भारत विश्व के शीर्ष दस खाद्य अनाज उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन विशाल उत्पादन के बावजूद पर्याप्त भंडारण क्षमता की कमी हमेशा एक चुनौती रही है। कटाई के बाद होने वाली हानियाँ, किसानों की मजबूरी में अक्रिय बिक्री, बार-बार अनाज के उपयोग और परिवहन लागत में वृद्धि जैसी समस्याएँ इस कमी से जुड़ी हैं। इन्हीं चुनौतियों का समाधान करने के लिए भारत सरकार ने “सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना” शुरू की है, जिसका उद्देश्य देश की कृषि भंडारण संरचना को अत्याधुनिक और सुदृढ़ बनाना है। यह पहल न केवल खाद्य सुरक्षा को मजबूत करेगी बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने में भी मदद करेगी।

इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में विकेंद्रीकृत भंडारण सुविधाएँ स्थापित की जाएंगी, जिसमें प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS) अपनी व्यापक पहुँच और नेटवर्क का उपयोग करेंगी। इस कदम से संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में सुधार आएगा और किसानों व उपभोक्ताओं दोनों को लाभ मिलेगा।

योजना का प्रारंभिक चरण 31 मई 2023 को पायलट परियोजना के रूप में स्वीकृत हुआ। इसमें 11 राज्यों — महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, असम, तेलंगाना, त्रिपुरा और राजस्थान — में 11 PACS में कुल 9,750 मीट्रिक टन की विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण क्षमता के गोदाम तैयार किए गए। इस पायलट परियोजना का उद्घाटन माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 फरवरी 2024 को किया। इसके बाद 500 अतिरिक्त PACS में शिलान्यास किया गया, और अब तक 369 PACS के लिए जिला सहकारी विकास समिति से स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।

सरकारी एजेंसियाँ जैसे FCI, NCCF और NAFED PACS द्वारा निर्मित गोदामों के उपयोग के लिए हायरिंग आश्वासन दे रही हैं। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने भी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि PACS के गोदामों का प्राथमिकता से उपयोग भंडारण, अधिग्रहण और उचित मूल्य दुकानों (FPS) के रूप में किया जाए।

इस योजना के वित्तीय पक्ष को भी मजबूत किया गया है। कृषि अवसंरचना निधि (AIF), कृषि विपणन अवसंरचना योजना (AMI), कृषि यंत्रीकरण उप-योजना (SMAM), और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम (PMFME) जैसी योजनाओं के समेकन से PACS को अनुदान और ब्याज सहायता प्रदान की जा रही है। उदाहरण के लिए, AIF के तहत 2 करोड़ रुपये तक की परियोजना पर 3% ब्याज सहायता मिलती है, जबकि AMI के तहत गोदाम निर्माण के लिए 33.33% अनुदान दिया जाता है। NABARD भी विशेष पुनर्वित्त योजना के माध्यम से PACS को 4% ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध करा रही है, जिससे प्रभावी ब्याज दर मात्र 1% बन जाती है।

योजना की परिकल्पना PACS को बहु-सेवा केंद्र में बदलने की है, जहाँ अनाज भंडारण, अधिग्रहण केंद्र, प्रसंस्करण इकाई और सार्वजनिक वितरण केंद्र जैसी सुविधाएँ समेकित हों। इसका उद्देश्य अनाज की बर्बादी को कम करना, वितरण की दक्षता बढ़ाना और किसानों को मजबूरी में बिक्री से बचाना है।

योजना के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए अंतर-मंत्रिस्तरीय समिति, राष्ट्रीय समन्वय समिति, राज्य सहकारी विकास समिति (SCDC) और जिला सहकारी विकास समिति (DCDC) जैसे कई तंत्र बनाए गए हैं। NABARD भी PACS को मार्गदर्शन और वित्तीय सहयोग प्रदान कर योजना की सफलता सुनिश्चित कर रही है।

अब तक 11 राज्यों में 11 PACS के गोदाम निर्माण पूर्ण हो चुके हैं और 500 अतिरिक्त PACS के लिए नींव रखी जा चुकी है। 65 PACS में गोदाम निर्माण पूरा हो गया है, जबकि 369 PACS को जिला सहकारी विकास समितियों द्वारा स्वीकृति दी जा चुकी है। इस पहल से कटाई-पश्चात हानियों में कमी, खाद्य सुरक्षा में वृद्धि, किसानों की आय में सुधार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

सहकारी क्षेत्र में विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना न केवल भारत के कृषि भंडारण तंत्र में सुधार लाएगी बल्कि इसे एक वैश्विक उदाहरण भी बनाया जाएगा। इस पहल से न केवल आत्मनिर्भर भारत की दिशा को बल मिलेगा, बल्कि भविष्य में देश की बढ़ती जनसंख्या के लिए दीर्घकालीन खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

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Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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