इतिहास में पहली बार बैठक में सभी मुख्यमंत्रियों की रही शत-प्रतिशत उपस्थिति, कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार ने पीएम मोदी से की मुलाकात।

नई दिल्ली: देश की विकास नीति को आकार देने वाले सबसे बड़े मंच, नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में इस बार भारतीय लोकतंत्र की एक बेहद सुखद और ऐतिहासिक तस्वीर सामने आई है। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में देश के इतिहास में पहली बार सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने एक साथ हिस्सा लेकर अपनी पूरी उपस्थिति दर्ज कराई। पिछले कई वर्षों के दौरान वैचारिक मतभेदों, राजनीतिक मोर्चेबंदी और विपक्षी दलों द्वारा लगातार किए जाने वाले बहिष्कारों के कारण यह मंच अक्सर विवादों और राजनीतिक खींचतान का केंद्र बना रहता था। मगर इस बार का माहौल पूरी तरह से बदला हुआ और सहयोगात्मक नजर आया। इस महत्वपूर्ण बैठक की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि किसी भी राज्य के मुख्यमंत्री ने राजनीतिक मुद्दों या मतभेदों को तरजीह नहीं दी। इसके उलट, सभी नेताओं का पूरा ध्यान अपने-अपने राज्यों के विकास, आर्थिक प्रगति और ढांचागत प्राथमिकताओं को केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से रखने पर केंद्रित रहा।

इस बैठक में विशेष रूप से विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों की सक्रिय और सकारात्मक भागीदारी राजनीतिक विश्लेषकों के बीच गहरी चर्चा का विषय बनी रही। कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों द्वारा संचालित केरल, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना के साथ-साथ आम आदमी पार्टी के शासन वाले पंजाब के मुख्यमंत्रियों ने भी इस बैठक की कार्यवाही में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। पिछले कुछ समय में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक जैसे गैर-भाजपा शासित राज्यों और केंद्र सरकार के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव की परछाई नीति आयोग की बैठकों पर साफ दिखाई देती थी। आंकड़े गवाह हैं कि जहां साल 2024 की बैठक से करीब 10 मुख्यमंत्री नदारद रहे थे, वहीं 2023 की बैठक में भी नौ मुख्यमंत्रियों ने दूरी बनाई थी। इस पृष्ठभूमि के विपरीत, इस बार सभी राज्यों की शत-प्रतिशत मौजूदगी को केंद्र और राज्यों के बीच संवादहीनता खत्म होने और एक सकारात्मक सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की दिशा में बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। देश के केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी खुले मन से इस सहयोगात्मक और सौहार्दपूर्ण माहौल की सराहना की।

इस पूरी बैठक के दौरान दक्षिण भारतीय राज्यों के दो बड़े नेताओं की मौजूदगी ने राजधानी के गलियारों में विशेष ध्यान आकर्षित किया। इनमें से एक तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री थलपति विजय रहे, जिन्होंने बेहद सक्रियता के साथ इस राष्ट्रीय नीति निर्धारण बैठक में हिस्सा लिया। वहीं दूसरी ओर, कर्नाटक के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की उपस्थिति को राज्य की नीति में एक बड़े और युगांतकारी बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। गौरतलब है कि राज्य की पिछली कांग्रेस सरकार अक्सर केंद्रीय नीतियों के विरोध में ऐसी महत्वपूर्ण बैठकों से रणनीतिक दूरी बनाए रखती थी, परंतु वर्तमान नेतृत्व ने इस रूढ़ि को तोड़ते हुए केंद्र के साथ मिलकर काम करने की नई शुरुआत की है।

इस महत्वपूर्ण बैठक के इतर एक बेहद खास कूटनीतिक घटनाक्रम में कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की। तीन जून को कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की कमान संभालने के बाद प्रधानमंत्री के साथ शिवकुमार की यह पहली आधिकारिक शिष्टाचार भेंट थी। दोनों नेताओं के बीच बेहद गर्मजोशी भरे माहौल में राज्य की रणनीतिक विकास प्राथमिकताओं पर विस्तृत चर्चा हुई। इस मुलाकात के तुरंत बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर दोनों नेताओं की एक तस्वीर साझा करते हुए इस सार्थक मुलाकात की आधिकारिक पुष्टि की।

प्रधानमंत्री से मुलाकात के उपरांत कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से देश और अपने राज्य की जनता के साथ बातचीत का ब्योरा साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी यह चर्चा कर्नाटक के बुनियादी ढांचे (Infrastructure), औद्योगिक निवेश, शहरी परिवहन प्रणालियों के आधुनिकीकरण, सिंचाई परियोजनाओं, तकनीकी नवाचारों और आम जनता के जीवन स्तर को सीधे प्रभावित करने वाली लोक कल्याणकारी योजनाओं पर केंद्रित रही। मुख्यमंत्री शिवकुमार ने साफ शब्दों में कहा कि कर्नाटक हमेशा से ही भारत की विकास गाथा और जीडीपी वृद्धि में एक बेहद महत्वपूर्ण और अग्रणी भागीदार रहा है। उन्होंने राज्य सरकार की इस वैश्विक भूमिका को भविष्य में और अधिक मजबूत करने के लिए अपनी पूरी प्रतिबद्धता दोहराई।

बैठक के समापन पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का एक आधिकारिक बयान देश के संघीय ढांचे के भविष्य के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे राज्य में विकास की गति को तेज करने, वैश्विक स्तर के बेहतर निवेश अवसरों को आकर्षित करने और कर्नाटक की जनता की आकांक्षाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए पूरी तरह तत्पर हैं। इसके लिए वे भारतीय संविधान में वर्णित सहकारी संघवाद की सच्ची भावना के साथ केंद्र सरकार के साथ मिलकर कंधे से कंधा मिलाकर काम करने की उम्मीद रखते हैं। उन्होंने दृढ़ता के साथ निष्कर्ष निकाला कि केंद्र और राज्य के साझा प्रयासों से ही हम मिलकर एक मजबूत कर्नाटक का निर्माण कर सकते हैं, जो अंततः एक विकसित और मजबूत भारत के निर्माण में अपना सबसे सार्थक योगदान देगा। नीति आयोग का यह सफल सत्र देश के सर्वांगीण विकास के लिए एक नई उम्मीद जगाता है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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