सत्य नडेला ने पिता से सीखी लीडरशिप की अहम सीख, माइक्रोसॉफ्ट में बदलाव की कहानी
सत्य नडेला ने अपनी पुस्तक हिट रिफ्रेश में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे अपने पिता से मिली उस अहम सीख का खुलासा किया है, जिसने माइक्रोसॉफ्ट की कार्यसंस्कृति को बदल दिया। क्या एक स्थायी संस्थान का निर्माण सिर्फ नेतृत्व से होता है?

तस्वीर में माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्य नडेला एक कार्यक्रम के दौरान मुस्कुराते हुए दिखाई दे रहे हैं।
माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सत्य नडेला ने अपनी 2017 में प्रकाशित पुस्तक हिट रिफ्रेश में अपने पिता के अनुभव से मिली एक बड़ी सीख साझा की है। नडेला के पिता एक वरिष्ठ भारतीय सरकारी अधिकारी थे, जिनसे उन्होंने यह सीखा था कि एक स्थायी संस्थान का निर्माण करना बेहद कठिन कार्य है। नडेला ने अपनी पुस्तक में स्पष्ट किया कि आम सहमति और कठोर आदेश के बीच चुनाव करना एक गलत विकल्प है। किसी भी संस्थान के निर्माण के लिए एक स्पष्ट दृष्टि और संस्कृति की आवश्यकता होती है, जो ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर दोनों तरफ से प्रगति को प्रेरित कर सके। नडेला ने यह सिद्धांत केवल एक सामान्य धारणा के रूप में नहीं, बल्कि माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ के रूप में अपने उस साहसिक निर्णय को समझाने के लिए दिया था, जिसमें उन्होंने बाहर से लोगों को लाकर बदलाव थोपने के बजाय कंपनी के भीतर से ही संस्कृति को बदलने का रास्ता चुना।
नडेला का यह दृष्टिकोण नेतृत्व में चली आ रही पुरानी बहस को चुनौती देता है। उनका मानना है कि वास्तविक संस्थान को शीर्ष नेतृत्व के स्पष्ट निर्देशों और दैनिक संस्कृति में रची-बसी साझा मान्यताओं, दोनों की आवश्यकता होती है। नडेला का यह अनुभव उनके पिता के भारतीय प्रशासनिक सेवा के कार्यकाल के दौरान का है, जहां उन्होंने ऐसी संस्थाएं देखी थीं जो किसी एक अधिकारी के कार्यकाल से कहीं अधिक समय तक जीवित रहती हैं। 1992 में माइक्रोसॉफ्ट में शामिल होने के बाद, नडेला ने दो दशकों से अधिक समय तक कंपनी के विभिन्न विभागों में काम किया और 2014 में सीईओ बनने के बाद उन्होंने अपने पिता के सिद्धांतों को लागू किया। उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट को नो-इट-ऑल संस्कृति से लर्न-इट-ऑल संस्कृति में बदलने का लक्ष्य रखा, ताकि कंपनी ग्राहकों और कर्मचारियों से लगातार सीखती रहे।
नडेला का तर्क है कि संगठनात्मक संस्कृति अक्सर रणनीति से अधिक महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि एक अच्छी रणनीति भी गलत संस्कृति के कारण विफल हो सकती है। सच्चा नेतृत्व मूल्यों की घोषणा करने तक सीमित नहीं होता, बल्कि उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी अपनाकर दिखाया जाता है। उनका मानना है कि नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कर्मचारियों को बिना डर के प्रयोग करने और एक-दूसरे की मदद करने के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है। एक सफल संस्थान का लक्ष्य तिमाही परिणाम हासिल करना नहीं, बल्कि ऐसी प्रणाली और साझा विश्वास का निर्माण करना है जो नेतृत्व बदलने के बाद भी प्रगति जारी रखे। नडेला की यह सीख उन सभी के लिए एक मार्गदर्शक है जो तात्कालिक सफलता के बजाय दीर्घकालिक प्रभाव वाली संस्थाएं बनाना चाहते हैं।

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