'मनसे स्टाइल' सबक: राज और उद्धव ठाकरे पर अभद्र टिप्पणी करने वाले युवक की नालासोपारा में निकाली धिंड
महाराष्ट्र के नालासोपारा में राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे पर अभद्र टिप्पणी करने वाले युवक को मनसे कार्यकर्ताओं ने 'मनसे स्टाइल' में सिखाया सबक। युवक की जमकर पिटाई के बाद अर्धनग्न हालत में दीड किलोमीटर तक निकाली गई धिंड। सोशल मीडिया पर सनसनी फैलाने और नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल करने वालों को कड़ा संदेश। जानिए क्या है पूरा मामला और क्या कहता है कानून।

Abuse against Raj and Uddhav Thackeray : सोशल मीडिया पर 'व्यूज' की भूख और सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का जुनून कभी-कभी कितना भारी पड़ सकता है, इसकी एक भयावह बानगी नालासोपारा में देखने को मिली है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे और शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे के खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग करने वाले एक युवक को मनसे कार्यकर्ताओं ने 'कानूनी प्रक्रिया' के बजाय अपने चिर-परिचित 'मनसे स्टाइल' में सबक सिखाया। इस घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की मर्यादा और राजनीतिक प्रतिशोध के बीच की बहस को हवा दे दी है।
घटना का विवरण: पिटाई के बाद दीड किलोमीटर तक परेड
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब नालासोपारा के एक युवक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में उसने महाराष्ट्र के दो कद्दावर नेताओं—राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे—के खिलाफ अपमानजनक और अश्लील टिप्पणी की थी।
- आक्रोश का विस्फोट: वीडियो वायरल होते ही मनसे कार्यकर्ता हरकत में आ गए। उन्होंने तकनीकी सुरागों के आधार पर युवक का पता लगाया और उसके ठिकाने पर धावा बोल दिया।
- सड़क पर न्याय: कार्यकर्ताओं ने न केवल युवक की जमकर धुनाई की, बल्कि उसे अर्धनग्न अवस्था में सड़क पर उतारा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आक्रोशित कार्यकर्ताओं ने उसे करीब दीड किलोमीटर तक पैदल चलाकर उसकी 'धिंड' (सार्वजनिक अपमान परेड) निकाली।
- सोशल मीडिया पर लाइव: इस पूरी घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ, जिसमें युवक हाथ जोड़कर माफी मांगते हुए नजर आ रहा है।
कानूनी और राजनीतिक निहितार्थ :
हालांकि इस मामले में अभी तक किसी औपचारिक एफआईआर (FIR) की विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन कानून विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह कानून को अपने हाथ में लेना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। दूसरी ओर, राजनीतिक हलकों में इस घटना को 'चेतावनी' के रूप में देखा जा रहा है। मनसे कार्यकर्ताओं का तर्क है कि वैचारिक मतभेद स्वीकार्य हैं, लेकिन व्यक्तिगत रूप से अपमानजनक भाषा का प्रयोग महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति के खिलाफ है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
