण राज्य पुलिस की भी बड़ी जिम्मेदारी बनती है। रंधावा ने आरोप लगाया कि दोनों पार्टियां एक-दूसरे पर दोषारोपण करने में व्यस्त हैं, जबकि जमीन पर सुरक्षा तंत्र पूरी तरह से विफल साबित हो रहा है।

घटना का विवरण: भाजपा कार्यालय के बाहर दहशत

चंडीगढ़ के सेक्टर 37 स्थित भाजपा कार्यालय के बाहर हुए इस संदिग्ध ग्रेनेड हमले ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया है। गनीमत यह रही कि इस विस्फोट में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ, लेकिन भाजपा कार्यालय जैसी संवेदनशील जगह के पास इस तरह की घटना होना सुरक्षा में एक बड़ी सेंध मानी जा रही है। पुलिस और फॉरेंसिक टीमें मौके से साक्ष्य जुटा रही हैं और इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

'10 हमलों' का जिक्र कर याद दिलाई पुरानी घटनाएं

रंधावा ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि पंजाब ने एक लंबा काला दौर देखा है और बड़ी मुश्किल से शांति बहाल हुई थी। उन्होंने पिछली कुछ घटनाओं जैसे मोहाली में इंटेलिजेंस हेडक्वार्टर पर हमला और तरनतारन के सरहाली थाने पर हुए आरपीजी (RPG) हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे सीधे पुलिस की इमारतों को निशाना बना रहे हैं। उनके अनुसार, पंजाब और चंडीगढ़ की सीमाओं पर निगरानी की कमी और खुफिया तंत्र की कमजोरी के कारण ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और जनता की चिंता

इस हमले के बाद पंजाब और चंडीगढ़ के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। कांग्रेस सांसद रंधावा ने मांग की है कि सरकार को केवल बयानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सीमा पार से आ रहे हथियारों और नशीले पदार्थों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जाए। उन्होंने कहा कि "पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है, यहाँ की शांति के साथ खिलवाड़ देश की सुरक्षा के लिए खतरा है।"

क्या कदम उठाए जा रहे हैं?

फिलहाल चंडीगढ़ पुलिस और पंजाब पुलिस के विशेष सेल इस मामले की जांच कर रहे हैं। चंडीगढ़ में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और सार्वजनिक स्थानों पर चेकिंग तेज कर दी गई है। हालांकि, विपक्ष का मानना है कि जब तक राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ सुरक्षा ढांचे को मजबूत नहीं किया जाता, तब तक अपराधियों में डर पैदा करना मुश्किल होगा।


सुखजिंदर सिंह रंधावा का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि पंजाब में आगामी चुनावों और वर्तमान राजनीतिक माहौल में 'सुरक्षा' एक बड़ा मुद्दा रहने वाला है। भाजपा कार्यालय पर हुआ यह हमला प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि वे अपनी सुरक्षा रणनीतियों पर पुनर्विचार करें और आंतरिक शांति बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाएं।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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