कोलकाता दुर्गा पूजा: प्रतिमाओं की ऊंचाई पर प्रशासन की सख्ती लागू
रेलवे की सुरक्षा और बिजली तारों के मद्देनजर विसर्जन घाटों के लिए 11 फीट की ऊंचाई का मानक अनिवार्य किया गया है।

तस्वीर में कोलकाता में दुर्गा पूजा के दौरान स्थापित की जाने वाली देवी दुर्गा की बड़ी और छोटी प्रतिमाएं दिखाई दे रही हैं। यह तस्वीर काल्पनिक है और एआई द्वारा केवल संदर्भ के लिए बनाई गई है।
कोलकाता में इस वर्ष दुर्गा पूजा के दौरान प्रतिमाओं की ऊंचाई को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। हालांकि यह चर्चा आम है कि क्या इस साल शहर में भव्य और ऊंची दुर्गा प्रतिमाएं देखने को नहीं मिलेंगी, लेकिन वास्तविकता यह है कि यह प्रतिबंध केवल बागबाजार से ग्वालियर घाट के बीच विसर्जन करने वाली समितियों के लिए है। दशकों पुराना यह नियम, जिसका अतीत में अक्सर उल्लंघन होता रहा है, अब पूरी तरह से लागू किया जा रहा है। सरकारी परामर्श और कोलकाता पुलिस के निर्देशानुसार, यदि आयोजक अपनी प्रतिमाओं का विसर्जन इन विशिष्ट घाटों पर करने की योजना बना रहे हैं, तो उनकी ऊंचाई अधिकतम 10 से 11 फीट तक ही होनी चाहिए।
कुमरटोली मृत्शिल्प संस्कृति समिति के सचिव बाबू पाल ने इस निर्णय के पीछे के तकनीकी कारणों को स्पष्ट करते हुए बताया कि रेलवे की ओवरहेड बिजली की तारें सड़क से लगभग 17.6 फीट की ऊंचाई पर हैं, जबकि इलाके में कुछ रेलवे क्रॉसिंग पर लोहे की क्रॉसबार की निकासी 17 फीट से कम है। ऐसे में 11 फीट की ऊंचाई का मानक किसी भी अप्रिय दुर्घटना को रोकने के लिए निर्धारित किया गया है। कुमरटोली सार्वजनिक दुर्गोत्सव के संयोजक देबाशीष भट्टाचार्य का कहना है कि यह नियम हमेशा से अस्तित्व में था, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार समर्थित कुछ चुनिंदा आयोजक ही इसका पालन नहीं करते थे। उन्होंने जोर दिया कि सुरक्षा सर्वोपरि है और वे भविष्य में भी इन नियमों का पालन करना जारी रखेंगे।
वर्ष 2015 में देशप्रिया पार्क की 88 फीट ऊंची प्रतिमा ने रिकॉर्ड तो बनाया था, लेकिन भारी भीड़ के कारण कोलकाता पुलिस को सार्वजनिक प्रवेश बंद करना पड़ा था, जिससे यातायात ठप हो गया और कई लोग घायल भी हुए थे। नए नियम के तहत ऐसी प्रतिमाओं पर प्रतिबंध नहीं है, बल्कि यह स्पष्ट किया गया है कि उनका विसर्जन इन विशिष्ट घाटों पर नहीं किया जा सकता। सुरक्षा के अलावा, पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (WBPCB) के पर्यावरणीय दिशानिर्देशों का पालन करना भी अनिवार्य है। आयोजकों को थर्माकोल की सजावट और पीवीसी बैनरों के उपयोग से बचने तथा नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए फूल व पूजन सामग्री को निर्धारित कूड़ेदानों में विसर्जित करने का निर्देश दिया गया है।
मूर्ति कलाकार सुजीत पाल और चीन पाल ने बताया कि पहले प्रभावशाली राजनेताओं के समर्थन के कारण नियम अक्सर अनसुने कर दिए जाते थे, लेकिन अब प्रशासन की सख्ती से उम्मीद है कि सभी इसका पालन करेंगे। चीन पाल ने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एंटाली संघ की एक प्रतिमा पहले ही 11 फीट से अधिक बन चुकी है, जिसके लिए आयोजकों को अब दूसरे घाट का विकल्प चुनना होगा। हरा पार्क दुर्गोत्सव के महासचिव सायन देब चटर्जी ने कहा कि पिछले वर्ष उनकी प्रतिमा 22 फीट थी, जिसे फायर ब्रिगेड की मदद से पंडाल के भीतर ही विसर्जित किया गया था। इस वर्ष वे अग्निशमन मंत्री से संपर्क करेंगे, अन्यथा नए निर्देश का पूर्ण पालन सुनिश्चित करेंगे। संतोषपुर लेक पल्ली के कार्यकारी सदस्य सोमनाथ दास ने भी स्पष्ट किया कि पहले 20 फीट तक की प्रतिमाएं बनाने वाले वे अब सुरक्षा के मद्देनजर 11 फीट की सीमा का पालन करेंगे। मूर्तिकार कौशिक घोष ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे विसर्जन की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और सुगम हो जाएगी।

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