रायपुर: नगर पालिका बनने के बाद भी दमकल सुविधा का अभाव, जनता में आक्रोश
रायपुर में दमकल वाहन न होने से आगजनी की स्थिति में जैतारण और ब्यावर पर निर्भरता बनी हुई है, जिससे जन-धन की हानि का खतरा बढ़ गया है।

रायपुर। उपखंड मुख्यालय से नगर पालिका का सफर तय करने के बावजूद रायपुर आज भी अपनी सुरक्षा के लिए दूसरों का मुंह ताकने को मजबूर है। कभी उपखंड मुख्यालय होने के नाते यह तर्क देकर पल्ला झाड़ लिया जाता था कि नगर पालिका बनने के बाद ही फायर ब्रिगेड की सुविधा मिल पाएगी, लेकिन अब दर्जा बदलने के बाद भी हालात जस के तस बने हुए हैं। अग्निशमन वाहन का अभाव न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि स्थानीय जनता के बीच बढ़ते आक्रोश और चिंता का मुख्य कारण बन चुका है।
क्षेत्र की बढ़ती आबादी, तेजी से विस्तारित होती व्यापारिक गतिविधियां और राष्ट्रीय व राज्य राजमार्गों से जुड़ाव होने के कारण रायपुर में सुरक्षा संसाधनों की भारी आवश्यकता है। वर्तमान में स्थिति यह है कि रायपुर या आसपास के गांवों में आगजनी की घटना होने पर जैतारण, ब्यावर या सोजत से दमकल गाड़ियां बुलानी पड़ती हैं। ये सभी केंद्र रायपुर से लगभग 30 से 35 किलोमीटर दूर स्थित हैं। दूरी अधिक होने के कारण दमकल को पहुंचने में काफी समय लगता है, और अक्सर जब तक सहायता पहुंचती है, तब तक आग विकराल रूप धारण कर चुकी होती है, जिससे लाखों रुपये की संपत्ति खाक हो जाती है।
भीषण गर्मी के दौर में यह संकट और भी भयावह हो जाता है। खेतों में तैयार खड़ी फसलें और सूखी घास तेज हवाओं के संपर्क में आते ही धधक उठती हैं। संसाधनों के अभाव में ग्रामीण अक्सर अपनी जान जोखिम में डालकर आग बुझाने का प्रयास करते हैं, जो प्रशिक्षण की कमी के कारण किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है। बाजार क्षेत्र के व्यापारियों का भी यही मानना है कि बिजली के बढ़ते लोड और शॉर्ट सर्किट के खतरों के बीच शहर एक बारूद के ढेर पर बैठा है, जहां एक छोटी सी चिंगारी प्रशासन की लापरवाही के कारण बड़ी त्रासदी बन सकती है।
यद्यपि ग्रामीणों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने समय-समय पर ज्ञापन देकर स्थायी फायर ब्रिगेड की मांग दोहराई है, किंतु नगर पालिका का गठन होने के बाद भी अब तक धरातल पर कोई ठोस कार्यवाही नजर नहीं आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी नगर पालिका के लिए आपदा प्रबंधन के तहत अग्निशमन सेवा एक अनिवार्य घटक है। अब सवाल यह उठता है कि क्या यह देरी किसी प्रशासनिक प्रक्रिया की अड़चन है या फिर जनता की सुरक्षा शासन की प्राथमिकता में ही नहीं है? स्थानीय नागरिकों ने सरकार से मांग की है कि अविलंब बजट, संसाधन और कर्मचारियों की नियुक्ति कर रायपुर को इस मूलभूत सुविधा से लैस किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी संभावित जन-धन की हानि को रोका जा सके।

Jagdish Mali, Raipur
नाम: जगदीश माली
वर्तमान पद: संवाददाता (रायपुर मारवाड़)
कार्यक्षेत्र: जिला पाली और जिला ब्यावर (विशेष रूप से रायपुर तहसील, जैतारण तहसील एवं इनके अंतर्गत आने वाले क्षेत्र)
बीट: स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, और बिज़नेस
परिचय
जगदीश माली राजस्थान के पाली और ब्यावर जिलों के क्षेत्रीय संवाददाता हैं। वह मुख्य रूप से रायपुर मारवाड़, रायपुर तहसील और जैतारण तहसील सहित इसके अंतर्गत आने वाले सभी ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों की खबरों को कवर करते हैं। जगदीश माली स्थानीय प्रशासन, पुलिस थाना, अस्पताल, राजनीति, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार से जुड़ी सभी प्रकार की महत्वपूर्ण खबरों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
जगदीश माली को क्षेत्रीय धरातल पर समाचार संकलन और मीडिया रिपोर्टिंग का 5 साल का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने स्थानीय जनसमस्याओं, प्रशासनिक बैठकों और विकास कार्यों को निरंतर रिपोर्ट किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (12वीं पास) पूरी की है।
