मध्य प्रदेश के धार जिले में बुधवार को एक ऐसी हृदयविदारक घटना घटी जिसने समूचे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। चिकलिया फाटा के समीप एक अनियंत्रित पिकअप वाहन के पलटने और उसके बाद सामने से आ रही स्कार्पियो से हुई भीषण टक्कर ने 12 जिंदगियों को सदा के लिए शांत कर दिया। यह हादसा उस समय हुआ जब बग्गड क्षेत्र में दिन भर की कड़ी मजदूरी करने के बाद लगभग 35 मजदूर अपने घर की ओर लौट रहे थे। शाम के समय हुई इस दुर्घटना ने न केवल दर्जनों परिवारों को कभी न भरने वाले जख्म दिए हैं, बल्कि सड़क सुरक्षा और ओवरलोडिंग जैसे गंभीर विषयों पर भी एक बार फिर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिकअप वाहन पलटने के बाद स्कार्पियो से इतनी तेजी से टकराया कि मौके पर ही चीख-पुकार मच गई। पिकअप में सवार मजदूर एक-दूसरे के ऊपर जा गिरे और कई वाहन के नीचे दब गए। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया, लेकिन टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि 12 लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। सूचना मिलते ही तिरला पुलिस और जिला प्रशासन के आला अधिकारी दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। प्रभारी कलेक्टर अभिषेक चौधरी और डीआईजी मयंक अवस्थी ने घटनास्थल का मुआयना किया और बचाव कार्यों की व्यक्तिगत रूप से निगरानी की।

अस्पताल प्रशासन की ओर से प्राप्त जानकारी के मुताबिक कुल 35 लोगों को अस्पताल लाया गया था। डॉक्टर छत्रपाल सिंह ने पुष्टि की कि 12 व्यक्तियों को मृत अवस्था में लाया गया था, जबकि 13 से 15 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों की नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए इंदौर रेफर कर दिया गया है। मृतकों में तिरला क्षेत्र के सेमलिया, नयापुरा, जलोखिया और सुलतानपुर गांव के निवासी शामिल हैं। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती कई मृतकों की शिनाख्त करना है, जिसके लिए उनके परिजनों से संपर्क साधने की कोशिश की जा रही है।

कानूनी प्रक्रिया के तहत तिरला पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती जांच में वाहन की तेज रफ्तार और क्षमता से अधिक सवारियों का होना हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या स्कार्पियो चालक की ओर से भी कोई लापरवाही हुई थी। जिला प्रशासन ने मुख्यमंत्री सहायता कोष से मृतकों के परिजनों और घायलों को आर्थिक सहायता प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही, परिवहन विभाग को भी निर्देश दिए गए हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरों को ले जाने वाले वाहनों की सघन चेकिंग की जाए ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो।

यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं है, बल्कि उन मजबूर मजदूरों के जीवन की त्रासदी है जो दो वक्त की रोटी के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर असुरक्षित वाहनों में सफर करने को मजबूर हैं। धार की सड़कों पर बिखरा खून और अस्पताल के गलियारों में गूंजती सिसकियां इस बात की गवाह हैं कि रफ्तार और लापरवाही का मेल कितना घातक हो सकता है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, कानूनी कार्रवाई अपना काम करेगी, लेकिन जिन 12 परिवारों ने अपने कमाऊ सदस्यों को खोया है, उनके लिए यह क्षति अपूरणीय है। इस घटना ने एक बार फिर पूरे समाज को सड़क नियमों के पालन और मानवीय संवेदनाओं के प्रति जागरूक होने की सख्त चेतावनी दी है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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