Layers of Earth : इंसान ने चंद्रमा पर कदम रख दिया, मंगल पर बस्तियां बसाने की तैयारी कर ली और सुदूर अंतरिक्ष में झांकने के लिए शक्तिशाली टेलिस्कोप तैनात कर दिए। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिस धरती पर हम रहते हैं, उसके भीतर झांकना आज भी विज्ञान की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। 'क्या पृथ्वी के आर-पार छेद किया जा सकता है?'—यह सवाल सदियों से वैज्ञानिकों को उकसाता रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि हम अपनी ही जमीन की त्वचा को खुरचने तक में अब तक नाकाम रहे हैं।

धरती की आंतरिक संरचना: आग का एक अथाह समंदर पृथ्वी के केंद्र तक की यात्रा किसी भी डरावनी कल्पना से परे है। वैज्ञानिकों ने पृथ्वी को पांच जटिल परतों में विभाजित किया है, जिनमें से प्रत्येक परत अपने आप में एक अलग दुनिया है:

  • क्रस्ट (Crust): यह सबसे ऊपरी परत है जहाँ हम रहते हैं। इसकी औसत मोटाई लगभग 64 किलोमीटर है।
  • अपर मेंटल (Upper Mantle): 350 किमी तक फैली इस परत में चट्टानें इतनी गर्म हैं कि वे लावा बनकर ज्वालामुखी के जरिए बाहर आती हैं।
  • लॉअर मेंटल (Lower Mantle): 2,900 किमी तक फैले इस हिस्से में अत्यधिक दबाव और गर्मी के कारण पत्थर 'प्लास्टिक' जैसी स्थिति में रहते हैं।
  • आउटर कोर (Outer Core): 2,200 किमी मोटा यह हिस्सा पिघले हुए लोहे और निकल का उबलता हुआ सागर है, जो पृथ्वी का चुंबकीय कवच बनाता है।
  • इनर कोर (Inner Core): केंद्र में स्थित 1,200 किमी मोटा यह ठोस गोला 5,500 डिग्री सेल्सियस गर्म है—जो लगभग सूर्य की सतह के तापमान के बराबर है।

कोला सुपरडीप बोरहोल: जब इंसान के हौसले पस्त हो गए इतिहास में इंसान ने सबसे गहराई तक जाने की कोशिश रूस में 'कोला सुपरडीप बोरहोल' के जरिए की थी। दशकों की मेहनत के बाद वैज्ञानिक केवल 12.2 किलोमीटर की गहराई तक ही पहुंच सके। यह दूरी पृथ्वी के केंद्र (6,371 किमी) का एक प्रतिशत भी नहीं है। 12 किमी के बाद तापमान 180°C तक पहुंच गया, जिससे ड्रिलिंग उपकरण किसी मोमबत्ती की तरह पिघलने लगे। दबाव इतना अधिक था कि चट्टानें किसी तरल की तरह व्यवहार करने लगीं और प्रोजेक्ट को हमेशा के लिए बंद करना पड़ा।

आर-पार छेद करना क्यों है असंभव? पृथ्वी के एक छोर से दूसरे छोर तक सुरंग बनाना वर्तमान तकनीक के लिए नामुमकिन है, जिसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:

  • असहनीय ताप (Heat): गहराई बढ़ने के साथ तापमान मशीनों को नष्ट कर देता है।
  • भीषण दबाव (Pressure): गहराई में गुरुत्वाकर्षण और चट्टानों का भार स्टील जैसी धातुओं को भी कुचल देता है।
  • तरल मैग्मा (Magma): जैसे ही आप छेद करेंगे, नीचे मौजूद पिघला हुआ मैग्मा उस सुराख को तुरंत भर देगा, जिससे ड्रिलिंग जारी रखना असंभव हो जाएगा।






Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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