ब्यावर जिले की नगर पालिका रायपुर द्वारा करीब 48 लाख रुपए की लागत से निर्मित रायपुर बाईपास सीसी सड़क गुणवत्ता जांच में पूरी तरह फेल हो गई है। सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) की रीजनल क्वालिटी कंट्रोल लैब अजमेर की जांच रिपोर्ट में सड़क निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। रिपोर्ट में सड़क को “अनसैटिस्फैक्टरी” बताते हुए कई हिस्सों को तोड़कर दोबारा निर्माण करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

यह सड़क रायपुर बस स्टैंड से राजकीय चिकित्सालय तक बनाई गई थी। निर्माण कार्य के दौरान ही ग्रामीणों ने सड़क निर्माण में भारी अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया था। ग्रामीणों का कहना था कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है और सड़क की मोटाई भी तय मानकों के अनुसार नहीं रखी जा रही। शिकायतों के बाद तत्कालीन उपखंड अधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग की क्वालिटी कंट्रोल शाखा अजमेर को जांच के निर्देश दिए थे।

इसके बाद पीडब्ल्यूडी की टीम ने 18 फरवरी 2026 को मौके पर पहुंचकर सड़क से कोर कटिंग के जरिए सैंपल लिए और उन्हें जांच के लिए अजमेर स्थित प्रयोगशाला भेजा। करीब तीन महीने बाद सामने आई जांच रिपोर्ट ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच रिपोर्ट में सामने आया कि सड़क की डीएलसी (Dry Lean Concrete) परत कई स्थानों पर निर्धारित 100 एमएम के बजाय मात्र 60 से 80 एमएम तक ही पाई गई। रिपोर्ट के अनुसार राठौड़ कृषि फार्म और कुम्हारों का चौक क्षेत्र में डीएलसी मोटाई केवल 60 एमएम मिली, जबकि खींची हाउस के सामने 80 एमएम पाई गई। तीनों स्थानों को “नॉट ओके” घोषित करते हुए पूरी डीएलसी हटाकर पुनः निर्माण करने के निर्देश दिए गए हैं।

जांच में यह भी सामने आया कि कबाड़ी मैदान क्षेत्र में सीसी सड़क की मोटाई निर्धारित 150 एमएम के बजाय केवल 125 एमएम मिली। इसे तकनीकी मानकों के विपरीत मानते हुए संबंधित हिस्से को तोड़कर दोबारा निर्माण करने के आदेश दिए गए हैं। हालांकि कुछ स्थानों पर मोटाई सहनशील सीमा में पाई गई, लेकिन अधिकांश हिस्सों में गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठे हैं।

पीडब्ल्यूडी लैब द्वारा की गई कंप्रेसिव स्ट्रेंथ जांच में भी सड़क की गुणवत्ता बेहद कमजोर पाई गई। एम-30 ग्रेड के अनुसार सड़क की मजबूती तय मानकों तक नहीं पहुंची। रिपोर्ट के अनुसार अलग-अलग स्थानों से लिए गए सैंपलों में कंप्रेसिव स्ट्रेंथ 14.10 से 21.63 एन/एमएम² तक दर्ज की गई, जबकि निर्धारित मानक इससे काफी अधिक होना चाहिए था। औसत स्ट्रेंथ 16.82 एन/एमएम² पाई गई, जिसे रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से “नॉट ओके” बताया गया है।

जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि सीसी पेवमेंट की जॉइंट कटिंग कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार नहीं किया गया। इससे भविष्य में सड़क के जल्दी टूटने और दरारें आने की संभावना बढ़ सकती है।

पीडब्ल्यूडी क्वालिटी कंट्रोल शाखा अजमेर ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि जिन स्थानों पर सड़क की मोटाई और मजबूती मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई, वहां की सीसी सड़क हटाकर दोबारा बनाई जाए। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ पुनर्निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं ताकि भारी वाहनों का दबाव सड़क लंबे समय तक सहन किया जा सके।

गौरतलब है कि सड़क निर्माण के दौरान ग्रामीण लगातार निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठा रहे थे और कई बार विरोध प्रदर्शन भी किया गया था। अब पीडब्ल्यूडी की आधिकारिक जांच रिपोर्ट ने ग्रामीणों के आरोपों को सही साबित कर दिया है। मामले के सामने आने के बाद नगर पालिका की कार्यप्रणाली और निर्माण एजेंसी की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

इस संबंध में नगर पालिका रायपुर के कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी विपिन देवल से पक्ष जानने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।

Pratahkal Bureau

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