Ajit Pawar Death Politics : भारतीय राजनीति के इतिहास में कुछ ऐसी घटनाएं होती हैं जो न केवल व्यवस्था को झकझोर देती हैं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की भी परीक्षा लेती हैं। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की बारामती विमान हादसे में हुई आकस्मिक मृत्यु ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया है। लेकिन, जहाँ एक ओर पूरा राष्ट्र इस अपूरणीय क्षति पर शोक संतप्त है, वहीं राजनीति के गलियारों में 'संवेदना' के स्थान पर 'साजिश' की थ्योरी बुनी जाने लगी है। महाराष्ट्र की माटी के एक कद्दावर नेता की अंतिम विदाई से पहले ही विपक्ष ने इसे सियासी हथियार बनाकर सत्ता पक्ष को घेरने की कवायद शुरू कर दी है।

विपक्ष का 'साजिश' कार्ड: ममता और खरगे का मोर्चा

हादसे के चंद घंटों के भीतर ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस दुर्घटना को एक 'बड़ी साजिश' करार देते हुए सीधा हमला बोल दिया है। ममता बनर्जी ने यहाँ तक कह दिया कि उन्हें देश की किसी भी सरकारी जांच एजेंसी पर भरोसा नहीं है और उन्होंने तत्काल प्रभाव से सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है।

  • अविश्वास की राजनीति: विपक्षी नेताओं ने पुरानी वीआईपी दुर्घटनाओं का हवाला देकर एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
  • शरद पवार की अपील दरकिनार: सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि अजित पवार के अपने चाचा और राजनीतिक गुरु शरद पवार ने इसे एक 'दुखद हादसा' बताते हुए सभी से इस पर राजनीति न करने की विनती की है।
  • समर्थन का स्वर: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और शिवसेना (यूबीटी) के अनिल देसाई ने भी सरकार को घेरने में ममता बनर्जी का साथ दिया है।

तकनीकी पहलू बनाम राजनीतिक आरोप :

नागरिक उड्डयन मंत्री के. राम मोहन नायडू ने प्रारंभिक जानकारी साझा करते हुए स्पष्ट किया है कि हादसे के समय बारामती में दृश्यता (Visibility) बेहद कम थी।

  • लैंडिंग का प्रयास: पायलट ने पहली कोशिश में लैंडिंग विफल होने के बाद दूसरी बार प्रयास किया, जिस दौरान विमान क्रैश हो गया।
  • DGCA की जांच: फिलहाल विमानन विशेषज्ञों और डीजीसीए की टीमें मलबे से साक्ष्य जुटा रही हैं।
  • सरकारी पक्ष: बीजेपी नेतृत्व ने विपक्षी रुख को 'मानसिक दिवालियापन' करार देते हुए कहा है कि जब घर का मुखिया (शरद पवार) संयम बरतने की बात कर रहा है, तब बाहरी नेताओं का शोर मचाना केवल राजनीतिक रोटियां सेंकने का प्रयास है।

संवैधानिक संस्थाओं पर बढ़ता अविश्वास :

यह घटनाक्रम एक गहरे और खतरनाक संकेत की ओर इशारा करता है—देश की संवैधानिक और जांच संस्थाओं पर विपक्ष का बढ़ता अविश्वास। ममता बनर्जी का यह बयान कि 'सिर्फ सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है', पुलिस, इंटेलिजेंस ब्यूरो और उड्डयन जांच संस्थाओं के मनोबल को गिराने वाला माना जा रहा है। विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि हर तकनीकी दुर्घटना को 'हत्या' का नाम दिया जाएगा, तो इससे न केवल अराजकता फैलेगी बल्कि जांच की प्रक्रिया भी बाधित होगी।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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