अजीब सवाल पर Premananda Maharaj का गूढ़ जवाब; सोशल मीडिया पर चर्चा तेज
प्रेमानंद महाराज से एक भक्त ने “भूतों का राजा बनने” की इच्छा जताई, जिस पर महाराज ने मुस्कराते हुए भक्ति और नाम-जप का मार्ग बताया। उन्होंने राम नाम, बजरंग बली और कर्म सिद्धांत के जरिए भय, भूत-प्रेत और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति का शास्त्रीय समाधान समझाया।

Premanand Maharaj teachings : आध्यात्मिक जगत में अपने सहज, तर्कपूर्ण और शास्त्रसम्मत विचारों के लिए पहचाने जाने वाले प्रेमानंद महाराज एक बार फिर चर्चा में हैं। भक्तों की जटिल समस्याओं और मन की दुविधाओं को सरल भाषा में सुलझाने की उनकी शैली के कारण देश-विदेश से लोग मार्गदर्शन के लिए उनके पास पहुंचते हैं। हाल ही में उनसे किया गया एक असामान्य प्रश्न सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया।
“मुझे भूतों का राजा बनना है”—सवाल सुन मुस्कराए महाराज :
एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से कहा कि उसकी मां को भूत-प्रेत परेशान कर रहे हैं, इसलिए वह “भूतों का राजा” बनकर उन पर शासन करना चाहता है। यह सुनकर प्रेमानंद महाराज मुस्कराए और बिना किसी भय या अंधविश्वास को बढ़ावा दिए, बेहद सरल शब्दों में उत्तर दिया।
भूतों का राजा नहीं, भक्ति का मार्ग :
प्रेमानंद महाराज ने स्पष्ट किया कि भूतों के राजा कोई शैतान नहीं, बल्कि भूतेश्वर भगवान शंकर हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य को नकारात्मक शक्तियों पर शासन करने की इच्छा नहीं, बल्कि देवत्व और सद्गुणों की ओर बढ़ना चाहिए।
महाराज के अनुसार, जीवन की हर समस्या का मूल समाधान भगवत नाम-जप में निहित है।
उन्होंने बताया—
- भय, भूत और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा के लिए बजरंग बली का नाम-जप प्रभावी है।
- “भूत पिशाच निकट नहीं आवे, महावीर जब नाम सुनावे”—इस चौपाई का उल्लेख करते हुए महाराज ने कहा कि हनुमान जी के नाम मात्र से नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं।
- राम नाम और राधा-राधा का निरंतर जप भय को समाप्त करता है और मन को स्थिर करता है।
अदृश्य शक्तियों से साक्षात्कार का अनुभव :
प्रेमानंद महाराज ने अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि गंगा तट पर भ्रमण और श्मशान में साधना के दौरान उनका कई बार अदृश्य शक्तियों से सामना हुआ, लेकिन उन्हें कभी कोई क्षति नहीं पहुंची। उनके अनुसार, ईश्वर में अटूट विश्वास और नाम-स्मरण ही सबसे बड़ा कवच है।
भूत-प्रेत किसे परेशान करते हैं ?
महाराज ने शास्त्रीय दृष्टिकोण से समझाते हुए कहा कि 84 लाख योनियों में भूत-प्रेत योनि भी शामिल है, लेकिन वे हर व्यक्ति को कष्ट नहीं देते।
उनके अनुसार—
- भूत-प्रेत उन्हीं लोगों को प्रभावित करते हैं जिनके कर्म दुर्बल होते हैं।
- कई बार प्रेत, ईश्वरीय संकेत पर, व्यक्ति को उसके कर्मों का बोध कराने के लिए कष्ट का कारण बनते हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
