रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने केदारनाथ धाम यात्रा मार्ग पर स्वच्छता सुनिश्चित करने के लिए बेलिंग मशीन और एमआरएफ केंद्र जैसी आधुनिक प्रणालियां स्थापित की हैं।

Kedarnath Swachh Bharat Abhiyan 2026 : हिमालय की गोद में स्थित बाबा केदार के पावन धाम में इस बार आस्था के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की एक नई इबारत लिखी जा रही है। श्री केदारनाथ धाम की तीर्थयात्रा को स्वच्छ, हरित और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ बनाने के संकल्प के साथ रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन ने अपनी स्वच्छता मुहिम को युद्ध स्तर पर तेज कर दिया है। ट्रेकिंग मार्ग से लेकर मंदिर के मुख्य प्रांगण तक, कचरा प्रबंधन की ऐसी आधुनिक प्रणालियाँ स्थापित की गई हैं, जो न केवल देवभूमि की पवित्रता को सुरक्षित रख रही हैं, बल्कि कचरे को आय के स्रोत में बदलकर एक अभिनव व्यावसायिक मॉडल भी पेश कर रही हैं।

इस महत्वपूर्ण पहल का नेतृत्व कर रहे रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा ने बताया कि केदारनाथ नगर पंचायत अब सूखे कचरे के निपटान के लिए अत्याधुनिक बेलिंग मशीनों का उपयोग कर रही है। ये मशीनें भारी मात्रा में बिखरे रहने वाले कचरे को दबाकर ठोस गठ्ठरों (बेल्स) में तब्दील कर देती हैं, जिससे दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर इनका परिवहन अत्यंत सुगम और सुरक्षित हो जाता है। धाम में एक समर्पित ‘मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी’ (एमआरएफ) केंद्र स्थापित किया गया है, जहाँ कचरे के पृथक्करण से लेकर पुनर्चक्रण तक की पूरी प्रक्रिया को वैज्ञानिक ढंग से अंजाम दिया जा रहा है। कार्यकारी अधिकारी नीरज कुकरेती के अनुसार, अब तक लगभग 500 किलोग्राम सूखे कचरे को बेलों में बदला जा चुका है, जिससे प्रशासन को 15,000 से 20,000 रुपए का राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है।

प्रशासनिक स्तर पर जिलाधिकारी ने मंदिर परिसर और पूरे यात्रा मार्ग पर स्वच्छता संबंधी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से भावुक अपील करते हुए कहा है कि केदारनाथ धाम की दिव्यता को बनाए रखने के लिए वे कचरा न फैलाकर और पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं को अपनाकर प्रशासन का सहयोग करें। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है और अब तक 6,60,000 से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। हिमालयी चोटियों पर स्थित यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के इस पवित्र परिपथ का महत्व 8वीं सदी में आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित परंपराओं से जुड़ा है, जिसे आज का आधुनिक प्रबंधन नई संजीवनी दे रहा है।

केदारनाथ में स्वच्छता के प्रति जिला प्रशासन का यह कड़ा रुख और आधुनिक तकनीक का समावेश यह सुनिश्चित कर रहा है कि आने वाले समय में हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुँचाए बिना तीर्थयात्रा का संचालन संभव हो सके। कचरे के निस्तारण की यह सुदृढ़ व्यवस्था न केवल पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से एक बड़ी उपलब्धि है, बल्कि यह देश के अन्य तीर्थस्थलों के लिए भी एक मार्गदर्शक मॉडल के रूप में उभरी है। जैसे-जैसे यात्रा सीजन आगे बढ़ रहा है, देवभूमि की यह 'ग्रीन यात्रा' दुनिया भर के श्रद्धालुओं को एक अधिक गहरा, स्वच्छ और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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