मुंबई, जून 2026: डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की गंभीर बीमारियों जैसी स्वास्थ्य समस्याएँ आज देश के लाखों भारतीयों की जिंदगी का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुकी हैं। इन पुरानी और गंभीर बीमारियों के उपचार में मरीजों को बेहद लंबे समय तक निरंतर दवाएँ लेनी पड़ती हैं, जिसके परिणामस्वरूप हर महीने हजारों रुपए का भारी-भरकम खर्च आता है। कई बार चिकित्सा पर होने वाला यही अत्यधिक खर्च आम परिवारों के मासिक बजट पर बेहद भारी पड़ता है और उन्हें आर्थिक संकट में डाल देता है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में, मरीजों को किफायती दवाएँ उपलब्ध कराने वाले अग्रणी प्लेटफॉर्म प्लैटिनमआरएक्स ने एक बहुत बड़ी और अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने अब तक 10 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं यानी मरीजों का आँकड़ा सफलतापूर्वक पार कर लिया है और यह ठोस दावा किया है कि उसके माध्यम से मरीज अब तक अपनी आवश्यक दवाओं पर 128 करोड़ रुपए से ज्यादा की बड़ी बचत कर चुके हैं।

प्लैटिनमआरएक्स के को-फाउंडर आशुतोष पांडे ने इस शानदार सफलता पर आधिकारिक वक्तव्य देते हुए कहा कि 128 करोड़ रुपए की यह ऐतिहासिक बचत सिर्फ एक साधारण आँकड़ा मात्र नहीं है, बल्कि यह वह गाढ़ी कमाई का पैसा है, जो अब प्रभावित परिवार अपने बच्चों की उच्च शिक्षा, घर के राशन और दूसरी अन्य बेहद जरूरी आवश्यकताओं पर सुगमता से खर्च कर पा रहे हैं।

तकनीकी और व्यावहारिक कार्यप्रणाली के स्तर पर प्लैटिनमआरएक्स मरीजों को महँगी ब्रांडेड दवाओं के स्थान पर उनके सटीक और सुरक्षित ब्रांडेड जेनेरिक दवाओं के विकल्प उपलब्ध कराता है। कंपनी द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इन जेनेरिक दवाओं में हुबहू वही सॉल्ट्स और रासायनिक घटक होते हैं, जो अत्यंत महँगी ब्रांडेड दवाओं में मुख्य रूप से इस्तेमाल किए जाते हैं। इस पारदर्शी व्यवस्था से मरीज बिना किसी भी प्रकार की चिकित्सीय गुणवत्ता से समझौता किए अपने मासिक दवा खर्च में 50 से 60 प्रतिशत तक की एक बहुत बड़ी बचत प्रत्यक्ष रूप से कर पा रहे हैं। वर्तमान में कंपनी की ये जीवनरक्षक सेवाएँ देश के 20 हजार से अधिक पिनकोड तक अपनी मजबूत पहुंच स्थापित कर चुकी हैं और देश के कई प्रमुख शहरों में दवाओं की सुरक्षित डिलीवरी मात्र एक दिन के भीतर सुनिश्चित की जा रही है।

कंपनी का प्रामाणिक तौर पर कहना है कि पुरानी और दीर्घकालिक बीमारियों से निरंतर जूझ रहे मरीज इस प्लेटफॉर्म की मदद से औसतन हर महीने करीब 1,500 रुपए तक की नकद बचत कर रहे हैं। यही मुख्य वजह है कि भारतीय स्वास्थ्य बाजार में ब्रांडेड जेनेरिक दवाओं को अपनाने का चलन अब बेहद तेजी से बढ़ रहा है और देश के अधिक से अधिक लोग सजग होकर इस किफायती व सुलभ इलाज की ओर अपने कदम बढ़ा रहे हैं, जो आने वाले समय में स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़े और सकारात्मक बदलाव का स्पष्ट संकेत है।

Pratahkal Newsroom

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