Mumbai BMC election 2026 : देश की सबसे अमीर महानगर पालिका, बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) समेत महाराष्ट्र के 29 नगर निकायों में 15 जनवरी 2026 को होने वाले मतदान से ठीक पहले सियासी पारा अपने चरम पर है। लेकिन, सत्ता के इस महासंग्राम में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लिए मुश्किलें बाहरी विरोधियों से ज्यादा 'अपनों' के बयानों ने खड़ी कर दी हैं। मतदान से मात्र 48 घंटे पहले उपजे इस विवाद ने चुनावी समीकरणों को एक नया और संवेदनशील मोड़ दे दिया है, जिससे 'मराठी अस्मिता' का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है।

विवाद की शुरुआत बीजेपी की तमिलनाडु इकाई के अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी अनामलाई के एक बयान से हुई। मुंबई में प्रचार के दौरान उन्होंने कहा कि "मुंबई सिर्फ महाराष्ट्र का नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय शहर है।" उन्होंने तुलनात्मक रूप से मुंबई के 75,000 करोड़ रुपये के विशाल बजट का हवाला देते हुए इसकी तुलना चेन्नई और बेंगलुरु से की। हालांकि उनका उद्देश्य मुंबई की आर्थिक शक्ति को रेखांकित करना था, लेकिन "मुंबई महाराष्ट्र का नहीं है" वाले हिस्से ने विपक्षी दलों के हाथ में एक ज्वलंत मुद्दा थमा दिया है।

अभी यह मामला शांत भी नहीं हुआ था कि उत्तर प्रदेश के जौनपुर से बीजेपी के पूर्व सांसद कृपाशंकर सिंह की टिप्पणी ने आग में घी डालने का काम किया। मीरा भाईंदर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने खुले तौर पर यह इच्छा जता दी कि इस बार क्षेत्र का मेयर 'उत्तर भारतीय' होना चाहिए। उन्होंने हिंदी भाषी पार्षदों की जीत पर जोर दिया ताकि महानगर पालिका की कमान किसी उत्तर भारतीय के हाथ में आए।

इन बयानों ने शिवसेना (UBT) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) को बीजेपी के खिलाफ आक्रामक होने का मौका दे दिया है। विपक्ष ने इसे बीजेपी की 'मराठी विरोधी' मंशा करार दिया है।

  • मनसे का प्रहार: मनसे नेता अविनाश जाधव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बीजेपी की नीति अब स्पष्ट हो गई है; वे केवल सत्ता के लिए मराठी लोगों का वोट चाहते हैं, जबकि उनकी मंशा मुंबई और आसपास के इलाकों से मराठी प्रभाव को कम करने की है।

  • राज ठाकरे की प्रतिक्रिया: मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने अनामलाई के बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे महाराष्ट्र के अपमान से जोड़ दिया है।

इस बढ़ते विवाद को भांपते हुए उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मोर्चा संभाला है। उन्होंने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि बीजेपी ने कभी भी मराठी अस्मिता से समझौता नहीं किया है और न ही भविष्य में करेगी। फडणवीस ने अपने संबोधनों में जोर देकर कहा कि बीजेपी ही 'मराठी मानुष' और महाराष्ट्र की माटी की वास्तविक आवाज है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जहां ये बयान उत्तर भारतीय और गैर-मराठी मतदाताओं को एकजुट कर सकते हैं, वहीं ये पार्टी के पारंपरिक मराठी वोट बैंक को छिटका भी सकते हैं। अब 15 जनवरी को होने वाले मतदान में यह देखना दिलचस्प होगा कि मुंबई की जनता इन 'जुबानी जंगों' को किस तरह लेती है और क्या बीजेपी इस डैमेज को समय रहते कंट्रोल कर पाएगी।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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