मुंबई के सबसे चर्चित जमीन विवाद पर कार्रवाई ; गोरेगाव के आरे कॉलोनी के अवैध दरगाह चला बुलडोजर
मुंबई के गोरेगांव स्थित आरे कॉलोनी में कथित अवैध हजरत सैयद पीर बाबा दरगाह पर प्रशासन ने भारी पुलिस सुरक्षा के बीच बुलडोजर कार्रवाई की। सरकारी और राष्ट्रीय उद्यान की भूमि पर अतिक्रमण के आरोपों, नोटिसों और वर्षों पुराने विवाद के बाद यह कार्रवाई की गई, जिससे मामला फिर चर्चा में आ गया है।

हजरत सैयद पीर बाबा दरगाह के प्रवेश द्वार
मुंबई के गोरेगांव स्थित आरे कॉलोनी में मंगलवार को उस समय हलचल मच गई जब प्रशासन ने एक कथित अवैध धार्मिक ढांचे के खिलाफ बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू किया। भारी पुलिस बंदोबस्त और सुरक्षा व्यवस्था के बीच अधिकारियों ने हजरत सैयद पीर बाबा दरगाह नाम से पहचाने जाने वाले ढांचे को हटाने की कार्रवाई शुरू की। प्रशासन का दावा है कि यह संरचना सरकारी भूमि पर अवैध रूप से निर्मित की गई थी और इसके ट्रस्टियों द्वारा इसकी वैधता साबित करने के लिए कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
सुबह से ही आरे कॉलोनी के संबंधित क्षेत्र में पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य विभागों की टीमें तैनात रहीं। बुलडोजर और अन्य मशीनरी की मदद से ढांचे को हटाने का कार्य शुरू किया गया। कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया और आम लोगों की आवाजाही पर भी निगरानी रखी गई।
मामले को लेकर पुलिस और प्रशासन का कहना है कि संबंधित संरचना को पहले ही सरकारी भूमि पर अतिक्रमण घोषित किया जा चुका था। पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) गजानन राजमाने के अनुसार, स्थानीय निवासी योगेश वानखेड़े और तीन अन्य लोगों द्वारा एक ट्रस्ट का गठन किया गया था, जिसे बार-बार नोटिस जारी कर यह साबित करने का अवसर दिया गया कि संबंधित संरचना कानूनी रूप से स्थापित है। अधिकारियों का कहना है कि ट्रस्टियों को पर्याप्त समय दिया गया, लेकिन वे न तो ढांचे को स्वयं हटाने के लिए आगे आए और न ही इसकी वैधता साबित करने वाले दस्तावेज उपलब्ध करा सके। इसी के बाद प्रशासन ने विधिवत कार्रवाई करते हुए ध्वस्तीकरण अभियान शुरू किया।
#WATCH | Maharashtra: A demolition drive is underway at Aarey Colony of Goregaon in Mumbai, against an unauthorised dargah. Visuals from the spot. pic.twitter.com/lByHPFWbKw
— ANI (@ANI) June 2, 2026
डीसीपी राजमाने ने बताया कि यह कार्रवाई कई विभागों के समन्वय से की जा रही है और अभियान लगभग अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि इसी अभियान के तहत क्षेत्र में मौजूद एक अन्य धार्मिक ढांचे को एक दिन पहले हटाया जा चुका है। यह विवाद नया नहीं है। हजरत सैयद पीर बाबा दरगाह को लेकर पिछले कई वर्षों से कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर विवाद चलता रहा है। अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2017 और 2018 में भी इस संरचना को ध्वस्त किया गया था, लेकिन बाद में इसे दोबारा बनाया गया और समय के साथ इसका विस्तार भी किया गया। इसी वजह से यह मामला एक बार फिर प्रशासन और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।
विवाद ने इस वर्ष नया मोड़ तब लिया जब भाजपा नेता किरीट सोमैया ने इस मुद्दे को उठाते हुए संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर सरकारी और वन भूमि पर कथित अतिक्रमण का आरोप लगाया। 9 अप्रैल 2026 को आरे कॉलोनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को लिखे गए पत्र में उन्होंने दावा किया कि संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान की भूमि पर दरगाह के नाम पर अतिक्रमण किया गया है। पत्र में आरोप लगाया गया कि स्थल के आसपास अवैध बाड़बंदी और सीमा दीवारें खड़ी की गईं, अस्थायी शेड और अन्य संरचनाओं का निर्माण किया गया तथा धार्मिक संस्थान की आड़ में सरकारी भूमि पर कब्जा किया गया।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित भूखंड को वर्ष 2022 में आरे कॉलोनी से संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान को हस्तांतरित किया गया था। साथ ही यह आरोप भी लगाया गया कि आरे प्रशासन, राष्ट्रीय उद्यान, राजस्व विभाग, पुलिस और नागरिक प्रशासन के अधिकारियों को कथित अतिक्रमण की जानकारी होने के बावजूद भूमि पर अवैध कब्जा बढ़ता रहा।
अधिकारियों के अनुसार विवादित संरचना आरे पुलिस स्टेशन से लगभग 400 मीटर की दूरी पर स्थित थी। वर्षों से यह स्थान प्रशासनिक जांच और कानूनी विवादों के केंद्र में बना हुआ था। हालांकि दरगाह से जुड़े ट्रस्टियों और समर्थकों ने प्रशासन के कुछ दावों पर आपत्ति जताई है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध रिकॉर्ड और जांच के आधार पर यह कार्रवाई पूरी तरह कानून के दायरे में की जा रही है।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। पूरे क्षेत्र में भारी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई, बैरिकेड्स लगाए गए और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष निगरानी रखी गई। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए अधिकारियों ने पूरे अभियान को कड़ी सुरक्षा के बीच अंजाम दिया।घटनास्थल से सामने आए दृश्यों में बुलडोजर और अन्य मशीनरी को कार्रवाई करते हुए देखा गया। पुलिस बल लगातार क्षेत्र में तैनात रहा और संरचना के विभिन्न हिस्सों को क्रमबद्ध तरीके से हटाया गया। सुरक्षा कारणों से आम लोगों की पहुंच को भी सीमित रखा गया।
आरे कॉलोनी मुंबई के सबसे महत्वपूर्ण हरित क्षेत्रों में से एक मानी जाती है। इसे शहर के “ग्रीन लंग्स” के रूप में जाना जाता है क्योंकि यह विशाल हरित क्षेत्र संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के निकट स्थित है। इसी कारण यहां विकास परियोजनाओं, पर्यावरण संरक्षण और अतिक्रमण से जुड़े मुद्दे लंबे समय से सार्वजनिक और राजनीतिक बहस का विषय रहे हैं।
फिलहाल प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के व्यापक अभियान का हिस्सा है। वहीं दूसरी ओर यह मामला धार्मिक, कानूनी और राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील बना हुआ है। आरे कॉलोनी में हुई यह कार्रवाई न केवल अवैध निर्माणों पर प्रशासन के रुख को दर्शाती है, बल्कि मुंबई के पर्यावरणीय रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भूमि उपयोग और संरक्षण को लेकर चल रही बहस को भी एक बार फिर केंद्र में ले आई है।

Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
