सरकारी विभागों में अवकाश के दिनों में कार्य करने के बढ़ते दबाव और इससे उत्पन्न मानसिक तनाव के विरोध में ब्यावर जिले के कर्मचारी संगठनों ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राजस्थान पटवार संघ, राजस्थान ग्राम विकास अधिकारी संघ एवं राजस्थान कृषि पर्यवेक्षक संघ की जिला ब्यावर इकाइयों ने संयुक्त रूप से कर्मचारियों की इस दीर्घकालिक व गंभीर समस्या को उठाते हुए राजकीय अवकाशों में लगातार ली जा रही ड्यूटी पर कड़ा ऐतराज जताया है। इस ज्वलंत मुद्दे को लेकर संयुक्त समन्वय समिति जयपुर (जिला-ब्यावर) के बैनर तले राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव के नाम एक प्रशासनिक ज्ञापन सौंपा गया है, जिसमें स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि आपातकालीन स्थितियों को छोड़कर अब भविष्य में अवकाश के दिनों में उनसे कोई गैर-आपातकालीन कार्य न करवाया जाए।

कर्मचारी संगठनों ने सरकार को उनके ही पुराने नीतिगत निर्णयों की याद दिलाते हुए ज्ञापन में उल्लेख किया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2008 में कर्मचारियों की कार्यक्षमता को बढ़ाने, उनके मानसिक तनाव को कम करने तथा उनके पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन में सकारात्मक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से बकायदा पांच दिवसीय कार्य व्यवस्था लागू की थी। इस पारदर्शी नीति के बावजूद पिछले कुछ वर्षों से इस व्यवस्था को दरकिनार किया जा रहा है। विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों, शिविरों, चौपालों, मैराथन बैठकों, औचक निरीक्षणों एवं विशेष अभियानों के संचालन के नाम पर लगातार शनिवार, रविवार और अन्य महत्वपूर्ण राजकीय अवकाशों में भी धरातलीय कर्मचारियों की ड्यूटियां थोपी जा रही हैं।

संयुक्त समन्वय समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि संकटकालीन और आपातकालीन परिस्थितियों में समस्त सरकारी कर्मचारियों ने हमेशा मुस्तैदी से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है और वे इसके लिए सदैव तत्पर भी रहते हैं, लेकिन नियमित रूप से हर अवकाश दिवस को कार्य दिवस में तब्दील कर देने से अब कर्मचारियों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर अत्यंत प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस दमघोंटू कार्य संस्कृति के कारण बाहरी जिलों से आकर ब्यावर में सेवाएं दे रहे कर्मचारियों की स्थिति और अधिक दयनीय हो गई है, क्योंकि उन्हें अपने परिवारों के साथ समय बिताने का कोई अवसर ही नहीं मिल पा रहा है।

धरातल पर ग्रामीण विकास की रीढ़ माने जाने वाले इन संगठनों ने पुरजोर तरीके से यह बात रखी कि ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत पटवारी, ग्राम विकास अधिकारी एवं कृषि पर्यवेक्षक ही वास्तव में राज्य एवं केंद्र सरकार की समस्त जनकल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में बिना किसी विश्राम के लगातार अवकाश दिवसों में भी कार्य लिए जाने से उनके पेशेवर कार्य और निजी जीवन के बीच का संतुलन पूरी तरह छिन्न-भिन्न हो चुका है। इसी पृष्ठभूमि में संयुक्त समन्वय समिति ने मुख्य सचिव से पुरजोर मांग की है कि अत्यंत अपरिहार्य एवं संकटकालीन परिस्थितियों को छोड़कर अवकाश के दिनों में किसी भी प्रकार की बैठक, ग्राम सभा, चौपाल, शिविर एवं निरीक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर तुरंत रोक लगाई जाए, तथा भविष्य में कर्मचारियों के विधिक अवकाश अधिकारों का पूर्ण सम्मान करते हुए सभी राजकीय कार्यों का निर्धारण केवल आधिकारिक कार्य दिवसों में ही सुनिश्चित किया जाए।

इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक ज्ञापन को सौंपने के दौरान कर्मचारी जगत की एकजुटता साफ नजर आई, जिस पर संयुक्त महासंघ के जिलाध्यक्ष जवरी लाल प्रजापत, ग्राम विकास अधिकारी संघ के जिलाध्यक्ष विजय प्रकाश शर्मा, पटवार संघ के जिलाध्यक्ष मूला राम भाटी, कृषि पर्यवेक्षक संघ के जिलाध्यक्ष गोविन्द देव तिवारी, प्रदेश प्रतिनिधि विकास नायक, उपाध्यक्ष शंकर चौधरी, जिला महामंत्री महेन्द्र रणवा, महिला जिलाध्यक्ष प्रतिभा शर्मा, ब्लॉक अध्यक्ष गुड्डू मीणा, ब्लॉक अध्यक्ष नरेंद्र कटारिया सहित हुकमीचंद मिश्रा, बदराम, अर्जुन, मनोज राव, महावीर सेन, हेमराज, ममता, उत्तम काठात, कैलाश प्रजापत एवं अनेक अन्य वरिष्ठ कर्मचारी प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर मौजूद रहे। कर्मचारी संगठनों ने दोटूक लहजे में सरकार को चेताया है कि यदि इस ज्ञापन के बाद भी अवकाश दिवसों में गैर-आपातकालीन कार्यों के दमनकारी आदेश जारी होते रहे, तो भविष्य में शनिवार, रविवार एवं अन्य राजकीय अवकाश के दिनों में कर्मचारियों द्वारा केवल और केवल आपातकालीन सेवाओं से जुड़े अनिवार्य कार्य ही किए जाएंगे और शेष सभी प्रकार के आयोजनों व कार्यों का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा।

मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपकर अवकाश दिवसों में गैर-आपातकालीन कार्य नहीं करवाने की मांग करते कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी पैनी नजर से सरकार के अगले कदम की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

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