केरल लॉटरी टिकट बिक्री घटी: प्रवासी मजदूरों के पलायन से उद्योग संकट में
प्रवासी श्रमिकों की घर वापसी और छोटे पुरस्कारों की राशि में कटौती के कारण केरल में दैनिक लॉटरी टिकटों की बिक्री में 10 लाख तक की भारी गिरावट आई है।

केरल में प्रवासी श्रमिकों की अपने गृह राज्यों की ओर वापसी ने न केवल निर्माण (कंसट्रक्शन) और आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी) क्षेत्रों को गहरा झटका दिया है, बल्कि राज्य के प्रसिद्ध लॉटरी उद्योग की कमर भी तोड़ दी है। प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, राज्य में दैनिक लॉटरी टिकटों की बिक्री में अनुमानित 5 लाख से लेकर 10 लाख टिकटों तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। स्थानीय व्यापारियों का स्पष्ट कहना है कि हाल ही में पुरस्कार राशि के भुगतानों में की गई कटौतियों ने इस मंदी की स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है।
लॉटरी टिकटों की बिक्री में यह भारी गिरावट पिछले दो महीनों के दौरान बेहद गंभीर रूप में सामने आई है। इससे पहले, राज्य में प्रतिदिन लगभग 1.08 करोड़ लॉटरी टिकट बेचे जाते थे और स्थिति यह थी कि छपे हुए टिकटों का पूरा स्टॉक पूरी तरह बिक जाता था। लॉटरी विक्रेताओं ने इस तथ्य को विशेष रूप से रेखांकित किया है कि देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रवासी श्रमिक इन टिकटों के सबसे बड़े और उत्साही खरीदारों में शामिल थे। ये श्रमिक अक्सर तीन या चार के समूहों में आते थे और प्रत्येक समूह चार से पांच टिकट खरीदता था। इतना ही नहीं, इनमें से कई खरीदार एक ही नंबर श्रृंखला (सीरीज) के टिकटों को एक साथ खरीदना अधिक पसंद करते थे।
मई और जून महीने के बिक्री आंकड़े इस गिरावट की प्रत्यक्ष गवाही दे रहे हैं। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 24 मई को 'समृद्धि' लॉटरी के 618625 टिकट बिके, 25 मई को 'भाग्यतारा' के 725525, 26 मई को 'स्त्री शक्ति' के 703200, 27 मई को 'धनलक्ष्मी' के 716200, 28 मई को 'कारुण्या प्लस' के 1014475 और 29 मई को 'सुवर्ण केरलम' के 895950 टिकटों की बिक्री हुई। इसके बाद, 31 मई को 'समृद्धि' की बिक्री बढ़कर 1088300 हुई, लेकिन जून की शुरुआत होते ही यह ग्राफ तेजी से नीचे गिरा। 1 जून को 'भाग्यतारा' के 865800, 2 जून को 'स्त्री शक्ति' के 662200 और 3 जून को 'धनलक्ष्मी' के मात्र 587425 टिकट ही बिक सके।
इस गिरावट के बीच अब इस पूरे क्षेत्र में भविष्य को लेकर गहरा डर और आशंकाएं व्याप्त हो गई हैं। लॉटरी व्यवसाय से जुड़े लोगों को डर है कि आने वाले समय में टिकटों की बिक्री में और भी अधिक गिरावट आ सकती है, जिससे दैनिक गिरावट का यह आंकड़ा 15 लाख टिकटों तक पहुंच सकता है। इस मंदी के पीछे नीतिगत सुधारों को भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। 2 मई 2025 को लागू किए गए नए सुधारों के तहत लॉटरी टिकटों की कीमतों में बढ़ोतरी की गई थी और ₹5,000 से कम के छोटे पुरस्कारों की राशि में महत्वपूर्ण कटौती कर दी गई थी। हालांकि, सरकार द्वारा प्रथम पुरस्कार को ₹60-80 लाख से बढ़ाकर सीधे 1 करोड़ रुपये किए जाने के कारण शुरुआती दिनों में बिक्री पर इसका कोई खास असर नहीं दिखा था, लेकिन अब विक्रेता साफ कह रहे हैं कि छोटे पुरस्कारों में की गई इस कटौती ने जमीनी स्तर पर मांग को गंभीर रूप से प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
केरल का यह लॉटरी क्षेत्र राज्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखता है। वर्तमान में यह पूरा उद्योग पूरे राज्य में लगभग 2 लाख छोटे विक्रेताओं, 20,000 उप-एजेंटों (सब-एजेंट्स) और 10,000 मुख्य एजेंटों की आजीविका को सीधा सहारा देता है। ऐसे में प्रवासी मजदूरों के पलायन और पुरस्कार नियमों में बदलाव से उपजा यह संकट केवल एक उद्योग की मंदी नहीं है, बल्कि यह राज्य के लाखों परिवारों के आर्थिक भविष्य पर मंडराता एक बड़ा खतरा बन गया है, जिसकी गूंज आने वाले दिनों में और गहरी हो सकती है।

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