रायपुर में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती अत्यंत हर्षोल्लास, श्रद्धा और गरिमा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर शहर के महाराणा प्रताप चौक पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका शुभारंभ महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित कर जयघोषों के साथ हुआ। इसके बाद नर्सिंग द्वारा आयोजित स्नेह मिलन समारोह में समाज के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।


कार्यक्रम की अध्यक्षता कुंवर मानवजीत सिंह रायपुर ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने महाराणा प्रताप के अद्वितीय त्याग, स्वाभिमान, राष्ट्रभक्ति और संघर्षमय जीवन का विस्तार से वर्णन किया और उपस्थित जनसमूह से उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। आयोजन की औपचारिक शुरुआत प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई। कार्यक्रम के दौरान कृष्णा कंवर एवं डिम्पल कंवर ने सरस्वती वंदना और प्रार्थना प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। वहीं, भवानी सिंह चावंडिया द्वारा महाराणा प्रताप के शौर्य एवं पराक्रम पर आधारित ओजस्वी गीतों ने उपस्थित श्रोताओं में जोश और उत्साह का संचार किया।

श्री राजपूत सभा रायपुर के अध्यक्ष भीम सिंह उदावत ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने अपने संबोधन में समाज में संगठन और संस्कारों की महत्ता पर जोर दिया। राजपूत छात्रावास के अध्यक्ष कर्नल महेंद्र सिंह डिगरना ने युवाओं का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें शिक्षा, अनुशासन और निरंतर प्रयासों के माध्यम से सरकारी एवं निजी क्षेत्रों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया। लक्ष्मण सिंह रायरा ने भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया और युवाओं को आगामी संस्कार शिविर में अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस गरिमामय आयोजन में मंडल अध्यक्ष कृष्णपाल सिंह नेबेड़ा, सरपंच मानसिंह लाम्बिया, लक्ष्मण सिंह, महिपाल सिंह लीलाम्बा, दुर्गा सिंह गुड़िया, बहादुर सिंह सारंगवास, कान सिंह उदावत, देवराज सिंह, जितेंद्र सिंह, गोपाल सिंह, चंद्रवीर सिंह, दीवान सिंह, सवाई सिंह, भगवान सिंह, अजित सिंह रूदिया, महिपाल सिंह और भंवर सिंह बुर्चा सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में समाज के युवाओं, महिलाओं और बच्चों की व्यापक सहभागिता रही। आयोजन के दौरान गूंजते महाराणा प्रताप के जयघोषों ने वातावरण को वीरतापूर्ण बना दिया। अंततः, यह कार्यक्रम सामाजिक एकता, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करने वाला एक प्रेरणादायक आयोजन सिद्ध हुआ, जहाँ सभी ने राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया।

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Pratahkal Newsroom

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