नाद आराधन में गूंजे भारतीय शास्त्रीय संगीत के स्वर, ब्यावर में सांस्कृतिक सहकार को मिला नया आयाम
ब्यावर के सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय में आयोजित "नाद आराधन" में भारतीय शास्त्रीय संगीत की शानदार प्रस्तुतियों के साथ सांस्कृतिक और शैक्षणिक सहयोग को नई दिशा मिली।

तस्वीर में दिख रहे कार्यक्रम के अतिथि और आयोजक मंच पर सम्मानित किए गए युवा कलाकारों के साथ स्मृति-चिह्न हाथ में लिए खड़े हैं।
सनातन धर्म राजकीय महाविद्यालय, ब्यावर के संगीत विभाग की ओर से राष्ट्र के सांस्कृतिक गौरव की अभिवृद्धि तथा शैक्षिक एवं संस्थागत सहकार एवं सहयोग के माध्यम से युवाओं में भारतीय शास्त्रीय संगीत के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से आयोजित मासिक संगीत सभा "नाद आराधन" का गुरुवार को संगीत विभाग में सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम ने भारतीय शास्त्रीय संगीत के साथ विभिन्न शिक्षण संस्थानों के बीच सांस्कृतिक संवाद और सहयोग को नया आयाम दिया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथि कलाकारों द्वारा दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. दुष्यन्त त्रिपाठी ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि "नाद आराधन" का उद्देश्य देश के प्रतिष्ठित संगीत महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के मध्य सांगीतिक संवाद, शैक्षणिक सहयोग तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान को सुदृढ़ करना है। उन्होंने बताया कि इस श्रृंखला के अंतर्गत प्रत्येक माह विभिन्न संस्थानों के विद्यार्थी एक-दूसरे के परिसर में जाकर अपनी प्रस्तुतियाँ देंगे, जिससे युवा कलाकारों को व्यापक मंच और समृद्ध अनुभव प्राप्त होगा।
इस अवसर पर राजस्थान संगीत संस्थान, जयपुर से आए विद्यार्थी दल ने भारतीय शास्त्रीय संगीत की मनोहारी प्रस्तुतियाँ दीं। कलाकारों ने शास्त्रीय गायन, टप्पा, ठुमरी, गजल गायन, सितार वादन एवं तबला वादन के माध्यम से अपनी उत्कृष्ट साधना, तकनीकी दक्षता और कलात्मक अभिव्यक्ति का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उनकी प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया तथा पूरे सभागार को सुर, लय और भाव की अनुपम अनुभूति से आलोकित कर दिया।
महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. रेखा मंडोवरा ने अपने उद्बोधन में कहा कि ऐसे आयोजन भारतीय सांगीतिक परम्परा को नई पीढ़ी से जोड़ने के साथ-साथ विभिन्न शिक्षण संस्थानों के मध्य सांस्कृतिक सहयोग की सुदृढ़ आधारशिला निर्मित करते हैं। उन्होंने संगीत विभाग की इस अभिनव पहल की सराहना करते हुए इसे राष्ट्रीय स्तर पर अनुकरणीय प्रयास बताया।
कार्यक्रम के अंत में राजस्थान संगीत संस्थान, जयपुर से पधारे कलाकारों का स्मृति-चिन्ह एवं सम्मान-पत्र प्रदान कर अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम के संयोजक निश्चय कच्छावा तथा कुलदीप रावलोत ने आगामी अगस्त माह में अन्य महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालयों के संगीत विभाग के विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों के साथ इस श्रृंखला को निरंतर आगे बढ़ाने की घोषणा की।
कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, विद्यार्थी, शोधार्थी, अजमेर से प्राध्यापक डॉ. प्रिया गुप्ता तथा विद्यार्थियों के साथ बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन जतिन जैन एवं वरुण चावला ने किया। इस संपूर्ण प्रकल्प के सूत्रधार सुनील कुमार मुसालिया तथा किशन सोनी ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए ब्यावर को राष्ट्रीय संगीत पटल पर भारत की सांस्कृतिक चेतना, संस्कार और संस्कृति की एक मजबूत कड़ी के रूप में स्थापित करने का संकल्प व्यक्त किया।

Pratahkal Bureau
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