ब्यावर में 14 महीने से लापता नाबालिग मिली, आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने रची थी चाल
ब्यावर में 14 महीने से लापता नाबालिग को पुलिस ने सुरक्षित दस्तयाब कर लिया। जांच में आरोपी की डिजिटल ट्रेस छिपाने की कोशिश और पुलिस को गुमराह करने की पूरी योजना सामने आई। आरोपी को अजमेर से डिटेन किया गया।

ब्यावर पुलिस ने 14 महीने से लापता नाबालिग लड़की को सकुशल दस्तयाब कर मामले में आरोपी को डिटेन किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने के लिए फेक एविडेंस क्रिएट किए और डिजिटल ट्रेस से बचने की योजना बनाई थी। नाबालिग घर से जाने से पहले अपनी नोटबुक में अंग्रेजी में ‘Want to Die’ यानी ‘मरना चाहती हूँ’ जैसे गंभीर शब्द लिखकर गई थी, जिससे परिजनों और पुलिस की चिंता बढ़ गई थी। ब्यावर पुलिस के इस मामले के खुलासे के बाद 14 महीने से जारी तलाश का अंत हुआ।
घटना 02 जून 2025 की है। प्रार्थीया ने लिखित रिपोर्ट देकर बताया था कि उसकी बेटी, जिसकी जन्म तिथि 16-12-07 है, 02 जून 2025 को सुबह 10.45 बजे बिना बताए घर से चली गई और वापस नहीं आई। परिवार ने सभी जगह और रिश्तेदारों से पूछताछ की, लेकिन उसका कोई अता-पता नहीं चला। इस पर प्रकरण संख्या 248/2025 दिनांक 02-06-2025 धारा 137(2) बीएनएस के तहत पुलिस थाना साकेत नगर में मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया गया।
जांच के दौरान सामने आया कि घर से जाने से पहले नाबालिग अपनी नोटबुक में ‘Want to Die’ लिखकर गई थी। लगातार सुराग नहीं मिलने और मामला नाबालिग से जुड़ा होने के कारण इलाके में तनाव की स्थिति बनी हुई थी। कुछ समय पहले परिजनों, विभिन्न संगठनों और सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने पुलिस थाने के बाहर धरना दिया था तथा उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर नाबालिग की जल्द दस्तयाबी और आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की थी। आंदोलन के बाद पुलिस प्रशासन पर मामले का जल्द खुलासा करने का अतिरिक्त दबाव था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पुलिस अधीक्षक ब्यावर श्री रतन सिंह के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती अनुकृति उज्जैनिया के मार्गदर्शन तथा वृताधिकारी वृत ब्यावर श्री नरेन्द्र पारीक के निकट सुपरविजन में थानाधिकारी आशुतोष पाण्डे पुनि/थानाधिकारी के नेतृत्व में पुलिस टीम गठित की गई। तकनीकी सर्विलांस, संदिग्ध नंबरों की कॉल डिटेल्स (CDR), सोशल मीडिया अकाउंट्स और तकनीकी निगरानी की बारीकी से मॉनिटरिंग की गई। मुखबिर तंत्र को सक्रिय रखकर छोटे-छोटे इनपुट्स पर काम किया गया और राजस्थान तथा अन्य संभावित पड़ोसी राज्यों व जिलों में कई स्थानों पर दबिश दी गई। मानवीय दृष्टिकोण और काउंसलिंग के जरिए परिजनों से लगातार संपर्क बनाए रखते हुए उन्हें ढांढस बंधाया गया और हर संभव दिशा में अनुसंधान आगे बढ़ाया गया।
पुलिस के अनुसार लगातार मेहनत, सूझबूझ और तकनीकी निगरानी के बाद नाबालिग की लोकेशन ट्रेस की गई और उसे सुरक्षित दस्तयाब कर लिया गया। आरोपी से पूछताछ में सामने आया कि वह काफी समय पहले से पीड़िता को भगाकर ले जाने की तैयारी कर चुका था। आरोपी और पीड़िता के संबंधों की जानकारी परिजनों को थी, लेकिन वे इस संबंध से खुश नहीं थे। आरोपी कंप्यूटर, फोटोग्राफी और मोबाइल रिपेयरिंग का एक्सपर्ट है। उसने डिजिटल ट्रेस नहीं छोड़ने के लिए योजना बनाई, दोस्तों से सिम प्राप्त की और अपने तथा पीड़िता के नाम से सोशल मीडिया अकाउंट और डिजिटल पेमेंट्स नहीं करने का निर्णय लिया।
पुलिस के मुताबिक निश्चित दिनांक को आरोपी पीड़िता को घर से बाहर बुलाकर टैक्सी से विजयनगर ले गया। वहां एक अज्ञात व्यक्ति से मोटरसाइकिल पर लिफ्ट लेकर विजयनगर टैक्सी स्टैंड पहुंचा। इसके बाद टैक्सी से कैकड़ी बस स्टैंड पहुंचकर उसने अपना हुलिया बदला। रोडवेज बस से देवली गया, फिर देवली से कोटा के लिए टैक्सी ली और कोटा से भोपाल चला गया। भोपाल में रहने के लिए कमरा किराये पर लिया और पहचान उजागर न हो, इसलिए करीब एक महीने तक घर से बाहर नहीं निकला। बाद में पीड़िता को भोपाल में अकेला छोड़कर आगरा गया और पुलिस को गुमराह करने के लिए एक पार्क के पास अपना मोबाइल जानबूझकर गिरा दिया। पुलिस टीम ने पीड़िता के मोबाइल की सर्विलांस के आधार पर आगरा से मोबाइल बरामद किया।
इसके बाद आरोपी भोपाल में पानी पूरी का ठेला लगाने लगा, लेकिन ज्यादा फेमस होने और नाम उजागर होने के खतरे के कारण उसने पानी पूरी का काम बंद कर मजदूरी शुरू कर दी और पीड़िता के बालिग होने का इंतजार करने लगा। पीड़िता के बालिग होने पर दोनों ने भोपाल में आर्य समाज में शादी कर ली तथा अप्रैल माह में मध्यप्रदेश शासन से विवाह का रजिस्ट्रेशन भी करवाया। इसके बाद पीड़िता ने अपने परिजनों से संपर्क किया, लेकिन परिजनों ने लोकलाज के कारण पुलिस को इसकी जानकारी नहीं दी। पीड़िता के परिजनों और आरोपी ने वकील से संपर्क कर अजमेर आने की योजना बनाई। पुलिस टीम तकनीकी सर्विलांस और मुखबिर तंत्र के जरिए लगातार निगरानी कर रही थी। आरोपी के अजमेर आने पर उसकी लोकेशन ट्रेस की गई और पीड़िता को दस्तयाब कर लिया गया। आरोपी को डिटेन कर लिया गया है और प्रकरण में अनुसंधान जारी है।
पुलिस ने आरोपी की पहचान श्री गोरधन उर्फ साहिल शर्मा पुत्र श्री रामगोपाल शर्मा, उम्र करीब 40 साल, निवासी सेदड़ा रोड, राजमहल होटल के पीछे, ब्यावर, हाल किरायेदार कृष्णा कॉलोनी, मेवाड़ी गेट बाहर, ब्यावर, पुलिस थाना साकेत नगर, ब्यावर, जिला ब्यावर, राजस्थान के रूप में बताई है। गठित पुलिस टीम में आशुतोष पाण्डे पुनि थानाधिकारी थाना ब्यावरसिटी, श्री सरफराज हाल सउनि जिला साइबर सेल ब्यावर, श्री रफीक खां सउनि थाना ब्यावरसिटी, श्री भगवान हेड कानि 428, श्री पवन कुमार कानि 1956, श्री सोभाग कानि 884, श्री मनीष कानि 1632, श्री मनुपाल कानि 2846, श्री अशोक कानि 3154, श्री प्रदीप कानि 1894, श्री सुशील कानि 318, श्री नैनासिंह कानि 599 और श्री सुरजीत होमगार्ड 1019 शामिल रहे।
ब्यावर पुलिस की प्रेस नोट दिनांक 25-8-2026 में @BeawarPolice, Beawar Police Rajasthan और beawar_police का उल्लेख किया गया है। पुलिस कंट्रोल रूम नंबर 01462-250100 तथा 100/112 उपलब्ध कराए गए हैं। नोट में RajCop citizen app-Need Help के साथ 1098 Child Helpline, 1090 Women Helpline, 1930 Cyber Crime Helpline और 1933 Mans Helpline का भी उल्लेख है। यह कार्रवाई 14 महीने से जारी तलाश, तकनीकी सर्विलांस और लगातार किए गए अनुसंधान के बाद नाबालिग की सुरक्षित दस्तयाबी तथा आरोपी को डिटेन किए जाने तक पहुंची।

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