केरल: एटीएम में छूटा डेबिट कार्ड लौटाने के लिए कर्मचारी ने तय की लंबी दूरी
केरल के एक तटीय कस्बे में एक DHL कर्मचारी ने ईमानदारी की मिसाल पेश की, यात्री को उसका एटीएम कार्ड लौटाने के लिए ऑटो से छह घंटे का सफर तय किया।

तस्वीर में एक यात्री और DHL कर्मचारी कृष्णा दिखाई दे रहे हैं, जो एक ऑटो रिक्शा में बैठे हैं।
केरल के एक छोटे से तटीय कस्बे से मानवता और ईमानदारी की एक ऐसी दास्तां सामने आई है, जिसने सोशल मीडिया पर सभी का दिल जीत लिया है। एक यात्री का डेबिट कार्ड एटीएम में छूट गया था, जिसे एक DHL कर्मचारी ने अपने अवकाश के दिन लंबी यात्रा कर उसे सुरक्षित लौटाया। यात्री अपनी सोलो ट्रिप पर था और उसे अपनी गलती का अहसास राजधानी पहुंचने के बाद हुआ, जो उस स्थान से करीब पांच घंटे की दूरी पर स्थित थी।
घटना की शुरुआत उस समय हुई जब यात्री ने अमेरिका के लिए एक पार्सल भेजने हेतु DHL कार्यालय का रुख किया। इस दौरान उसने DHL कर्मचारी से अपना फोन नंबर साझा किया, क्योंकि भारत में अधिकांश लेनदेन व्हाट्सएप के माध्यम से संचालित होते हैं। डेबिट कार्ड एटीएम से पैसे निकालने के बाद मशीन में ही रह गया था। यात्री ने बताया कि उस समय गर्मी अत्यधिक थी और पिछली रात उसने कुछ ड्रिंक्स भी ली थीं, जिसके कारण कार्ड वहां छूट गया। कार्ड खोने का पता चलने पर यात्री ने उस DHL कर्मचारी को फोन किया। करीब चौबीस घंटे बाद, कर्मचारी ने वह डेबिट कार्ड एटीएम मशीन के ऊपर रखा हुआ पाया।
इस स्थिति में समस्या यह थी कि यात्री को 36 घंटों के भीतर भारत से प्रस्थान करना था और रविवार होने के कारण कार्ड को कूरियर के जरिए भेजना संभव नहीं था। तब रात के समय उस कर्मचारी ने यात्री को कॉल कर बाहर आने के लिए कहा। कर्मचारी ने अपने दो मित्रों के साथ एक ऑटो रिक्शा में छह घंटे का कठिन सफर तय किया और अपनी छुट्टी होने के बावजूद व्यक्तिगत रूप से कार्ड लौटाया। यह कुल चौदह घंटे की लंबी यात्रा थी। जब यात्री ने कृतज्ञता स्वरूप उन्हें कुछ पैसे देने की पेशकश की, तो कर्मचारी ने विनम्रता से उसे लेने से मना कर दिया। उसने कहा कि वह जानता है कि यात्री बजट पर यात्रा कर रहा है, इसलिए उसे उन पैसों की आवश्यकता अधिक है। यात्री ने इस पूरी घटना का विवरण साझा करते हुए बताया कि उस समर्पित कर्मचारी का नाम कृष्णा है।
इस घटना के सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। उपयोगकर्ताओं ने इस नेक काम की जमकर प्रशंसा की। एक व्यक्ति ने टिप्पणी की कि भारतीय लोग वास्तव में बहुत दयालु होते हैं, जबकि दूसरे ने लिखा कि भारत एक सुंदर स्थान है। एक अन्य ने अपनी शुभकामना देते हुए कहा कि उस कर्मचारी की यह दयालुता उसे वापस मिले। यह वाकया न केवल एक खोई हुई वस्तु की वापसी की कहानी है, बल्कि यह उस मानवीय मूल्यों और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक है, जो किसी भी तकनीकी सहायता से कहीं अधिक मूल्यवान है।

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