नारायणपुर में जल संकट के बीच सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग: तोते को बचाने के लिए बहाया हजारों लीटर पानी

नारायणपुर। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले से एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है जिसने न केवल प्रशासनिक नैतिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि भीषण गर्मी में जल संकट झेल रही जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। एक रसूखदार सरकारी अधिकारी के पालतू तोते को पेड़ से नीचे उतारने के लिए जिले की फायर ब्रिगेड की टीम को तैनात किया गया और इस पूरी प्रक्रिया में हजारों लीटर बेशकीमती पानी सड़क पर बहा दिया गया। यह घटना उस क्षेत्र की है जहां ग्रामीण और शहरी आबादी गर्मी के शुरुआती दिनों में ही पेयजल की भारी किल्लत से जूझ रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना नारायणपुर स्थित ओबीसी (OBC) बॉयज हॉस्टल के समीप घटित हुई। बताया जा रहा है कि एक अज्ञात सरकारी अधिकारी का पालतू तोता पिंजरे से उड़कर सड़क किनारे स्थित एक ऊंचे पेड़ की फुनगी पर जा बैठा। तोते को नीचे बुलाने के तमाम प्रयास जब विफल रहे, तो कथित तौर पर दबाव के चलते दमकल विभाग की एक गाड़ी को मौके पर बुलाया गया। फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने तोते को डराने या उसे नीचे उतारने के लिए प्रेशर पाइप से पानी की बौछारें मारनी शुरू कर दीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, काफी ऊंचाई पर बैठे पक्षी को नीचे लाने की इस कवायद में फायर टेंडर का एक बड़ा हिस्सा खाली कर दिया गया।

नारायणपुर जिला वर्तमान में उन क्षेत्रों की सूची में शामिल है जहां भूजल स्तर गिरने के कारण पानी की राशनिंग जैसी नौबत आ गई है। ऐसे संवेदनशील समय में एक पक्षी के लिए पानी की ऐसी बर्बादी ने स्थानीय नागरिकों में गहरा असंतोष पैदा कर दिया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि यही तोता किसी आम नागरिक का होता, तो क्या दमकल विभाग इसी सक्रियता के साथ पहुंचता? दमकल विभाग की प्राथमिकताएं आग बुझाने और आपातकालीन बचाव कार्यों के लिए निर्धारित होती हैं, लेकिन इस मामले में विभाग किसी विशिष्ट व्यक्ति की निजी सेवा में लगा नजर आया।

विधिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से, सरकारी संसाधनों का निजी कार्यों के लिए उपयोग करना सेवा नियमावली का उल्लंघन माना जाता है। हालांकि, दमकल विभाग और जिला प्रशासन ने अभी तक उस अधिकारी के नाम का खुलासा नहीं किया है जिसके कहने पर यह पूरी कार्रवाई की गई। विभाग की ओर से इस मामले पर चुप्पी साधी गई है, जिससे जनता का आक्रोश और बढ़ गया है। नियमानुसार, दमकल सेवाओं का उपयोग केवल अनिवार्य आपदा स्थितियों में ही किया जाना चाहिए, न कि पालतू जानवरों को पकड़ने के लिए पानी बर्बाद करने में।

इस घटना ने एक बार फिर प्रशासनिक जवाबदेही और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की बहस को जन्म दे दिया है। एक ओर जहां छत्तीसगढ़ के कई जिलों में जल संरक्षण के लिए बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नारायणपुर जैसी घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि व्यवस्था में रसूख आज भी सिद्धांतों पर भारी पड़ता है। यदि भविष्य में पानी की इस तरह की बर्बादी पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो आने वाले महीनों में जल संकट की स्थिति और भी विकराल रूप ले सकती है। प्रशासन को इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग रोका जा सके।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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