खण्डीप बना किसानों के जल अधिकार संघर्ष का केंद्र, 19वें दिन महापंचायत में उमड़ा जनसैलाब; सांसद-विधायकों ने दिया खुला समर्थन
खण्डीप में पांचना बांध का पानी नहरों में छोड़ने की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन 19वें दिन और तेज हो गया। हजारों किसानों के बीच सांसद-विधायकों की मौजूदगी और आगामी आह्वानों ने आंदोलन को निर्णायक मोड़ पर ला खड़ा किया।

खण्डीप में पांचना बांध से नहरों में पानी छोड़ने की मांग को लेकर आयोजित महापंचायत में विधायक रामकेश मीना, सांसद हरिश्चन्द्र मीना और अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
खण्डीप। पांचना बांध से कमाण्ड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर ग्राम खण्डीप में जारी किसान महापंचायत और धरना-प्रदर्शन ने अब व्यापक जनसमर्थन और राजनीतिक उपस्थिति के साथ एक नए चरण में प्रवेश कर लिया है। आंदोलन के 19वें दिन धरना स्थल किसानों, पंच-पटेलों, महिलाओं, युवाओं और ग्रामीणों की भारी भागीदारी से एक बड़े जनसमूह में तब्दील दिखाई दिया, जहां जल अधिकार की मांग को लेकर आवाज और अधिक मुखर हुई।
मंगलवार को आयोजित किसान महापंचायत में नादौती और टोडाभीम तहसील क्षेत्र के शेखपुरा, अखाड़ा, किरवाड़ा, सहजनपुर, भोपर, भादरपुर, सोप, कैमा, ल्हावद, तूमापुरा, मिलकसराय और महानन्दपुर ड्योढ़ा सहित अनेक गांवों से बड़ी संख्या में पंच-पटेल, किसान, महिलाएं और युवा धरना स्थल पहुंचे। पांचना कमाण्ड क्षेत्र विकास संघर्ष समिति एवं विधायक रामकेश मीना ने सभी आगंतुकों का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया तथा आंदोलन को समर्थन देने के लिए आभार व्यक्त किया।
धरना स्थल पर टोंक-सवाई माधोपुर सांसद हरिश्चन्द्र मीना, टोडाभीम विधायक घनश्याम महर, पूर्व विधायक लाखन सिंह मीना तथा पूर्व मंत्री गोलमा देवी भी पहुंचे और किसानों के आंदोलन को समर्थन दिया। जनप्रतिनिधियों ने अपने संबोधनों में किसानों की मांगों को न्यायोचित बताते हुए संघर्ष के प्रति एकजुटता व्यक्त की।
पूर्व विधायक लाखन सिंह मीना ने कहा कि जब तक कमाण्ड क्षेत्र की नहरों में पांचना बांध का पानी नहीं छोड़ा जाता, तब तक किसानों के हितों और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
पांचना कमाण्ड क्षेत्र विकास संघर्ष समिति एवं विधायक रामकेश मीना ने घोषणा की कि 24 जून 2026 को सभी सामाजिक एवं राजनीतिक जनप्रतिनिधियों को, दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर, खण्डीप धरना स्थल पर पहुंचने का आह्वान किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि किसानों के अधिकार और न्याय की लड़ाई का मंच है।
समिति के अनुसार 24 जून को किसान महापंचायत के समर्थन में झारेड़ा, सिंघनिया, श्यामपुर, मूंडरी, लालारामपुरा, गढ़ी पनमेड़ा, फाजीलाबाद, कंवरपुरा और मौसलपुर सहित अनेक गांवों से सैकड़ों वाहनों के साथ किसान, युवा, महिलाएं और ग्रामीण खण्डीप पहुंचेंगे।
टोडाभीम विधायक घनश्याम महर ने अपने संबोधन में कहा कि संघर्ष समिति द्वारा सभी वर्तमान एवं पूर्व जनप्रतिनिधियों से धरना स्थल पर उपस्थिति की अपेक्षा की गई है तथा आंदोलन को व्यापक सामाजिक समर्थन की आवश्यकता है। उन्होंने राज्य सरकार पर किसानों की समस्याओं और कमाण्ड क्षेत्र के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप भी लगाया।
विधायक रामकेश मीना ने कहा कि आंदोलन को प्रदेश स्तर पर व्यापक चर्चा मिल रही है और संघर्ष समिति की ओर से 27 जून तक का अल्टीमेटम दिया गया है। उन्होंने सरकार से नहरों में पानी छोड़ने का आदेश जारी करने तथा न्यायालय के आदेशों और किसानों की मांगों पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में लोग लगातार मौजूद हैं और सरकार को स्थिति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
सांसद हरिश्चन्द्र मीना ने अपने संबोधन में कहा कि किसानों की मांग किसी वर्ग विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि सरकार के समक्ष रखी गई मांग है और न्यायालय के निर्णयों का पालन होना चाहिए। उन्होंने आंदोलन की सफलता को लेकर विश्वास जताते हुए कहा कि सभी जनप्रतिनिधियों को इस मंच पर आकर किसानों के पक्ष में आवाज उठानी चाहिए।
लगातार 19 दिनों से जारी यह आंदोलन अब केवल पानी की मांग तक सीमित नहीं दिखाई दे रहा, बल्कि कमाण्ड क्षेत्र के किसानों के अधिकार, सरकारी निर्णयों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर एक बड़े सार्वजनिक विमर्श का केंद्र बनता जा रहा है। आगामी 24 जून और 27 जून की निर्धारित तिथियों ने इस आंदोलन की दिशा और महत्व को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।

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