असम के मंत्री अशोक सिंघल द्वारा हाल ही में शेयर किया गया "Bihar approves Gobi farming" वाला पोस्ट राजनीतिक और सामाजिक विवाद का केंद्र बन गया है। उन्होंने ट्विटर (अब X) पर गोभी के खेत की तस्वीर शेयर करते हुए यह संदेश लिखा, जिसे विपक्ष और समाज में व्यापक प्रतिक्रिया मिली है। इस विवाद में मुख्य आरोप यह है कि इस बयान के माध्यम से वह 1989 के भागलपुर दंगों की याद ताजा करने की कोशिश कर रहे हैं, जहां कई मुस्लिमों की हत्या के बाद उन शवों को खेतों में दफनाया गया था और बाद में वहां गोभी की पौधें रोप दी गई थीं।


असम मंत्री के इस पोस्ट ने कांग्रेस सांसद शशि थरूर जैसे नेताओं की तीव्र प्रतिक्रिया को जन्म दिया है। थरूर ने इसे "नागरिक राजनीतिक संवाद के लिए नई नीचाई" बताते हुए कहा है कि धर्म या राष्ट्रवाद किसी नरसंहार को जायज़ नहीं ठहराते और न ही उसे सेलिब्रेट करने का स्थान दे सकते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने मंत्री के बयान की सार्वजनिक निंदा की है।

इतिहास की जटिल पृष्ठभूमि में, यह 'गोभी फार्मिंग' का संदर्भ 1989 के भागलपुर दंगों से जुड़ा हुआ माना जाता है। उस समय कथित रूप से बलपूर्वक दफनाए गए मृतकों की कब्रों पर गोभी की खेती की गई थी ताकि दावे छिपे रहें, और यह प्रतीक आज भी कुछ सामाजिक और राजनीतिक समूहों द्वारा सांकेतिक तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। विपक्ष ने इस बयान को सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ावा देने और ऐतिहासिक दर्द को राजनीतिक हथियार बनाने का आरोप लगाया है। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस दोनों ने कहा है कि इस प्रकार की भाषा और प्रतीकवाद संवेदनशील राष्ट्रीय धड़कनों का अनादर है।


इस घटना ने समाज में यह सवाल उठाया है कि राजनीतिक बयानों में ऐतिहासिक घटनाओं और जनसंहारों की याद को कितनी संवेदनशीलता से रखा जाना चाहिए। गोभी का यह प्रतीक आज सिर्फ एक सब्ज़ी का प्रतीक नहीं, बल्कि भूतकाल की दर्दनाक स्मृति और वर्तमान राजनीतिक विमर्श का एक विवादास्पद भाग बन गया है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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