आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मुनाफे में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। 30 सितंबर, 2026 को समाप्त तिमाही में बैंक का कर पश्चात लाभ (पीएटी) सालाना आधार पर 196.5 प्रतिशत बढ़कर 1,045 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। बैंक का पीएटी लगातार दूसरी तिमाही में 1,000 करोड़ रुपये के पार रहा। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में बैंक का पीएटी 2,120 करोड़ रुपये रहा, जबकि इस अवधि में परिसंपत्तियों पर प्रतिफल (आरओए) 0.99 प्रतिशत दर्ज किया गया।

बैंक ने 30 सितंबर, 2026 को समाप्त तिमाही और छमाही के अलेखापरीक्षित वित्तीय परिणाम घोषित किए। नतीजों में जमा और ऋण में वृद्धि, मुख्य परिचालन लाभ में बढ़ोतरी तथा परिसंपत्ति गुणवत्ता स्थिर रहने की जानकारी सामने आई है।

बैंक की कुल जमा राशि सालाना आधार पर 25.9 प्रतिशत और पिछली तिमाही की तुलना में 11.8 प्रतिशत बढ़कर 3,48,583 करोड़ रुपये हो गई। वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में औसत चालू खाता और बचत खाता (सीएएसए) अनुपात 48.4 प्रतिशत रहा। पिछली अवधि के 50.1 प्रतिशत के मुकाबले इसमें मामूली गिरावट आई, जिसकी मुख्य वजह तिमाही के दौरान विदेशी मुद्रा अनिवासी (बैंक) यानी एफसीएनआर (बी) जमा में हुई बड़ी वृद्धि रही।

क्रेडिट सब्स्टीट्यूट्स और एफसीएनआर (बी) जमा के बदले दिए गए ऋण सहित बैंक के कुल ऋण और अग्रिम सालाना आधार पर 30.1 प्रतिशत बढ़कर 3,46,913 करोड़ रुपये हो गए। एफसीएनआर (बी) जमा के बदले दिए गए ऋण को अलग रखने और अंतर-बैंक भागीदारी प्रमाणपत्र (आईबीपीसी) को शामिल करने पर ऋण वृद्धि 22.2 प्रतिशत रही।

बैंक ने लगातार दूसरी तिमाही में परिचालन स्तर पर बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया। इस दौरान खर्चों में वृद्धि, आय में वृद्धि से करीब 500 आधार अंक कम रही। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में अतिरिक्त आय के मुकाबले खर्च का अनुपात 55 प्रतिशत रहा। कारोबार से होने वाले व्यापारिक लाभ को हटाकर गणना करने पर मुख्य लागत-से-आय अनुपात पहली तिमाही के 70.73 प्रतिशत से घटकर दूसरी तिमाही में 70.16 प्रतिशत हो गया।

व्यापारिक लाभ को हटाने के बाद बैंक का मुख्य परिचालन लाभ दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 38.5 प्रतिशत बढ़कर 2,527 करोड़ रुपये रहा। परिसंपत्ति गुणवत्ता के मोर्चे पर सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (जीएनपीए) 1.32 प्रतिशत और शुद्ध गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (नेट एनपीए) 0.40 प्रतिशत रही। औसत परिसंपत्तियों के मुकाबले ऋण लागत घटकर 1.01 प्रतिशत पर आ गई।

वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में बैंक का परिसंपत्तियों पर प्रतिफल (आरओए) 0.93 प्रतिशत रहा, जबकि पहली छमाही के लिए यह आंकड़ा 0.99 प्रतिशत था। दूसरी तिमाही में पीएटी 196.5 प्रतिशत बढ़कर 1,045 करोड़ रुपये पहुंचने के साथ बैंक ने लगातार दूसरी तिमाही में 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर पश्चात लाभ दर्ज किया।

इस तिमाही में बैंक ने 34,390 करोड़ रुपये, यानी करीब 3.6 अरब अमेरिकी डॉलर, के एफसीएनआर (बी) जमा जुटाए। उल्लेखनीय है कि बैंक की भारत के बाहर कोई शाखा, सहायक कंपनी या प्रतिनिधि कार्यालय नहीं है। बैंक के अनुसार, इतने बड़े स्तर पर जमा जुटाना उसकी डिजिटल क्षमता और ग्राहकों के भरोसे को दर्शाता है।

ये जमा मुख्य रूप से तीन से पांच साल की अवधि के हैं, जिससे आने वाले वर्षों में बैंक को लंबे समय तक स्थिर तरलता उपलब्ध होने की उम्मीद है। प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) से मिलने वाले लाभ को शामिल करने पर एफसीएनआर (बी) जमा जुटाने की कुल लागत घरेलू सावधि जमा जुटाने की लागत से करीब एक प्रतिशत कम है।

बैंक के मुताबिक, एफसीएनआर (बी) जमा जुटाने से शुद्ध ब्याज आय (एनआईआई), कर पश्चात लाभ (पीएटी), प्रति शेयर आय (ईपीएस) और इक्विटी पर प्रतिफल (आरओई) को लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इससे शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) का आंकड़ा देखने में कम हुआ है। इसकी वजह एफसीएनआर (बी) जमा के बदले आईबीयू शाखा से दिए गए ऋण के कारण बैंक की बैलेंस शीट में 24,885 करोड़ रुपये की वृद्धि होना है।

इस बीच, एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने पहली बार बैंक को लंबी अवधि के लिए 'बीबीबी-' रेटिंग दी है, जिसे निवेश के दृष्टिकोण से अच्छी मानी जाने वाली श्रेणी में रखा जाता है।

नतीजों पर टिप्पणी करते हुए बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी वी. वैद्यनाथन ने कहा, “वित्त वर्ष 27 की पहली और दूसरी, दोनों तिमाहियों में हमारा पीएटी लगातार दूसरी तिमाही में 1,000 करोड़ रुपये के पार रहा। अब हमें एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स से निवेश के लिहाज से अच्छी मानी जाने वाली रेटिंग भी मिली है। लगातार दूसरी तिमाही में हमारे खर्चों की बढ़ोतरी, आय की बढ़ोतरी से करीब 500 बेसिस पॉइंट कम रही। यह हमारे मजबूत ऑपरेटिंग लेवरेज को दिखाता है। इसके चलते हमारा कॉस्ट-टू-इनकम रेशियो लगातार घट रहा है और हमारा आरओए अब 1% के करीब पहुँच गया है।

“इसके अलावा, 34,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट जुटाना बैंक के लिए एक बड़ी उपलब्धि रही है। इससे हमें 3 से 5 साल तक की स्थिर लिक्विडिटी मिलती है, जो खासकर ब्याज दरें बढ़ने के माहौल में बहुत अहम है। पीएसएल से मिलने वाले लाभ को शामिल करने पर, इन डिपॉजिट की कुल लागत घरेलू बाजार में इसी तरह के डिपॉजिट जुटाने की लागत से करीब 1% कम है। कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही हमारे लिए शानदार रही और हमें उम्मीद है कि हम इस रफ्तार को बनाए रखेंगे।”

वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजों में बढ़ता मुनाफा, जमा और ऋण में विस्तार, मुख्य परिचालन लाभ में वृद्धि तथा एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स से मिली पहली अंतरराष्ट्रीय रेटिंग बैंक के प्रमुख घटनाक्रम रहे। वहीं, एफसीएनआर (बी) जमा के जरिए लंबी अवधि की तरलता जुटाना बैंक की वित्तीय रणनीति का अहम हिस्सा रहा।

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