श्री क्षत्रिय युवक संघ के प्राथमिकता प्रशिक्षण शिविर के तीसरे दिन आयोजित बौद्धिक सत्र में शिविर संचालक प्रेम सिंह रणधा ने भगवान श्रीराम के जीवन चरित्र और उनके आदर्शों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान श्रीराम केवल आस्था के प्रतीक नहीं, बल्कि त्याग, मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा और आदर्श नेतृत्व के सर्वोच्च उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि समाज और राष्ट्र के निर्माण के लिए युवाओं को श्रीराम के जीवन मूल्यों को आत्मसात करना आवश्यक है।

प्रेम सिंह रणधा ने कहा कि संघ के शिविरों में केवल भगवान श्रीराम के गुणों की चर्चा ही नहीं की जाती, बल्कि स्वयंसेवकों को उन गुणों का व्यवहारिक अभ्यास भी कराया जाता है। उन्होंने कहा कि नेतृत्व पद या अधिकार से नहीं, बल्कि त्याग, अनुशासन, सेवा और समाज के प्रति समर्पण भाव से विकसित होता है। भगवान श्रीराम ने विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, संयम और कर्तव्यपालन का परिचय देकर जाज्ज्वल्यमान इतिहास रचा, जो आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है।

उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे महाराणा प्रताप, दुर्गादास राठौड़, चंद्रसेन और कल्ला रायमलोत जैसे वीरों के जीवन प्रसंगों से प्रेरणा लें। उन्होंने कहा कि ईश्वर की कृपा से प्रत्येक व्यक्ति में उत्कृष्टता और सद्गुणों का बीज विद्यमान है। आवश्यकता केवल उसे जागृत कर समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी बनने की है। उन्होंने कहा कि आज श्री क्षत्रिय युवक संघ युवाओं के लिए एक प्रेरणास्रोत के रूप में कार्य कर रहा है।

संभाग प्रमुख मोहब्बत सिंह धिगाणा ने बताया कि शिविर की दिनचर्या प्रतिदिन प्रातः 4:30 बजे प्रारंभ होकर रात्रि 10 बजे तक संचालित होती है। शिविर में प्रार्थना, शारीरिक प्रशिक्षण, खेल, इतिहास, बौद्धिक सत्र, समूह चर्चा, विनोद सभा तथा विविध संस्कारमय गतिविधियों के माध्यम से स्वयंसेवकों के सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण का प्रयास किया जा रहा है।

मण्डल प्रमुख अजीत सिंह रूदिया ने बताया कि रास, जैतारण, सोजत और पाली क्षेत्र से आए लगभग 150 स्वयंसेवक शिविर में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिविर का उद्देश्य युवाओं में अनुशासन, संगठन, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक समरसता, राष्ट्रभक्ति और सेवा भावना का विकास करना है।

प्रांत प्रमुख बहादुर सिंह सारंगवास ने बताया कि श्री क्षत्रिय युवक संघ का यह शिविर पूर्णतः आवासीय है तथा संघ की सामूहिक, संस्कारमय और कर्मप्रधान कार्यपद्धति पर आधारित है। उन्होंने कहा कि ऐसे शिविर युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, गौरवशाली इतिहास और सामाजिक दायित्वों से जोड़ते हुए राष्ट्र के प्रति समर्पित नागरिक बनने की प्रेरणा प्रदान करते हैं। शिविर की व्यवस्थाओं में चेन सिंह बलाडा, गोविंद सिंह रास, प्रेम सिंह रास, जितेंद्र सिंह रायपुर सहित अनेक वरिष्ठ कार्यकर्ता और बड़े-बुजुर्ग सक्रिय रूप से योगदान दे रहे हैं।

भगवान श्रीराम के आदर्शों, अनुशासन, सेवा, राष्ट्रभक्ति और नेतृत्व क्षमता पर आधारित यह प्रशिक्षण शिविर युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण के साथ-साथ सामाजिक और राष्ट्रीय मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रहा है।

Pratahkal Bureau

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