दुनिया में भारत अव्वल ; सैलरी से सबसे ज़्यादा खुश भारतीय कर्मचारी ?
भारतीय कर्मचारी अपनी सैलरी से सबसे ज़्यादा खुश हैं। पे फेयरनेस सेंटिमेंट में भारत दुनिया में नंबर वन रहा है, जहां सिर्फ़ 11% कर्मचारियों ने वेतन को अनुचित बताया।

दुनिया भर में सैलरी को लेकर कर्मचारियों की सोच में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है और इस बदलाव में भारत सबसे आगे है। एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अब केवल 11 प्रतिशत कर्मचारी ही अपनी सैलरी को अनुचित मानते हैं, यानी ज़्यादातर भारतीय कर्मचारी अपने वेतन से संतुष्ट हैं।
ह्यूमन कैपिटल मैनेजमेंट कंपनी एडीपी (ADP) की रिपोर्ट बताती है कि बीते एक साल में कंपनियों में काम करने वाले उन कर्मचारियों की संख्या घटी है, जिन्हें लगता था कि उन्हें उचित सैलरी नहीं मिल रही। 2024 में यह आंकड़ा 31 प्रतिशत था, जो अब घटकर 27 प्रतिशत रह गया है। यह संकेत देता है कि विश्व स्तर पर भी कंपनियाँ वेतन संरचना में सुधार कर रही हैं और कर्मचारियों की सोच में भरोसा बढ़ा है।
रिपोर्ट में शामिल 34 देशों में भारत का पे फेयरनेस सेंटिमेंट सबसे मजबूत पाया गया। वहीं दक्षिण कोरिया और स्वीडन जैसे देशों में असंतुष्ट कर्मचारियों का प्रतिशत क्रमशः 45 और 39 रहा यानी भारत की तुलना में कहीं अधिक।
दिलचस्प बात यह है कि भारत में पुरुषों की तुलना में महिलाएँ अपनी सैलरी से ज़्यादा संतुष्ट हैं। यह ट्रेंड कई देशों से बिल्कुल उलटा है, क्योंकि 34 में से 15 देशों में महिलाओं को अब भी 30% या उससे अधिक ‘अनफेयर पे’ झेलना पड़ रहा है, जबकि पुरुषों में यह स्थिति केवल पाँच देशों में है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि युवा कर्मचारियों में असंतोष थोड़ा अधिक है। 18 से 26 वर्ष की उम्र वाले 13 प्रतिशत युवाओं को लगता है कि उन्हें उचित वेतन नहीं मिल रहा, जबकि 55 साल से अधिक उम्र वाले कर्मचारियों में यह संख्या घटकर केवल 5 प्रतिशत रह जाती है। इसका मतलब है कि उम्र और अनुभव के साथ वेतन को लेकर संतोष भी बढ़ता जाता है।
एडीपी इंडिया और साउथ ईस्ट एशिया के प्रबंध निदेशक राहुल गोयल ने कहा, “जब कर्मचारियों को सही सैलरी दी जाती है, तो वे न सिर्फ़ प्रेरित रहते हैं, बल्कि अपने काम में बेहतर प्रदर्शन करते हैं और संगठन के प्रति वफादारी भी बढ़ती है। फेयर पे केवल पैसे की बात नहीं, बल्कि भरोसे और सम्मान से जुड़ा मसला है।”
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की यह शीर्ष स्थिति इस बात का संकेत है कि देश में समान वेतन देने की प्रथाओं में सुधार हो रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों को फेयरनेस को सिर्फ़ सैलरी तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे अवसर, विकास और पहचान तक बढ़ाना चाहिए, ताकि कर्मचारियों को लंबे समय तक जोड़े रखा जा सके।
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Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
