रायपुर लूनी बांध पर वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान 2026 का जिला स्तरीय शुभारंभ
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत और धरोहर प्राधिकरण अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत ने पौधारोपण व जल पूजन कर किया अभियान का आगाज।

पाली जिले के रायपुर लूनी बांध (दीपावास) पर आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में जल संरक्षण जन अभियान का शुभारंभ करते मुख्य अतिथि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत, राजस्थान धरोहर प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत व अन्य जनप्रतिनिधि।
“जलमेव जीवनं लोके, जलमेव परं धनम्” के गूढ़ संदेश के साथ रायपुर लूनी बांध (दीपावास) पर “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026” का जिला स्तरीय शुभारंभ उत्साह, जनभागीदारी और सांस्कृतिक वातावरण के बीच भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में हजारों लोगों ने जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और वर्षा जल संग्रहण का सामूहिक संकल्प लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में संचालित यह अभियान प्रदेश में जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि राजस्थान जैसे प्रदेश में जल का महत्व सर्वोपरि है और प्रत्येक नागरिक को जल बचाने की जिम्मेदारी को गंभीरता से समझना होगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पिछले दो वर्षों में बेहतर बरसात के चलते तालाबों, बांधों एवं जल स्रोतों की स्थिति मजबूत हुई है, लेकिन आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। इस दौरान उन्होंने संस्कृत श्लोक “जलमेव जीवनं लोके, जलमेव परं धनम्” का उल्लेख करते हुए जल को जीवन और सर्वोच्च धन बताया।
मंत्री गहलोत ने आमजन से वर्षा जल संग्रहण अपनाने, जल की बर्बादी रोकने, अधिकाधिक पौधारोपण करने तथा पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार गांव-गांव तक जल संरक्षण का जनजागरण अभियान चला रही है, जिसमें जनसहभागिता सबसे महत्वपूर्ण है।
राजस्थान धरोहर प्राधिकरण के अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत ने कहा कि भारतीय संस्कृति में जल को देवतुल्य माना गया है और प्रत्येक धार्मिक एवं मांगलिक कार्य में जल की पूजा-अर्चना की परंपरा रही है। उन्होंने गंगा दशहरा के अवसर पर जल स्रोतों की पूजा कर जल संरक्षण का संदेश देने को भारतीय संस्कृति की महान परंपरा बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि जल स्रोतों के संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में गंभीर जल संकट उत्पन्न हो सकता है, इसलिए तालाबों, बावड़ियों एवं पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष ध्यान आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान जल पूजन, दीप प्रज्वलन, पीपल पूजन, पौधारोपण एवं श्रमदान जैसी गतिविधियाँ आयोजित की गईं। महिलाओं एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा पारंपरिक वेशभूषा में निकाली गई भव्य कलश यात्रा ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया। ग्रामीणों, युवाओं तथा स्काउट-गाइड के सदस्यों ने श्रमदान कर जल संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुँचाया।
इस अवसर पर प्रभारी सचिव हिमांशु गुप्ता (आईएएस), रायपुर प्रधान कमला चौहान, पूर्व प्रधान भानाराम, प्रधान जैतारण मेघाराम सोलंकी, अतिरिक्त जिला कलेक्टर ब्रह्मलाल जाट, अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद गोपाल लाल, उपखंड अधिकारी मनोज कुमार मीणा, थाना अधिकारी रायपुर राजूराम सीरवी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, सरपंच, उपसरपंच, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
अभियान के तहत आगामी दिनों में जिलेभर में तालाबों एवं जल स्रोतों की साफ-सफाई, श्रमदान, पौधारोपण, जल जागरूकता रैलियों तथा विभिन्न जनहित गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा, जिससे जल संरक्षण का संदेश गांव-गांव तक प्रभावी रूप से पहुँच सकेगा। यह आयोजन प्रदेश में जल संरक्षण को जनआंदोलन के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Pratahkal Bureau
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