केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत-पाकिस्तान और भारत-बांग्लादेश सीमा को अभेद्य बनाने के लिए अगले एक साल में “स्मार्ट बॉर्डर” परियोजना लागू करने का ऐलान किया। AI सर्विलांस, ड्रोन रडार, स्मार्ट कैमरे और हाईटेक सुरक्षा ग्रिड के जरिए अवैध घुसपैठ और तस्करी पर सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

देश की सीमा सुरक्षा को नई तकनीकी ताकत देने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को घोषणा की कि अगले एक वर्ष के भीतर भारत की पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर “स्मार्ट बॉर्डर” परियोजना लागू की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य सीमा को अवैध घुसपैठ, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ पूरी तरह अभेद्य बनाना है।

नई दिल्ली में आयोजित सीमा सुरक्षा बल (BSF) के वार्षिक ‘रुस्तमजी मेमोरियल लेक्चर’ में बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि सरकार तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था तैयार कर रही है, जिससे लगभग 6,000 किलोमीटर लंबे संवेदनशील सीमा क्षेत्र पर कड़ी निगरानी रखी जा सकेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि BSF की स्थापना के 60वें वर्ष में यह परियोजना देश की सीमाओं को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित बनाएगी।



गृह मंत्री ने कहा कि सरकार पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा पर अगले एक साल के भीतर “मजबूत सुरक्षा ग्रिड” तैयार करेगी। इसके तहत ड्रोन रडार, स्मार्ट कैमरे, आधुनिक सेंसर, थर्मल इमेजिंग तकनीक और एकीकृत निगरानी प्रणाली तैनात की जाएगी। AI आधारित सर्विलांस सिस्टम और रडार तकनीक की मदद से सीमा पार होने वाली हर संदिग्ध गतिविधि पर रियल टाइम निगरानी रखी जाएगी। शाह ने कहा कि यह पूरा नेटवर्क सीमा सुरक्षा बल को तेजी से प्रतिक्रिया देने और घुसपैठ की कोशिशों को तुरंत विफल करने में सक्षम बनाएगा।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में पाकिस्तान सीमा पर 93 प्रतिशत से अधिक और बांग्लादेश सीमा पर लगभग 80 प्रतिशत फेंसिंग का कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके बावजूद कई क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए हथियारों और मादक पदार्थों की तस्करी लगातार चुनौती बनी हुई है। विशेष रूप से राजस्थान-पाकिस्तान सीमा पर हाल के महीनों में ड्रोन स्मगलिंग के मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है।

अमित शाह ने अपने संबोधन में अवैध घुसपैठ को देश की जनसांख्यिकी से जोड़ते हुए कहा कि सरकार “भारत की डेमोग्राफी को कृत्रिम रूप से बदलने की साजिश” को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश में मौजूद हर अवैध घुसपैठिए की पहचान कर उसे भारत से बाहर भेजा जाएगा। इस मुद्दे पर केंद्र सरकार जल्द ही त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक भी करेगी, ताकि सीमा सुरक्षा, खुफिया समन्वय और तस्करी रोकने के उपायों को और मजबूत किया जा सके।

अपने भाषण में शाह ने BSF की भूमिका की भी सराहना की और कहा कि 1965 में स्थापित यह बल आज 2.7 लाख से अधिक जवानों वाली विशाल सुरक्षा शक्ति बन चुका है। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा में BSF ने कई दशकों से निर्णायक भूमिका निभाई है और आने वाले समय में आधुनिक तकनीक के साथ इसकी क्षमता और अधिक बढ़ेगी।

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब देश के कई सीमावर्ती राज्यों में अवैध घुसपैठ और सीमा पार तस्करी को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के राज्यों में यह मुद्दा लंबे समय से राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संतुलन से जुड़ा बड़ा राजनीतिक विषय बना हुआ है। ऐसे में केंद्र सरकार का “स्मार्ट बॉर्डर” मिशन न केवल सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है, बल्कि इसे आने वाले वर्षों में भारत की सीमा सुरक्षा नीति का सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी अभियान भी माना जा रहा है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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