प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS), जो दशकों से भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के लिए वित्तीय सहारा रही हैं, अब केवल ऋण देने तक सीमित नहीं रहीं। बदलती ग्रामीण जरूरतों और डिजिटल युग की मांग को देखते हुए, सरकार ने PACS को जन सेवा केंद्र (CSC) में रूपांतरित करने की पहल की है। इस परिवर्तन के साथ, PACS अब बहु-कार्यात्मक केंद्र के रूप में ग्रामीण नागरिकों को 300 से अधिक डिजिटल और गैर-डिजिटल सेवाएँ प्रदान कर सकेंगे।

देश भर में 1 लाख से अधिक PACS हैं, जिनमें 13 करोड़ से अधिक किसान सदस्य जुड़े हुए हैं। इन समितियों की व्यापक पहुँच और ग्रामीण जीवन में गहरी पैठ के कारण, ये केंद्र CSC योजना के माध्यम से ग्रामीणों तक बैंकिंग, बीमा, निवेशक जागरूकता, कानूनी साक्षरता, आधार अपडेट, पैन कार्ड, पासपोर्ट, ई-कॉमर्स, स्वास्थ्य और कृषि सेवाएँ जैसी कई सेवाएँ पहुंचा सकते हैं।

2 फरवरी 2023 को सहकारिता मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, NABARD और CSC ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए। इस समझौते के तहत PACS-CSC के माध्यम से ग्रामीण नागरिकों को आधुनिक वित्तीय और सामाजिक सेवाओं का लाभ सीधे उनके गांव में मिल सकेगा।

PACS-CSC के रूपांतरण से किसानों को न केवल पारंपरिक ऋण और वित्तीय सहायता मिलती है, बल्कि वे सीधे सरकारी योजनाओं और बाजारों से जुड़कर अपने उत्पाद बेच सकते हैं। यह प्रणाली बिचौलियों को समाप्त करती है और किसानों की आय में बढ़ोतरी सुनिश्चित करती है। साथ ही, ये केंद्र किसानों को मौसम पूर्वानुमान, सब्सिडी, उन्नत कृषि तकनीक और प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाते हैं।

इस पहल का प्रभाव केवल कृषि तक सीमित नहीं है। PACS-CSC ग्रामीण उद्यमियों और कारीगरों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और बाज़ार से जोड़कर स्थानीय व्यवसायों और महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करते हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्रामीण उत्पादों की बिक्री, माइक्रो लोन और व्यावसायिक प्रशिक्षण स्थानीय रोजगार सृजन को बढ़ावा देते हैं और शहरी प्रवास पर निर्भरता कम करते हैं।

वित्तीय समावेशन के दृष्टिकोण से भी यह पहल महत्वपूर्ण है। PACS-CSC ग्रामीण निवासियों को खाता खोलने, जमा-निकासी, सरकारी सब्सिडी और बीमा, पेंशन जैसे वित्तीय उत्पादों की जानकारी प्रदान करके वित्तीय साक्षरता बढ़ाते हैं। इस प्रकार, यह ग्रामीण भारत में समावेशी विकास और आर्थिक सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।

राष्ट्रीय स्तर पर, यह पहल “डिजिटल इंडिया”, “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसी योजनाओं से सीधे जुड़ती है। डिजिटल बुनियादी ढाँचे और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देना, ग्रामीण उद्योगों को सशक्त बनाना और स्थानीय रोजगार सृजन के माध्यम से आत्मनिर्भर समुदाय का निर्माण करना PACS-CSC के मुख्य उद्देश्यों में शामिल हैं।

हालाँकि, इस पहल के सामने कुछ चुनौतियाँ भी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता की कमी, दूरदराज़ क्षेत्रों में आधारभूत संरचना की असमानता और पारंपरिक कर्मचारियों की नई तकनीक को अपनाने में हिचकिचाहट इस प्रक्रिया में बाधक हैं। सरकार और सहयोगी संस्थाओं ने प्रशिक्षण, जागरूकता अभियान और अनुदान के माध्यम से इन चुनौतियों का समाधान निकालने की रणनीति बनाई है।

10 अक्टूबर 2025 तक, देश के 33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 50,355 PACS-CSC सेवाएँ प्रदान करना शुरू कर चुके हैं। इन केंद्रों के माध्यम से अब तक ₹116.85 करोड़ का लेन-देन किया जा चुका है। नेशनल काउंसिल फॉर कोऑपरेटिव ट्रेनिंग (NCCT) ग्रामीण नागरिकों और PACS कर्मचारियों को 300+ सेवाएँ प्रदान करने के लिए कार्यशालाएँ आयोजित कर रही है।

PACS का CSC में रूपांतरण ग्रामीण भारत में डिजिटल और वित्तीय समावेशन की दिशा में एक निर्णायक कदम है। यह पहल न केवल किसानों और ग्रामीण उद्यमियों को सशक्त बनाएगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर समावेशी और सतत विकास की नई मिसाल भी पेश करेगी।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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