पालघर के नवली जंगल में तेंदुए के हमले में 52 वर्षीय महिला की मौत, आठ साल बाद पहली घटना
महाराष्ट्र के पालघर जिले के नवली गांव में आठ साल बाद तेंदुए के हमले से 52 वर्षीय महिला की मौत, वन विभाग ने बढ़ाई गश्त और निगरानी।

महाराष्ट्र के पालघर जिले के नवली गांव के जंगल में तेंदुए के हमले में 52 वर्षीय महिला पांगली गोविंद कोल्हा की मौत के बाद वन विभाग और स्थानीय लोग तेंदुए को पकड़ने के लिए अभियान चलाते हुए।
महाराष्ट्र के पालघर जिले के नवली गांव के जंगल में कथित तेंदुए के हमले में 52 वर्षीय महिला पांगली गोविंद कोल्हा की मौत हो गई। इस घटना ने क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष को लेकर चिंता बढ़ा दी है। करीब आठ साल बाद इस इलाके में तेंदुए के हमले से इंसान की मौत का पहला मामला सामने आया है। मृतका नवली गांव के पास भोगलेपाड़ा नंबर 2 में रहती थीं। उनका घर जंगल की सीमा से सटा हुआ था।
घटनाक्रम के अनुसार, पांगली गोविंद कोल्हा को आखिरी बार 8 अक्टूबर की शाम देखा गया था। माना जा रहा है कि वह 9 अक्टूबर की सुबह पास के जंगल में गई थीं, जहां उन पर हमला हुआ। उनका शव नवली गांव के आरक्षित वन क्षेत्र के सर्वे नंबर Lo/9 में वेवुर बीट के अंतर्गत जंगल के एक हिस्से में मिला। वन विभाग और पुलिस कर्मियों की संयुक्त जांच के बाद 11 अक्टूबर को हुए पोस्टमार्टम में पुष्टि हुई कि उनकी मौत जंगली जानवर के हमले से हुई थी।
इस घटना ने स्थानीय निवासियों और वन विभाग के अधिकारियों को हैरान कर दिया है। नवली के आसपास तेंदुए दिखाई देने की घटनाएं बेहद दुर्लभ रही हैं और इससे पहले इस क्षेत्र में मानव-तेंदुआ संघर्ष का कोई रिकॉर्ड नहीं था। पालघर जिले के बोईसर और दहिसर वन क्षेत्रों में तेंदुए दिखने की घटनाएं अपेक्षाकृत आम हैं, लेकिन नवली अब तक ऐसे मामलों से काफी हद तक अछूता रहा था।
सफाले की रेंज वन अधिकारी रीता वैद्य ने बताया कि मथाने, एडवन और घाटिम गांवों में तेंदुए की गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद वन विभाग का मैदानी अमला ग्रामीणों को सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूक कर रहा है। ग्रामीणों को बच्चों और मवेशियों की सुरक्षा तथा वन्यजीवों के साथ सुरक्षित सह-अस्तित्व के बारे में जानकारी दी जा रही है। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने, तेंदुए के पास नहीं जाने, उसे उकसाने से बचने और उसके दिखाई देने पर तुरंत वन विभाग को सूचना देने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोगों का सहयोग इंसानों और वन्यजीवों, दोनों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
सहायक वन संरक्षक रामानुज बंगड़ ने बताया कि महिला का शव बरामद कर लिया गया है और शुरुआती निष्कर्षों से मानव-तेंदुआ संघर्ष में मौत होने के संकेत मिले हैं। उनके अनुसार, सात से आठ वर्षों में इस क्षेत्र में यह इस तरह की पहली जानलेवा घटना है।
घटना के बाद वन विभाग ने तेंदुए की तलाश और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अभियान तेज कर दिया है। नवली और आसपास के वन क्षेत्रों में दिन-रात लगातार गश्त के लिए टीमें तैनात की गई हैं। तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कैमरा ट्रैप लगाए जा रहे हैं और उसे पकड़ने के लिए पिंजरा भी स्थापित किया गया है। अधिकारियों ने पारंपरिक सार्वजनिक घोषणाओं और घर-घर जाकर लोगों को जागरूक करने का अभियान शुरू किया है। राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार मृतका के परिवार को आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
पालघर के वन्यजीव विशेषज्ञ आनंद पाटिल ने कहा कि पिछले एक-दो महीने से इस क्षेत्र में तेंदुए के दिखाई देने की खबरें मिल रही थीं और उसे दिन के समय भी देखा गया था। उनके अनुसार, यदि वन विभाग ने पहले कार्रवाई की होती तो इस त्रासदी को टाला जा सकता था। उन्होंने बताया कि अधिकारियों का कहना है कि घटना स्थल पहले तेंदुए के दिखाई देने वाले स्थानों से 15 से 20 किलोमीटर दूर है। पाटिल ने इस धारणा को गलत बताया कि तेंदुआ इतनी दूरी तय नहीं कर सकता, क्योंकि तेंदुए आमतौर पर इतनी दूरी तय कर लेते हैं। उन्होंने वन विभाग से गश्त बढ़ाकर तेंदुए को पकड़ने की मांग की। उनके अनुसार, स्थानीय लोग तेंदुए को निडर बताते हैं और उसका आबादी वाले इलाकों के आसपास बार-बार दिखाई देना चिंता का विषय है।
दहाणू के उप वन संरक्षक (डीसीएफ) निरंजन सुभाषराव दिवाकर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने लोगों को सुबह-सुबह और देर रात के समय अकेले जंगल के हिस्सों में जाने से बचने की सलाह दी। महिला की मौत के बाद वन विभाग की गश्त, निगरानी और जागरूकता अभियान के जरिए तेंदुए की गतिविधियों पर नजर रखने और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

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