पोइशे बोइशाख के अवसर पर आज रवींद्र जयंती मनाई जा रही है। इस वर्ष यह आयोजन गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की 165वीं जयंती के रूप में मनाया जा रहा है। सुबह से ही स्कूलों और विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों ने प्रभात फेरी का आयोजन किया। पूरे दिन संगीत, कविता पाठ और नृत्य के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

शांतिनिकेतन में पारंपरिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 5 बजे गौर प्रांगण में बैतालिक गीतों के साथ हुई। इसके बाद रवींद्र भवन में कविता पाठ और गीतों का आयोजन किया जाएगा, जबकि मुख्य जन्मोत्सव कार्यक्रम सुबह 9 बजे माधवी बितान में शुरू होगा। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में भी रवींद्र संगीत, कविता, नृत्य और नाटक पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

पोइशे बोइशाख के अवसर पर उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि अर्पित की। सोशल मीडिया पर अपने संदेश में उपराष्ट्रपति ने कहा कि गुरुदेव का योगदान केवल साहित्य तक सीमित नहीं था, बल्कि उससे कहीं अधिक व्यापक था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर असाधारण प्रतिभा के धनी लेखक, चिंतक और कवि थे। उन्होंने कहा कि गुरुदेव ने मानवता की गहनतम भावनाओं और संस्कृति के सर्वोच्च आदर्शों को अभिव्यक्ति दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि टैगोर ने समाज को नए विचार, सृजनात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक आत्मविश्वास से समृद्ध किया तथा उन्हें गहरी श्रद्धा और कृतज्ञता के साथ याद किया जाता है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संदेश में कहा कि गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को अत्यंत सशक्त बनाया। उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर को महान साहित्यकार, गहन चिंतक और विलक्षण संगीत प्रतिभा बताते हुए कहा कि गुरुदेव का जीवन, दर्शन और उनके मूल्य आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करते रहेंगे।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि गुरुदेव ने साहित्य, संगीत और दर्शन के माध्यम से स्वतंत्रता की भावना को नई गति प्रदान की। उन्होंने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर की कालजयी कृति 'गीतांजलि' ने मानवता, अध्यात्म और संवेदनशीलता को नई दिशा दी, जबकि 'जन गण मन' ने राष्ट्रीय एकता, गरिमा और स्वाभिमान को स्वर प्रदान किया।

रवींद्रनाथ टैगोर की 165वीं जयंती के अवसर पर देश और दुनिया में आयोजित हो रहे इन कार्यक्रमों के बीच राष्ट्र के शीर्ष नेतृत्व ने भी गुरुदेव के साहित्य, विचार और सांस्कृतिक योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

Pratahkal Newsroom

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