केरल चुनाव से पहले कांग्रेस में 'महायुद्ध'; Shashi Tharoor के तेवरों ने बढ़ाई हाईकमान की धड़कनें
केरल विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में भारी दरार! कोच्चि महापंचायत में हुए अपमान से नाराज सांसद शशि थरूर ने हाईकमान की अहम बैठक से बनाई दूरी। राहुल गांधी द्वारा नाम न लेने और प्रोटोकॉल के उल्लंघन ने बढ़ाया विवाद। क्या चुनाव से पहले केरल कांग्रेस में मचेगा बड़ा विद्रोह? पढ़िए पूरी इनसाइड स्टोरी।

Kerala election 2026 Congress internal rift : केरल विधानसभा चुनावों की दहलीज पर खड़ी कांग्रेस के लिए अंदरूनी कलह एक बार फिर गले की फांस बनती नजर आ रही है। पार्टी हाईकमान द्वारा आगामी चुनावी रणनीति को लेकर बुलाई गई अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक से दिग्गज नेता और सांसद शशि थरूर की अनुपस्थिति ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। यह केवल एक बैठक से दूरी नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर गहराते उस असंतोष का प्रतिबिंब है जो कोच्चि में आयोजित हालिया 'महापंचायत' के बाद ज्वालामुखी बनकर उभरा है। सूत्रों का दावा है कि थरूर इस आयोजन के दौरान हुए घटनाक्रमों को अपना व्यक्तिगत और राजनीतिक अपमान मान रहे हैं, जिसके चलते उन्होंने फिलहाल नेतृत्व से दूरी बना ली है।
इस विवाद की जड़ें कोच्चि महापंचायत के प्रोटोकॉल और व्यवस्थाओं में छिपी हैं। बताया जा रहा है कि थरूर को कार्यक्रम स्थल पर निर्धारित समय से काफी पहले पहुंचने और अपने संबोधन को जल्द से जल्द समेटने के निर्देश दिए गए थे, जिसे उन्होंने एक वरिष्ठ नेता के तौर पर अपनी गरिमा के प्रतिकूल पाया। नाराजगी की आग तब और भड़क गई जब भाषणों के क्रम में बदलाव किया गया। थरूर को यह आश्वासन दिया गया था कि उनके संबोधन के तुरंत बाद राहुल गांधी मंच संभालेंगे, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत रही। राहुल गांधी के बाद आधा दर्जन अन्य नेताओं ने भाषण दिया, जिनमें से कई नेता पदानुक्रम में थरूर से काफी कनिष्ठ हैं। इसे पार्टी के भीतर उन्हें हाशिए पर धकेलने की एक सोची-समझी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
असंतोष का एक बड़ा कारण राहुल गांधी के संबोधन की शैली भी रही। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने अपने पूरे भाषण के दौरान शशि थरूर का नाम तक नहीं लिया, जिसने जलती आग में घी का काम किया है। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब थरूर और केरल कांग्रेस की प्रादेशिक इकाई के बीच तलवारें खिंची हों। इससे पूर्व वायनाड में हुई बैठक के दौरान यह दावा किया गया था कि सभी मतभेद सुलझा लिए गए हैं और पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम ने उन दावों की हवा निकाल दी है। फिलहाल थरूर ने खुद को राजनीतिक बैठकों से दूर कर कोझिकोड में आयोजित 'केरल लिटरेचर फेस्टिवल' की ओर रुख कर लिया है, जो उनके भविष्य के रुख की ओर इशारा करता है।
कांग्रेस नेतृत्व की इस पूरे प्रकरण पर फिलहाल चुप्पी बनी हुई है, लेकिन चुनाव से ठीक पहले एक वैश्विक पहचान रखने वाले चेहरे की यह नाराजगी पार्टी के लिए महंगी साबित हो सकती है। सत्ता वापसी का सपना देख रही कांग्रेस के लिए थरूर जैसे प्रभावशाली नेता की दूरी न केवल सांगठनिक रूप से बल्कि सार्वजनिक छवि के लिहाज से भी एक बड़ी चुनौती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि हाईकमान डैमेज कंट्रोल के लिए थरूर को मनाने की कोशिश करता है या केरल की राजनीति में यह दरार किसी बड़े राजनीतिक पुनर्गठन की भूमिका तैयार करेगी।a

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
