नई दिल्ली, 22 मई 2026: आशा आरोग्य सेविकाओं के प्रेरक जीवन और उनके अमूल्य योगदान पर आधारित, दीपक पाटिल द्वारा निर्देशित मराठी फिल्म 'आशा' को प्रतिष्ठित 18वें इंडिया हैबिटेट फिल्म फेस्टिवल में दर्शकों की ओर से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित इस फिल्म के विशेष प्रदर्शन के दौरान सभागार दर्शकों से खचाखच भरा हुआ था। फिल्म की संवेदनशील प्रस्तुति और इसके सशक्त सामाजिक संदेश ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया।

'आशा' फिल्म ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत आशा आरोग्य सेविकाओं के अथक प्रयासों पर आधारित है। यह फिल्म जन जागरूकता, स्वास्थ्य सेवा और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से मातृ मृत्यु दर को कम करने में उनके महत्वपूर्ण योगदान को प्रभावी ढंग से चित्रित करती है। सिनेमा के माध्यम से न केवल इन अग्रिम पंक्ति की स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के सामने आने वाली चुनौतियों को दर्शाया गया है, बल्कि माता और शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के प्रति उनके अटूट समर्पण को भी रेखांकित किया गया है।





फिल्म की यथार्थवादी कथा शैली, प्रभावशाली अभिनय और जमीनी स्तर के स्वास्थ्य उपक्रमों पर केंद्रित संदेश को दर्शकों ने खूब सराहा। प्रदर्शन के उपरांत फिल्म की निर्माता दैवता पाटिल ने दर्शकों के साथ संवाद किया, जहाँ उन्होंने फिल्म निर्माण की यात्रा और आशा सेविकाओं के जीवन को यथार्थवादी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए किए गए शोध के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उपस्थित दर्शकों ने इस फिल्म की सराहना करते हुए कहा कि इसने भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने वाली इन सेविकाओं के उपेक्षित योगदान पर अत्यंत आवश्यक प्रकाश डाला है।

इस अवसर पर फेस्टिवल के निदेशक डॉ. के. जी. सुरेश ने कहा कि 'आशा' फिल्म इन स्वास्थ्य सेविकाओं के असाधारण कार्यों को उजागर करने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण कृति है। यह फिल्म न केवल एक मानवीय संवेदनाओं से भरी कहानी बयां करती है, बल्कि जमीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं द्वारा लाए गए सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी दस्तावेजीकरण भी है। उन्होंने कहा कि दर्शकों को फिल्म से इतनी गहराई से भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ देखकर उन्हें अत्यंत खुशी हो रही है।

फिल्म की निर्माता दैवता पाटिल ने अपने विचार रखते हुए कहा कि यह फिल्म उन आशा सेविकाओं के साहस और समर्पण को समर्पित है, जो अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी मां और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए निरंतर परिश्रम करती हैं। उन्होंने बताया कि फेस्टिवल में मिली दर्शकों की प्रतिक्रिया अत्यंत उत्साहजनक रही और संवाद सत्रों से स्पष्ट हुआ कि दर्शक फिल्म में निहित भावनात्मक और सामाजिक यथार्थ से कितनी गहराई से जुड़ पाए हैं। इंडिया हैबिटेट फिल्म फेस्टिवल में फिल्म 'आशा' के प्रदर्शन ने एक बार फिर सामाजिक चेतना जगाने वाली और सार्थक संदेश देने वाली फिल्मों के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया है।

Pratahkal HQ

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