‘सखी’ वन स्टॉप सेंटर का औचक निरीक्षण, व्यवस्थाओं की हुई गहन समीक्षा; स्वच्छता और मनोवैज्ञानिक सेवाओं को लेकर दिए अहम निर्देश
ब्यावर के ‘सखी’ वन स्टॉप सेंटर का जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव सोनल पारीख ने निरीक्षण किया। समीक्षा के दौरान स्वच्छता, सुविधाओं और मनोवैज्ञानिक सेवाओं को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए।

ब्यावर के सखी वन स्टॉप सेंटर का निरीक्षण करतीं डीएलएसए सचिव सोनल पारीख (बाएं), केंद्र प्रभारी जगदीश चौधरी (दाएं) और उपस्थित कर्मचारी।
महिलाओं को एक ही छत के नीचे सुरक्षा, परामर्श और सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित ‘सखी’ वन स्टॉप सेंटर का गुरुवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, ब्यावर की सचिव एवं अपर जिला न्यायाधीश सोनल पारीख ने निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं, संसाधनों, सुरक्षा व्यवस्थाओं तथा लाभार्थियों को प्रदान की जा रही सेवाओं का विस्तृत अवलोकन किया गया।
अमृतकौर अस्पताल के एमसीएच विंग के द्वितीय तल पर संचालित ‘सखी’ वन स्टॉप सेंटर के निरीक्षण के दौरान केंद्र को संचालित अवस्था में पाया गया। इस अवसर पर केंद्र इंचार्ज एवं सहायक निदेशक महिला अधिकारिता विभाग जगदीश चौधरी सहित परामर्शदाता एवं केस वर्कर सरिता नाथ, कंप्यूटर सहायक राजवर्धन, सुरक्षा कर्मी आशा कंवर एवं धत्रेश कुमार तथा हेल्पर पार्वती उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान भवन की स्थिति, स्वच्छता, सुरक्षा व्यवस्था, पहुंच सुविधाओं तथा आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता की समीक्षा की गई। केंद्र की सामान्य साफ-सफाई व्यवस्था संतोषजनक पाई गई, हालांकि शौचालय और स्नानघर में स्वच्छता संबंधी कमियां सामने आने पर सचिव ने संबंधित अधिकारियों को नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
केंद्र में पीड़ित महिलाओं के लिए पृथक आवासीय कक्ष एवं परामर्श कक्ष उपलब्ध पाए गए। इसके साथ ही विद्युत, पेयजल, शौचालय, सुरक्षा व्यवस्था, सूचना पट्ट, हेल्पलाइन नंबर तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं से संबंधित जानकारी भी प्रदर्शित मिली। दिव्यांगजन की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रैंप एवं लिफ्ट जैसी आवश्यक पहुंच सुविधाएं भी उपलब्ध पाई गईं।
सचिव सोनल पारीख ने निरीक्षण के दौरान केंद्र के प्रशासनिक अभिलेखों का भी परीक्षण किया। ड्यूटी रोस्टर नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित पाया गया, वहीं आगंतुक पंजिका, केस रजिस्टर, परामर्श रजिस्टर, उपस्थिति पंजिका, फॉलोअप रिकॉर्ड तथा प्रचार-प्रसार गतिविधियों से संबंधित रजिस्टरों का नियमित संधारण किया जाना पाया गया।
निरीक्षण के दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि केंद्र में नियुक्त मनोवैज्ञानिक पिछले एक माह से अनुपस्थित चल रही हैं। इस पर सचिव ने केंद्र इंचार्ज को निर्देशित किया कि प्रभावित सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने के लिए शीघ्र वैकल्पिक मनोवैज्ञानिक की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार वर्तमान में केंद्र में कोई लाभार्थी निवासरत नहीं है, जबकि जून माह के दौरान अब तक तीन महिलाओं को आश्रय प्रदान किया जा चुका है। केंद्र में लाभार्थियों को विधिक, सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही पुनर्वास और जागरूकता संबंधी गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं तथा मामलों के समाधान के लिए नियमित फॉलोअप कार्रवाई की जा रही है।
निरीक्षण के समापन पर सचिव सोनल पारीख ने केंद्र की व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी, सुव्यवस्थित तथा लाभार्थी-केंद्रित बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। यह निरीक्षण महिलाओं के संरक्षण और सहायता से जुड़ी सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

Pratahkal Bureau
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